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भारतीय जीवनशैली में आयुर्वेद का समावेश वैज्ञानिक व आध्यात्मिक दृष्टि से सदैव श्रेष्ठ– गिरीश पति

कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं में आयुर्वेदिक स्वर्ण प्राशन
अयोध्या । आरोग्य भारती अवध प्रान्त द्वारा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और आयुष्य बल बुद्धि के सर्वांगीण विकास के लिए आयुर्वेद में वर्णित स्वर्णप्राशन संस्कार का आयोजन अयोध्या में वैद्य आरपी पांडेय के संयोजन में देवकाली स्थित अनन्त शिखर में किया गया। आयोजन प्रातः औषधि संस्कार हवन से प्रारंभ हुआ फिर पुष्य नक्षत्र में मंचस्त अतिथि महंत गिरीश पति त्रिपाठी ,सचिव विकास प्राधिकरण आर पी सिंह व बीएसए संतोष देव पांडेय, राजर्षि टण्डन विवि के क्षेत्रीय अधिकारी एस बी आर त्रिपाठी ने दीप प्रज्वलन किया। धन्वंतरि स्तवन के बाद मंच से रविपुष्य नक्षत्र में 11 बच्चों को विधिवत मंत्रोचार के साथ अतिथियों के हाथों समृद्धि त्रिपाठी,भार्गवी,ज्योतिका,ओजस, सौम्या आदि को स्वर्ण प्राशन कराया गया। वशिष्ठ फाउंडेशन के अध्यक्ष महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा स्वर्ण प्राशन भारत मे प्राचीन समय से चला आ रहा है। पुराने समय माता-पिता अपने बच्चे के जन्म लेने के बाद जीभ पर चांदी या सोने की सिलाई से ॐ लिखते थे,भारतीय जीवनशैली में आयुर्वेद का समावेश आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारणों से सदैव श्रेष्ठ सिद्ध होता रहा है। बीएसए संतोष देव ने कहा विशेषज्ञों द्वारा संभावित  कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर प्रभाव की आशंका के बीच माता पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, ऐसे में हानिरहित जड़ी बूटियों से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपाय लाभकारी हैं। सचिव आर पी सिंह ने बच्चों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के साथ माता पिता व परिवार में सभी के वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता को आवश्यक बताया। उपस्थित अभिभावकों को जानकारी देते हुए आरोग्य भारती अवध प्रान्त के सह सचिव डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कश्यप संहिता के अनुसार   प्रत्येक पुष्य नक्षत्र 6 माह से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों को न्यूनतम 30 से 90 माह तक करवाने पर श्रेष्ठ शारीरिक मानसिक विकास होने का वर्णन मिलता है। प्रतिदिन भी यदि सूर्योदय से पूर्व नियमित एक मास तक प्राशन से बालक के परम मेधावी होने, व छः माह तक कराए जाने पर श्रुतधर होने का महत्व वर्णित है।बताया प्राशन से आधे घण्टे पूर्व व बाद में कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए।
स्वर्णप्राशन का उपयोग विकृतियों को ठीक कर बीमार या विकृत कोशिकाओं को पुन: सक्रिय एवं जीवंतता प्रदान करता है। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है। जिससे अध्ययनरत बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आयोजन में पहले से पंजीकृत बच्चे अपने माता पिता के साथ आये अगले पुष्य नक्षत्र तक के लिए दवा दी गयी, और खीर खिला कर विदा किया गया। आयोजन में आरोग्य भारती, उपजा, माधव सर्वोदय, अनन्त शिखर ट्रस्ट, वाराणसी से पधारे धूतपपेश्वर आदि ने सहयोग किया। कार्यक्रम में अपरान्ह 4 बजे तक 150 बच्चों को खुराक दी गयी। शिशिर मिश्र, वैद्य आरपी पांडेय,डॉ उपेन्द्र, डॉ योगेश , राजेन्द्र तिवारी,पवन पांडेय,दिनेश मिश्र, श्याम बाबू, नीरज ओझा, आशीष मिश्र, विनय दूबे, संतोष मिश्रा, अरुणांचल दूबे, बी डी पांडेय, चन्द्र मणि त्रिपाठी आदि ने उपस्थित रहे और का प्राशन करवाने में सहयोग किया।

