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गबन के आरोपी सेक्रेटरी की लम्बित जांच का सीडीओ ने लिया सज्ञान

सदर बिधायक के गाँव मे ही अंत्येष्टि स्थल निर्माण के नाम निकाले कई लाख-सूत्र
शौचालय निर्माण में बड़ी गड़बड़ी पर हुआ था निलम्बित, साठगांठ पर 1 महीने में ही हुआ बहाल
कौशाम्बी। गबन के आरोपी सिग्रेटरी की लम्बित जांच पर अब मुख्य विकास अधिकारी ने पूरी तरह संज्ञान ले लिया है । ज्ञात हो कि सरसँवा विकासखंड के कई गांव में तैनाती के दौरान एक सिग्रेटरी द्वारा शौचालय के नाम पर बड़े पैमाने पर गबन किया गया था ।जिस पर नागरिकों की शिकायत पर जांच बैठाई गई ।जांच टीम द्वारा सिग्रेटरी को पूर्णतया दोषी पाया गया। जिस पर उच्चाधिकारी  द्वारा तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया गया था। परंतु  सिग्रेटरी की साठगांठ और पकड़ के बदौलत उसे 1 महीने में ही बहाल कर दिया गया था।जो मौजूदा समय  कड़ा ब्लाक में तैनात है।शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने सिग्रेटरी की लंबित जांच को संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को जांच के संबंध में आवश्यक कड़े दिशा-निर्देश जारी  सूत्रों की माने तो शौचालय निर्माण में पूरी तरह फॅसे सिग्रेटरी द्वारा अपने कदम को यही नहीं रोका गया, बल्कि अपनी सारी हदों को वा  योगी सरकार की तनिक भी भय ना करते हुए सत्ता पक्ष के विधायक के गांव में ही शासन द्वारा स्वीकृत अंत्येष्टि स्थल निर्माण से पहले ही लगभग 17 लाख रुपए निकालने का आरोप क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा लगाया गया है। सरसँवा के पूरब शरीरा व गोराजू में गबन के आरोपी सेक्रेटरी की जांच महीनों बीतने के बाद भी आधूरी यही। विगत माह अफसरों ने सेक्रेटरी को अन्नतिम निलंबन पर बाहाल कर दिया है। साथ ही सेक्रेटरी को कड़ा ब्लाक में संबद्व कर दिया गया। महीनों बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट पूरी न होने पर सीडीओ ने जांच अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
सरसवां ब्लाक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकरी सुरेंद्र कुमार को आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों का चार्ज दिया गया था। आरोप है कि गोराजू व पूरब शरीरा में विकास योजनाओं में जमकर धांधली हुई हैं। तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने पूरब शरीरा में ग्राम प्रधान से सांठगाठ कर लाखों रूपये बिना कार्य ही भुगतान कर दिया था। आरोप है कि पूरब शरीरा में देवी पार्क सौन्द्रीयकरण के लिए लगभग दस लाख रूपये एक फर्म को बिना कार्य ही भुगतान कर दिया गया था। मामले की शिकायत होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने समिति बनवाकर जांच कराई थी। जांच में बिना कार्य भुगतान का मामला सत्य पाए जाने पर सेक्रेटरी व फर्म से रिकवरी कराई गई थी। साथ ही सेक्रेटरी व प्रधान को चेतावनी देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि इसके अलावा भी कई योजनाओं में लाखों रुपये का खालमेल किया गया है। गहनता से जांच हुई तो लाखों रूपये के गबन की पोल खुल सकती है। इसके अलावा गोराजू में सामुदासयिक शौचालय सहित कई योजनओं में भी जमकर धांधली की गई थी। गोराजू के ग्रामीणों ने सामुदायिक शौचालय में धांधली की शिकायत सीडीओ व डीएम से की थी। जांच में मामला सत्य पाए जाने पर अफसरों के निर्देश पर डीपीआरओ ने सेक्रेटरी को संस्पेड कर दिया गया था। चर्चा है कि इस बीच सेक्रेटरी को अनंतिम रु प से बहाल कर दिया गया है। साथ ही कड़ा ब्लाक में सम्बद्व कर कर दिया। आरोप है कि महीनों बीतने के बाद भी सेक्रेटरी की जांच पूरी नहीं हो सकी है। शुक्रवार को सदर विधायक द्वारा अपने गांव में पैदल भ्रमण के दौरान गांव के नागरिकों ने सेक्रेटरी की शिकायतों को उनके सामने रखा। जिस पर सदर विधायक द्वारा अधिकारियों को जांच के लिए निर्देशित किया गया। हालांकि सदर विधायक द्वारा इतने दिन बाद अचानक इस जांच पर संज्ञान लेने पर क्षेत्र में कानाफूसी का दौर शुरू हो गया है।

