प्रयागराज। प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों का एक बड़ा वर्ग रहता है और लगभग हर क्षेत्र में अपनी स्थिति दर्ज कराते हैं। पुस्तक मेला भी उससे अछूता नहीं है। एंग्लों बंगाली इंटर कालेज परिसर में चल रहे प्रयागराज पुस्तक मेले के दिव्यांश प्रकाशन स्टाल का नजारा अन्य स्टालों से थोड़ा अलग दिखा। छात्र-छात्राओं का एक बड़ा समूह पूर्व में काशी विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय या दिल्ली विश्वविद्यालय से डिग्री लेने वाले अथवा इन स्थानों से जुड़े छात्रों जो अब स्थापित लेखकों में शुमार हो गये हैं, कि पुस्तकों पर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे कुछ प्रमुख नामों में सत्य व्यास, दिव्य प्रकाश दूबे, नीलोत्पल मृणाल, विमल चन्द्र पाण्डेय, राघवेन्द्र सिंह नाम शामिल हैं। स्टाल पर सत्य व्यास की अब तक की प्रकाशित पुस्तकें ‘बनारस टाॅकीज’, दिल्ली दरबार, चैरासी, बागी बलिया और ‘उफ्फ कोलकता’, दिव्य प्रकाश दूबे की कहानियाॅ ‘शर्ते लागू’, मसाला चाय, आको-बाको, इब्नेबतूती और ‘यार पापा’, नीलोत्पल मृणाल का उपन्यास ‘डार्क हाॅर्स’, ‘यार जादूगर’ और ‘औघड़’, विमल चन्द्र पाण्डेय की पुस्तक ‘लहरतारा’ विमल चन्द्र पाण्डेय की ‘इलाहाबाद ब्यूज’ किताबों की ओर लोग आकर्षित होते रहे। उल्लेखनीय है कि अधिकांश पुस्तकें विश्वविद्यालय के फांका-मस्ती, छात्रावास उनका बिन्दास जीवन या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े तमाम दुखद-सुखद अनुभव पर केन्द्रित है। जो हर छात्र-छात्राओं को अपनी कहानी लगती है। जगत तारन कालेज की छात्रा हर्षिता सिंह ने कहा कि लगता है कि कोई हम लोगों की कहानी को कुछ शब्द दे रहा है। इन किताबों में न कहीं तनाव झलकता है न ही कोई बनावटीपन। अभिषेक पाण्डेय ने कहा कि उन्हें इन लेखकों की किताबों के सारे कलेक्शन हैं। और उन्हें जब भी समय मिलता है तो मस्ती के साथ पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि आज हम अपने दोस्तों को यह किताबें दिलाने के लिये आये हुये हैं। ‘ज्ञान कुंभ’ थीम पर आधारित प्रयागराज पुस्तक मेले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे रतन लाल हांगलू, वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र मिश्र, दयाशंकर शुक्ल सागर की किताबें भी खोजी और खरीदी गयीं। पुस्तक मेले के आयोजक मनोज सिंह चन्देल ने बताया कि प्रयागराज पुस्तक मेला अब अपने अंतिम दौर में पहुॅच गया है। दस दिवसीय पुस्तक मेला का आज आठवां दिन रहा। कोहरा और ठण्ड के बावजूद एंग्लों बंगाली इंटर कालेज में लगे पुस्तक मेले में भारी संख्या में पुस्तक प्रेमी पहुॅचे। जहां पर लोगों ने पुस्तकें खरीदने के साथ-साथ चाय-काॅफी और कई स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ उठाया। जबकि पुस्तक मेले के सह-संयोजक मनीष गर्ग ने बताया कि पुस्तक मेले को इस बार फोर्सवन बुक्स, अग्रवाल सर्व शिक्षा शिक्षा ट्रस्ट और प्रयागराज के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। पुस्तक प्रेमियों के लिए सुबह 11 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे चल रहा है। जो कि 31 दिसम्बर खुला रहेगा। पुस्तक मेले में रक्त संकल्प ब्लड डोनेशन प्लेज की ओर से पुस्तक प्रेमियों से यह अपील करती दिखाई पड़ती है कि लोगों को जीवन देने के लिये रक्तदान करें। इस स्टाल पर रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
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पुस्तक मेला में पुरनियों की किताबों की धूम