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कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं में आयुर्वेदिक स्वर्ण प्राशन
अयोध्या । आरोग्य भारती अवध प्रान्त द्वारा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और आयुष्य बल बुद्धि के सर्वांगीण विकास के लिए आयुर्वेद में वर्णित स्वर्णप्राशन संस्कार का आयोजन अयोध्या में वैद्य आरपी पांडेय के संयोजन में देवकाली स्थित अनन्त शिखर में किया गया। आयोजन प्रातः औषधि संस्कार हवन से प्रारंभ हुआ फिर पुष्य नक्षत्र में मंचस्त अतिथि महंत गिरीश पति त्रिपाठी ,सचिव विकास प्राधिकरण आर पी सिंह व बीएसए संतोष देव पांडेय, राजर्षि टण्डन विवि के क्षेत्रीय अधिकारी एस बी आर त्रिपाठी ने दीप प्रज्वलन किया। धन्वंतरि स्तवन के बाद मंच से रविपुष्य नक्षत्र में 11 बच्चों को विधिवत मंत्रोचार के साथ अतिथियों के हाथों समृद्धि त्रिपाठी,भार्गवी,ज्योतिका,ओजस, सौम्या आदि को स्वर्ण प्राशन कराया गया। वशिष्ठ फाउंडेशन के अध्यक्ष महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा स्वर्ण प्राशन भारत मे प्राचीन समय से चला आ रहा है। पुराने समय माता-पिता अपने बच्चे के जन्म लेने के बाद जीभ पर चांदी या सोने की सिलाई से ॐ लिखते थे,भारतीय जीवनशैली में आयुर्वेद का समावेश आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारणों से सदैव श्रेष्ठ सिद्ध होता रहा है। बीएसए संतोष देव ने कहा विशेषज्ञों द्वारा संभावित  कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर प्रभाव की आशंका के बीच माता पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, ऐसे में हानिरहित जड़ी बूटियों से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपाय लाभकारी हैं। सचिव आर पी सिंह ने बच्चों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के साथ माता पिता व परिवार में सभी के वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता को आवश्यक बताया। उपस्थित अभिभावकों को जानकारी देते हुए आरोग्य भारती अवध प्रान्त के सह सचिव डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कश्यप संहिता के अनुसार   प्रत्येक पुष्य नक्षत्र 6 माह से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों को न्यूनतम 30 से 90 माह तक करवाने पर श्रेष्ठ शारीरिक मानसिक विकास होने का वर्णन मिलता है। प्रतिदिन भी यदि सूर्योदय से पूर्व नियमित एक मास तक प्राशन से बालक के परम मेधावी होने, व छः माह तक कराए जाने पर श्रुतधर होने का महत्व वर्णित है।बताया प्राशन से आधे घण्टे पूर्व व बाद में कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए।
स्वर्णप्राशन का उपयोग विकृतियों को ठीक कर बीमार या विकृत कोशिकाओं को पुन: सक्रिय एवं जीवंतता प्रदान करता है। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है। जिससे अध्ययनरत बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आयोजन में पहले से पंजीकृत बच्चे अपने माता पिता के साथ आये अगले पुष्य नक्षत्र तक के लिए दवा दी गयी, और खीर खिला कर विदा किया गया। आयोजन में आरोग्य भारती, उपजा, माधव सर्वोदय, अनन्त शिखर ट्रस्ट, वाराणसी से पधारे धूतपपेश्वर आदि ने सहयोग किया। कार्यक्रम में अपरान्ह 4 बजे तक 150 बच्चों को खुराक दी गयी। शिशिर मिश्र, वैद्य आरपी पांडेय,डॉ उपेन्द्र, डॉ योगेश , राजेन्द्र तिवारी,पवन पांडेय,दिनेश मिश्र, श्याम बाबू, नीरज ओझा, आशीष मिश्र, विनय दूबे, संतोष मिश्रा, अरुणांचल दूबे, बी डी पांडेय, चन्द्र मणि त्रिपाठी आदि ने उपस्थित रहे और का प्राशन करवाने में सहयोग किया।

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