प्रतापगढ़। बदन पर खाकी तनी थी…। कंधे पर तीन सफेद पट्टी खाकी की गरिमा को बढ़ा रही थी। उसको पहनने वाला सिपाही था..। जो हंगामा मचा रहा था..। लोगों को अपशब्द बक रहा था। लोगों की जुबां खामोश थी। इसलिए कि उन्हें खाकी का लिहाज था। सिपाही ने पुलिस के पेट्रोलिंग वाहन को नुकसान पहुचाने के इरादे के साथ। सरेआम अपने ही लोगों की इज्जत तार तार करने की कोशिश में पिटते पिटते बच गया। उसकी हरकतें देख पीआरडी जवान ने दौड़ा लिया। इस तरह से खाकी की सार्वजनिक रूप से किरकिरी होती। यही सोचकर पीआरडी जवानों में सीनियर ने साथी को आगे बढ़ने से रोक दिया..। उसके बाद भी सिपाही की हरकतें बंद नहीं हुई। ललकारता हुआ…परिसर से बाहर निकल गया। पीआरडी टोली के साथ आये दारोगा सब कुछ देख रहे थे।
इसके पहले सिपाही रेलवे परिसर में पीपल के नीचे बैठी महिला यात्रियों को गंदे इशारे कर रहा था। वहां से प्लेटफार्म पर चला गया। हंगामा करने लगा। बाहर निकला शिव मंदिर के समीप कोतवाली पुलिस की पेट्रोलिंग जीप के पास पहुंचकर पुलिस कर्मियों को गरियाने लगा। टायर पंचर करने और तार नोचने की धमकी देने लगा। हंगामा करते देख समीप खड़े पीआरडी के जवान भागकर जीप के पास पहुंचे। सिपाही उनसे भी उलझ गया। उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की। उसकी हरकत से एक जवान को गुस्सा आ गया। खास बात यह है कि यह सिपाही आये दिन रेलवे स्टेशन पर हंगामा कर यात्रियों को परेशान करता है। उनको अपमानित करता है। महिलाओं के साथ बदतमीजी करता है। सब कुछ जानते हुये भी रेल प्रशासन और उसकी पुलिस कुछ नहीं करती है। यह यात्रियों का सवाल रेल के अधिकारियों से है। अधीक्षक अनिल दुबे का कहना है कि प्लेटफार्म पर शांति बने रहे। यात्री सुरक्षित रहें। यह देखना जीआरपी और आरपीएफ का काम है।



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