V
E
उत्तर प्रदेश के जिले
भारत के राज्य
🔥 ट्रेंडिंग

सदर तहसील में कागजों पर हो रहा शिकायतों का निस्तारण

प्रतापगढ़। फरियादियों की शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिये भले ही शासन कटिबद्ध है, लेकिन जिले के अफसर मनमानी से बाज नहीं आ रहे है। अधिकारी कागजों पर ही शिकायतों का निस्तारण कर गुणवत्तापूर्ण होने का दावा कर वाहवाही लूट रहे है। जबकि शिकायतों के गुणवत्ता निस्तारण की बात तो दूर यहंा आरोपित अफसर से ही जॉंच कराकर प्रकरण में लीपापोती कर रिपोर्ट भेज दी जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कैसे सम्भव है ? ताजा मामला सदर तहसील का है। जहंॉ भ्रष्टाचार की शिकायत पर एसडीएम ने शिकायत की जॉंच आरोपित नायब तहसीलदार नगर से ही करा डाली।  बता दें कि शहर के सदर बाजार नगर पालिका परिषद बेल्हा निवासी पत्रकार अजय कुमार ने 16 अक्टूबर 2023 को तहसील सदर में नायब तहसीलदार नगर व उनके कथित पेशकार पप्पू द्वारा मुकदमों के निस्तारण में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री समेत आलाधिकारियों से की गयी थी। शिकायत को मुख्यमंत्री के विशेष सचिव आशुतोष टण्डन अग्निहोत्री ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से नियमानुसार कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी थी। मामले में एसडीएम सदर ने तहसीलदार सदर से जॉच कराकर बगैर शिकायतकर्ता का पक्ष लिये बगैर मामले का निस्तारण कर रिपोर्ट शासन को भेजकर इतिश्री कर ली। अफसरों के इस कारनामे की जानकारी शिकायतकर्ता को हुई तो पुनः 23 नवम्बर को मुख्यमंत्री समेत आला अधिकारियों से की। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए मुख्यंमत्री के संयुक्त सचिव अजय कुमार ओझा ने डीएम को प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही किये जाने का निर्देश दिया। इस पर डीएम ने एसडीएम सदर से प्रकरण की जॉंच कर आख्या तलब की। आश्चर्य की बात यह है कि एसडीएम सदर ने मामले में कार्रवाई के बजाय आरोपित नायब तहसीलदार नगर को ही जॉंच अधिकारी नामित कर शिकायत का निस्तारण कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर शासन के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की मंशा कैसे फलीभूत होगी। इस मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपित अफसर को बचाने के लिये बगैर पक्ष लिये गोलमोल रिपोर्ट शासन को भेज दी जा रही है। शिकायतकर्ता ने पुनः अफसरों के इस कारनामे की शिकायत शासन से करने की बात कही है।

प्रतापगढ़। फरियादियों की शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिये भले ही शासन कटिबद्ध है, लेकिन जिले के अफसर मनमानी से बाज नहीं आ रहे है। अधिकारी कागजों पर ही शिकायतों का निस्तारण कर गुणवत्तापूर्ण होने का दावा कर वाहवाही लूट रहे है। जबकि शिकायतों के गुणवत्ता निस्तारण की बात तो दूर यहंा आरोपित अफसर से ही जॉंच कराकर प्रकरण में लीपापोती कर रिपोर्ट भेज दी जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कैसे सम्भव है ? ताजा मामला सदर तहसील का है। जहंॉ भ्रष्टाचार की शिकायत पर एसडीएम ने शिकायत की जॉंच आरोपित नायब तहसीलदार नगर से ही करा डाली।  बता दें कि शहर के सदर बाजार नगर पालिका परिषद बेल्हा निवासी पत्रकार अजय कुमार ने 16 अक्टूबर 2023 को तहसील सदर में नायब तहसीलदार नगर व उनके कथित पेशकार पप्पू द्वारा मुकदमों के निस्तारण में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री समेत आलाधिकारियों से की गयी थी। शिकायत को मुख्यमंत्री के विशेष सचिव आशुतोष टण्डन अग्निहोत्री ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से नियमानुसार कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी थी। मामले में एसडीएम सदर ने तहसीलदार सदर से जॉच कराकर बगैर शिकायतकर्ता का पक्ष लिये बगैर मामले का निस्तारण कर रिपोर्ट शासन को भेजकर इतिश्री कर ली। अफसरों के इस कारनामे की जानकारी शिकायतकर्ता को हुई तो पुनः 23 नवम्बर को मुख्यमंत्री समेत आला अधिकारियों से की। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए मुख्यंमत्री के संयुक्त सचिव अजय कुमार ओझा ने डीएम को प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही किये जाने का निर्देश दिया। इस पर डीएम ने एसडीएम सदर से प्रकरण की जॉंच कर आख्या तलब की। आश्चर्य की बात यह है कि एसडीएम सदर ने मामले में कार्रवाई के बजाय आरोपित नायब तहसीलदार नगर को ही जॉंच अधिकारी नामित कर शिकायत का निस्तारण कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर शासन के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की मंशा कैसे फलीभूत होगी। इस मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपित अफसर को बचाने के लिये बगैर पक्ष लिये गोलमोल रिपोर्ट शासन को भेज दी जा रही है। शिकायतकर्ता ने पुनः अफसरों के इस कारनामे की शिकायत शासन से करने की बात कही है।