जौनपुर। जानलेवा और दहशत बनती जा रही महामारी काल में जनप्रतिनिधियों की जनप्रतिनिधियों की भूमिका शून्य दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है वे अपने कर्तव्यों से दर किनार कर गये है। मंत्री से लेकर सांसद विधायक तक का संक्रमण की विकरालता रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं दिखाई दे रहा है। वे न मास्क बंटवा रहे है और न सेनेटाइजर और गरीबों की मदद करना तो दूर की बात है। मरीजों के दवा इलाज और इन्जेक्शन, आक्सीजन की व्यवस्था का जायजा लेने तथा और बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए उनका कोई रोल दिखाई नहीं दे रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अपने तरीके से व्यवस्था देने का पूरा दावा तो कर रहा है लेकिन वास्तविकता में यह दावा कितना सही साबित हो रहा है यह प्रतिदिन कई मामलों में सामने आ रहा है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को पूर्व की भांति कोरोना काल में आगे आकर गरीब और कमजोर वर्ग को व्यापारियांे और सम्पन्न लोगों उनकी अधिकतम सहायता करने की अपील करने के साथ ही खुद भी अपने कर्तव्यों को समाज के सामने दर्शाना चाहिए। उनकी समाज में कही उपस्थिति न दर्ज कराने की चर्चा भी लोगों में हो रही है। 355 बेड और 36 वेटिलेटरों की सहायता से कोरोना की जंग से विजय प्राप्त करना संक्रमितों की बड़ी संख्या को देखते हुए कठिन साबित हो रहा है। इलाज व व्यवस्था में लापरवाही प्रतिदिन सामने आ रही है और लोग दम तोड़ने का विवश हो रहे है। शाहगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज न होने से युवक की हुई मौत उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। ऐसे ही कई जगहों पर दुव्र्यवस्थायें प्रत्यक्ष सामने आकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रही है।
जौनपुर। जानलेवा और दहशत बनती जा रही महामारी काल में जनप्रतिनिधियों की जनप्रतिनिधियों की भूमिका शून्य दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है वे अपने कर्तव्यों से दर किनार कर गये है। मंत्री से लेकर सांसद विधायक तक का संक्रमण की विकरालता रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं दिखाई दे रहा है। वे न मास्क बंटवा रहे है और न सेनेटाइजर और गरीबों की मदद करना तो दूर की बात है। मरीजों के दवा इलाज और इन्जेक्शन, आक्सीजन की व्यवस्था का जायजा लेने तथा और बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए उनका कोई रोल दिखाई नहीं दे रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अपने तरीके से व्यवस्था देने का पूरा दावा तो कर रहा है लेकिन वास्तविकता में यह दावा कितना सही साबित हो रहा है यह प्रतिदिन कई मामलों में सामने आ रहा है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को पूर्व की भांति कोरोना काल में आगे आकर गरीब और कमजोर वर्ग को व्यापारियांे और सम्पन्न लोगों उनकी अधिकतम सहायता करने की अपील करने के साथ ही खुद भी अपने कर्तव्यों को समाज के सामने दर्शाना चाहिए। उनकी समाज में कही उपस्थिति न दर्ज कराने की चर्चा भी लोगों में हो रही है। 355 बेड और 36 वेटिलेटरों की सहायता से कोरोना की जंग से विजय प्राप्त करना संक्रमितों की बड़ी संख्या को देखते हुए कठिन साबित हो रहा है। इलाज व व्यवस्था में लापरवाही प्रतिदिन सामने आ रही है और लोग दम तोड़ने का विवश हो रहे है। शाहगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज न होने से युवक की हुई मौत उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। ऐसे ही कई जगहों पर दुव्र्यवस्थायें प्रत्यक्ष सामने आकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल रही है।



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