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वन गमन पर भक्तों को छलके आंसू

रानीगंज I रानीगंज के विट्ठलपुर हनुमान मंदिर पर चल रहे श्री राम ज्ञान यज्ञ कथा के छठवें दिन भगवान श्री राम  के द्वारा धनुष टूटने पर विवाह सीता माता जी के साथ संपन्न हुआ विवाह में भक्तों ने धूमधाम से विवाह उत्सव मनाया कथावाचक गो भक्त पीयूष महाराज ने कथा में बताया कि श्री राम कथा सुनने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है आगे कथावाचक ने आगे बताया कि जनकपुर से लौटने के बाद अयोध्या में चारों तरफ खुशहाली ही खुशहाली नजर आई लोग अनेकों प्रकार से गायन पुष्प वर्षा के साथ नित्य करते हुए अनेकों प्रकार बधाइयां राजा दशरथ को दी राजा दशरथ खुशी के मारे झूम रहे थे राजा दशरथ इतने खुश हो गए कि राजगद्दी से भी व्यक्त होने का निश्चय कर लिया और श्री राम जी को राजगद्दी देने का पूरे अयोध्या में जो छोरा पिटवा दिया उसी रात में कैकेई द्वारा कोप भवन में चली गई और राजा दशरथ मनाने के लिए वचनबद्ध हो गए भगवान श्री रामचंद्र जी को वनवास के लिए वचन मांगा राजा दशरथ जीने उनके वचन को मानकर बाद में दुखी हो गए मूर्छित अवस्था में रहने लगे जब इस बात की खबर भगवान श्री राम जी को मिला तो उन्होंने खुद माता का आशीर्वाद मानकर बन के के लिए निकल पड़े उनके साथ में माता सीता छोटे भाई लक्ष्मण के निकलने पर पूरे अयोध्यावासी की आंखों में आंसुओं की धार निकलने लगी

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रानीगंज I रानीगंज के विट्ठलपुर हनुमान मंदिर पर चल रहे श्री राम ज्ञान यज्ञ कथा के छठवें दिन भगवान श्री राम  के द्वारा धनुष टूटने पर विवाह सीता माता जी के साथ संपन्न हुआ विवाह में भक्तों ने धूमधाम से विवाह उत्सव मनाया कथावाचक गो भक्त पीयूष महाराज ने कथा में बताया कि श्री राम कथा सुनने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है आगे कथावाचक ने आगे बताया कि जनकपुर से लौटने के बाद अयोध्या में चारों तरफ खुशहाली ही खुशहाली नजर आई लोग अनेकों प्रकार से गायन पुष्प वर्षा के साथ नित्य करते हुए अनेकों प्रकार बधाइयां राजा दशरथ को दी राजा दशरथ खुशी के मारे झूम रहे थे राजा दशरथ इतने खुश हो गए कि राजगद्दी से भी व्यक्त होने का निश्चय कर लिया और श्री राम जी को राजगद्दी देने का पूरे अयोध्या में जो छोरा पिटवा दिया उसी रात में कैकेई द्वारा कोप भवन में चली गई और राजा दशरथ मनाने के लिए वचनबद्ध हो गए भगवान श्री रामचंद्र जी को वनवास के लिए वचन मांगा राजा दशरथ जीने उनके वचन को मानकर बाद में दुखी हो गए मूर्छित अवस्था में रहने लगे जब इस बात की खबर भगवान श्री राम जी को मिला तो उन्होंने खुद माता का आशीर्वाद मानकर बन के के लिए निकल पड़े उनके साथ में माता सीता छोटे भाई लक्ष्मण के निकलने पर पूरे अयोध्यावासी की आंखों में आंसुओं की धार निकलने लगी

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