(गुरुकुल संरक्षण काव्य संगोष्ठी में ग्राम झखरासी पहुंचकर स्वतंत्र कवि मंडल सांगीपुर ने गौरवान्वित हो महसूस किया अपनी सार्थकता)
सांगीपुर, प्रतापगढ। सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था स्वतंत्र कवि मंडल द्वारा जनपद रायबरेली के तहसील सलोन के ग्राम झखरासी में *गुरुकुल* *संरक्षण काव्य संगोष्ठी* का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित राज माधव पांडेय तथा संचालन अशोक विमल ने किया। मां वीणापाणि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन अर्चन के पश्चात आतिथेय डॉक्टर शक्तिधर नाथ पांडेय ने स्वागत करते हुए कहा कि झखरासी का गुरुकुल घराना राष्टृ की सनातन संस्कृति के संवाहक के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। आचार्यकुलम में आकर साहित्यिक संस्था स्वतंत्र कवि मंडल सांगीपुर द्वारा संगोष्ठी आयोजित किया जाना बहुत ही प्रशंसनीय व स्वागत योग्य है। इस अवसर पर मंडल की ओर से सर्वप्रथम संस्कृत के महापंडित 98 वर्षीय युगऋषि आचार्य पं० त्रिपुरारि पांडेय का अंगवस्त्रम, माल्यार्पण, पट्टाभिषेक, मिष्ठान्न एवं दक्षिणा भेंटकर सारस्वत अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्र कवि मंडल सांगीपुर के संरक्षक यज्ञ नारायण सिंह अज्ञेय,अध्यक्ष अर्जुन सिंह, युवा रचनाकार अशोक विमल एवं अरविंद सत्यार्थी ने विविध रचनाएं प्रस्तुत कर कार्यक्रम को साहित्यिक बनाने में सफलता प्राप्त की। इस अवसर पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए मंडल के संरक्षक यज्ञ नारायण सिंह अज्ञेय ने कहा कि आचार्यकुलम में संगोष्ठी का आयोजन किया जाना मंडल का सार्थक प्रयास है। अध्यक्ष अर्जुन सिंह ने संगोष्ठी की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज संस्कृत के प्रकांड विद्वान का अभिनंदन करते हुए मंडल अपने को बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहा है। आतिथेय डॉ शक्तिधर नाथ पांडेय की ओर से आचार्यकुलम झखरासी द्वारा समस्त कवियों को अंगवस्त्रम, माला, डायरी व लेखनी प्रदान कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में उपस्थित लोगों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए पंडित शिवधर नाथ पांडेय ने बताया कि मेरे पूज्यपिता आचार्य पंडित त्रिपुरारि पांडेय जी द्वारा रामामरचितामृतम्(भगवान परशुराम पर आधारित), देशदिग्दर्शनम्, श्रीमत् करपात्र पवित्र चरित्रम् एवं स्तवस्तवकम् (देवी देवताओं की स्तुति)नामक पुस्तकें लिखी गई हैं। इस आचार्यकुलम में मेरे पूर्वजों द्वारा लगभग 400 वर्ष की पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां संरक्षित हैं। जिनमें क्रोडपत्रों, भूर्जपत्रों एवं हस्तनिर्मित कागजों पर लिखित पोथियों सहित 300 वर्षों के पत्रा एवं पाराशर संहिता व बाल्मीकि रामायण आदि प्राचीनतम ग्रंथ उपलब्ध हैं। संगोष्ठी में जगधर नाथ पांडेय, कलाधर पांडेय, चंद्रधर पांडेय, राजेंद्र प्रसाद शुक्ला एवं अंकित शुक्ला आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।



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