प्रयागराज। प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों का एक बड़ा वर्ग रहता है और लगभग हर क्षेत्र में अपनी स्थिति दर्ज कराते हैं। पुस्तक मेला भी उससे अछूता नहीं है। एंग्लों बंगाली इंटर कालेज परिसर में चल रहे प्रयागराज पुस्तक मेले के दिव्यांश प्रकाशन स्टाल का नजारा अन्य स्टालों से थोड़ा अलग दिखा। छात्र-छात्राओं का एक बड़ा समूह पूर्व में काशी विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय या दिल्ली विश्वविद्यालय से डिग्री लेने वाले अथवा इन स्थानों से जुड़े छात्रों जो अब स्थापित लेखकों में शुमार हो गये हैं, कि पुस्तकों पर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे कुछ प्रमुख नामों में सत्य व्यास, दिव्य प्रकाश दूबे, नीलोत्पल मृणाल, विमल चन्द्र पाण्डेय, राघवेन्द्र सिंह नाम शामिल हैं। स्टाल पर सत्य व्यास की अब तक की प्रकाशित पुस्तकें ‘बनारस टाॅकीज’, दिल्ली दरबार, चैरासी, बागी बलिया और ‘उफ्फ कोलकता’, दिव्य प्रकाश दूबे की कहानियाॅ ‘शर्ते लागू’, मसाला चाय, आको-बाको, इब्नेबतूती और ‘यार पापा’, नीलोत्पल मृणाल का उपन्यास ‘डार्क हाॅर्स’, ‘यार जादूगर’ और ‘औघड़’, विमल चन्द्र पाण्डेय की पुस्तक ‘लहरतारा’ विमल चन्द्र पाण्डेय की ‘इलाहाबाद ब्यूज’ किताबों की ओर लोग आकर्षित होते रहे। उल्लेखनीय है कि अधिकांश पुस्तकें विश्वविद्यालय के फांका-मस्ती, छात्रावास उनका बिन्दास जीवन या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े तमाम दुखद-सुखद अनुभव पर केन्द्रित है। जो हर छात्र-छात्राओं को अपनी कहानी लगती है। जगत तारन कालेज की छात्रा हर्षिता सिंह ने कहा कि लगता है कि कोई हम लोगों की कहानी को कुछ शब्द दे रहा है। इन किताबों में न कहीं तनाव झलकता है न ही कोई बनावटीपन। अभिषेक पाण्डेय ने कहा कि उन्हें इन लेखकों की किताबों के सारे कलेक्शन हैं। और उन्हें जब भी समय मिलता है तो मस्ती के साथ पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि आज हम अपने दोस्तों को यह किताबें दिलाने के लिये आये हुये हैं। ‘ज्ञान कुंभ’ थीम पर आधारित प्रयागराज पुस्तक मेले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे रतन लाल हांगलू, वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र मिश्र, दयाशंकर शुक्ल सागर की किताबें भी खोजी और खरीदी गयीं। पुस्तक मेले के आयोजक मनोज सिंह चन्देल ने बताया कि प्रयागराज पुस्तक मेला अब अपने अंतिम दौर में पहुॅच गया है। दस दिवसीय पुस्तक मेला का आज आठवां दिन रहा। कोहरा और ठण्ड के बावजूद एंग्लों बंगाली इंटर कालेज में लगे पुस्तक मेले में भारी संख्या में पुस्तक प्रेमी पहुॅचे। जहां पर लोगों ने पुस्तकें खरीदने के साथ-साथ चाय-काॅफी और कई स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ उठाया। जबकि पुस्तक मेले के सह-संयोजक मनीष गर्ग ने बताया कि पुस्तक मेले को इस बार फोर्सवन बुक्स, अग्रवाल सर्व शिक्षा शिक्षा ट्रस्ट और प्रयागराज के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। पुस्तक प्रेमियों के लिए सुबह 11 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे चल रहा है। जो कि 31 दिसम्बर खुला रहेगा। पुस्तक मेले में रक्त संकल्प ब्लड डोनेशन प्लेज की ओर से पुस्तक प्रेमियों से यह अपील करती दिखाई पड़ती है कि लोगों को जीवन देने के लिये रक्तदान करें। इस स्टाल पर रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।



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