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सदर बिधायक के गाँव मे ही अंत्येष्टि स्थल निर्माण के नाम निकाले कई लाख-सूत्र
शौचालय निर्माण में बड़ी गड़बड़ी पर हुआ था निलम्बित, साठगांठ पर 1 महीने में ही हुआ बहाल
कौशाम्बी। गबन के आरोपी सिग्रेटरी की लम्बित जांच पर अब मुख्य विकास अधिकारी ने पूरी तरह संज्ञान ले लिया है । ज्ञात हो कि सरसँवा विकासखंड के कई गांव में तैनाती के दौरान एक सिग्रेटरी द्वारा शौचालय के नाम पर बड़े पैमाने पर गबन किया गया था ।जिस पर नागरिकों की शिकायत पर जांच बैठाई गई ।जांच टीम द्वारा सिग्रेटरी को पूर्णतया दोषी पाया गया। जिस पर उच्चाधिकारी  द्वारा तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया गया था। परंतु  सिग्रेटरी की साठगांठ और पकड़ के बदौलत उसे 1 महीने में ही बहाल कर दिया गया था।जो मौजूदा समय  कड़ा ब्लाक में तैनात है।शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने सिग्रेटरी की लंबित जांच को संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को जांच के संबंध में आवश्यक कड़े दिशा-निर्देश जारी  सूत्रों की माने तो शौचालय निर्माण में पूरी तरह फॅसे सिग्रेटरी द्वारा अपने कदम को यही नहीं रोका गया, बल्कि अपनी सारी हदों को वा  योगी सरकार की तनिक भी भय ना करते हुए सत्ता पक्ष के विधायक के गांव में ही शासन द्वारा स्वीकृत अंत्येष्टि स्थल निर्माण से पहले ही लगभग 17 लाख रुपए निकालने का आरोप क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा लगाया गया है। सरसँवा के पूरब शरीरा व गोराजू में गबन के आरोपी सेक्रेटरी की जांच महीनों बीतने के बाद भी आधूरी यही। विगत माह अफसरों ने सेक्रेटरी को अन्नतिम निलंबन पर बाहाल कर दिया है। साथ ही सेक्रेटरी को कड़ा ब्लाक में संबद्व कर दिया गया। महीनों बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट पूरी न होने पर सीडीओ ने जांच अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
सरसवां ब्लाक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकरी सुरेंद्र कुमार को आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों का चार्ज दिया गया था। आरोप है कि गोराजू व पूरब शरीरा में विकास योजनाओं में जमकर धांधली हुई हैं। तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने पूरब शरीरा में ग्राम प्रधान से सांठगाठ कर लाखों रूपये बिना कार्य ही भुगतान कर दिया था। आरोप है कि पूरब शरीरा में देवी पार्क सौन्द्रीयकरण के लिए लगभग दस लाख रूपये एक फर्म को बिना कार्य ही भुगतान कर दिया गया था। मामले की शिकायत होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने समिति बनवाकर जांच कराई थी। जांच में बिना कार्य भुगतान का मामला सत्य पाए जाने पर सेक्रेटरी व फर्म से रिकवरी कराई गई थी। साथ ही सेक्रेटरी व प्रधान को चेतावनी देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि इसके अलावा भी कई योजनाओं में लाखों रुपये का खालमेल किया गया है। गहनता से जांच हुई तो लाखों रूपये के गबन की पोल खुल सकती है। इसके अलावा गोराजू में सामुदासयिक शौचालय सहित कई योजनओं में भी जमकर धांधली की गई थी। गोराजू के ग्रामीणों ने सामुदायिक शौचालय में धांधली की शिकायत सीडीओ व डीएम से की थी। जांच में मामला सत्य पाए जाने पर अफसरों के निर्देश पर डीपीआरओ ने सेक्रेटरी को संस्पेड कर दिया गया था। चर्चा है कि इस बीच सेक्रेटरी को अनंतिम रु प से बहाल कर दिया गया है। साथ ही कड़ा ब्लाक में सम्बद्व कर कर दिया। आरोप है कि महीनों बीतने के बाद भी सेक्रेटरी की जांच पूरी नहीं हो सकी है। शुक्रवार को सदर विधायक द्वारा अपने गांव में पैदल भ्रमण के दौरान गांव के नागरिकों ने सेक्रेटरी की शिकायतों को उनके सामने रखा। जिस पर सदर विधायक द्वारा अधिकारियों को जांच के लिए निर्देशित किया गया। हालांकि सदर विधायक द्वारा इतने दिन बाद अचानक इस जांच पर संज्ञान लेने पर क्षेत्र में कानाफूसी का दौर शुरू हो गया है।

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