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अनुदेशकों की हालत पर सरकार नहीं दे रही ध्यान तेजस्वी शुक्ल

रखहा, प्रतापगढ़ । कोरोना जैसी महामारी के बीच शासन की अनुशंसा पर कार्यरत अनुदेशक शासन के दोहरे मापदंड के कारण दोराहे पर खड़े हैं । उन्हें ना तो नौकरी के बदले उचित पारिश्रमिक मिल पा रहा है, और ना ही उचित सम्मान । यह बातें उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने औपचारिक मुलाकात में कहीं ।  उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार के चार साल के कार्यकाल के बाद भी अनुदेशको की हालत जस की तस है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने कहा कि प्रदेश सरकार अनुदेशको को समस्याओं के निस्तारण पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अनुदेशकों  का मानदेय सत्रह हजार ना करके बल्कि 8400 से घटाकर 7000 करने से अनुदेशक हताश हैं।  उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से प्रदेश भर में करीब सौ अनुदेशको की मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि अनुदेशको के आश्रितों को भी 50 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। सरकार को प्रदेश के विभिन्घ्न अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित अनुदेशको के भी इलाज का उचित प्रबंध करना चाहिए। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग मे कार्यरत अनुदेशको के पद को स्थाई कर प्रशिक्षित वेतनमान दिया जाना चाहिए क्योंकि इस मंहगाई के दौर मे इतने अल्प मानदेय से जीवोपार्जन कर पाना बहुत मुश्किल है । प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय सत्रह हजार रुपये करने के साथ शिक्षकों की तरह अन्य सुविधायें दिये जाने को लेकर मांग पत्र सौंपा है ।

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रखहा, प्रतापगढ़ । कोरोना जैसी महामारी के बीच शासन की अनुशंसा पर कार्यरत अनुदेशक शासन के दोहरे मापदंड के कारण दोराहे पर खड़े हैं । उन्हें ना तो नौकरी के बदले उचित पारिश्रमिक मिल पा रहा है, और ना ही उचित सम्मान । यह बातें उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने औपचारिक मुलाकात में कहीं ।  उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार के चार साल के कार्यकाल के बाद भी अनुदेशको की हालत जस की तस है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने कहा कि प्रदेश सरकार अनुदेशको को समस्याओं के निस्तारण पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अनुदेशकों  का मानदेय सत्रह हजार ना करके बल्कि 8400 से घटाकर 7000 करने से अनुदेशक हताश हैं।  उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से प्रदेश भर में करीब सौ अनुदेशको की मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि अनुदेशको के आश्रितों को भी 50 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। सरकार को प्रदेश के विभिन्घ्न अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित अनुदेशको के भी इलाज का उचित प्रबंध करना चाहिए। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग मे कार्यरत अनुदेशको के पद को स्थाई कर प्रशिक्षित वेतनमान दिया जाना चाहिए क्योंकि इस मंहगाई के दौर मे इतने अल्प मानदेय से जीवोपार्जन कर पाना बहुत मुश्किल है । प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय सत्रह हजार रुपये करने के साथ शिक्षकों की तरह अन्य सुविधायें दिये जाने को लेकर मांग पत्र सौंपा है ।

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