सगरासुन्दरपुर । हन्डौर पूरे दुबान में मा वीणा वादिनी रामलीला समिति के द्वारा रामलीला मंचन के प्रथम दिन जनकपुरी में माता सीता और अयोध्या में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्मोत्सव का मंचन किया गया जिसमे समाजसेवी अभिननंदन सिंह किल्लू ने फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ किया। उन्होने कहा कि रामलीला मंचन के माध्यम से भाई-भाई के प्रेम और असत्य पर सत्य का विजय पताका कैसे फहराता है सहित रामलीला से हमें अच्छी बातों का अनुशरण करने की भी सीख मिलती है। विशिष्ट अतिथि के रुप में बोलते संजय शुक्ल ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम आदर्श की प्रतिमूर्ति हैं । रामलीला मे महाराज दशरथ पुत्र प्राप्ति न होने पर चिंतित रहे राजा मंत्री व गुरु से विचार विमर्श करते के बाद श्रृंगी ऋषि के यज्ञ से अग्निदेव प्रकट होते हैं राजा दशरथ को प्रसाद देते हैं और राजा दशरथ तीनों रानियों को प्रसाद देते हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद रानी सुमित्रा, कैकेई और कौशल्या के गर्भ से श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। राजा के महल में पुत्र रत्न प्राप्ति पर अयोध्या नगर मे खुशियाँ मनाने के साथ महिलाओ ने सोहर गाया अगले दृश्य मे रावण अत्याचार का दृश्य दिखाया गया तथा जनकपुरी में अकाल पड़ा है, राजा जनक के दरबार में फरियादी आते हैं। गुरुजनों के बताने पर राजा जनक सोने का हल चलाएगें तो समस्या का समाधान होगा।राजा जनक व महारानी हल चलाते है, धरती से माता सीता का जन्म होता है। दशरथ लक्ष्मीकांत दुबे व जनक राजेश दुबे, रावण अरविन्द दुबे, सेनापति कपिल मौर्य, सुमंत अभिषेक दुबे, वशिष्ठ हनुमान दुबे व श्रृंगीरिशि श्याम तिवारी,सीता सूरज दुबे, कौशल्या निखिल, सुमित्रा रोहित दुबे, कैकेयी मनीष दुबे, हास्य विदूषक के रुप में शिवप्रसाद विश्वकर्मा के रुप में ने अभिनय कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान सुरेश मिश्रा मदन शिव शंकरदुबे अनूप त्रिपाठी , प्रमोद शुक्ल, गौरीशंकर दुबे, शहबाज खान,लालजी दुबे, रंजन कुमार, शिवसम्पत वर्मा, शिवशंकर तिवारी, जिगर, मथुरा प्रसाद यादव प्रधान बासूपुर, अनिल सिंह, लालजी दुबे, शिवकुमार, कौशलेन्द्र दुबे, अनिल सरोज आदि रहे।
सगरासुन्दरपुर । हन्डौर पूरे दुबान में मा वीणा वादिनी रामलीला समिति के द्वारा रामलीला मंचन के प्रथम दिन जनकपुरी में माता सीता और अयोध्या में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्मोत्सव का मंचन किया गया जिसमे समाजसेवी अभिननंदन सिंह किल्लू ने फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ किया। उन्होने कहा कि रामलीला मंचन के माध्यम से भाई-भाई के प्रेम और असत्य पर सत्य का विजय पताका कैसे फहराता है सहित रामलीला से हमें अच्छी बातों का अनुशरण करने की भी सीख मिलती है। विशिष्ट अतिथि के रुप में बोलते संजय शुक्ल ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम आदर्श की प्रतिमूर्ति हैं । रामलीला मे महाराज दशरथ पुत्र प्राप्ति न होने पर चिंतित रहे राजा मंत्री व गुरु से विचार विमर्श करते के बाद श्रृंगी ऋषि के यज्ञ से अग्निदेव प्रकट होते हैं राजा दशरथ को प्रसाद देते हैं और राजा दशरथ तीनों रानियों को प्रसाद देते हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद रानी सुमित्रा, कैकेई और कौशल्या के गर्भ से श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। राजा के महल में पुत्र रत्न प्राप्ति पर अयोध्या नगर मे खुशियाँ मनाने के साथ महिलाओ ने सोहर गाया अगले दृश्य मे रावण अत्याचार का दृश्य दिखाया गया तथा जनकपुरी में अकाल पड़ा है, राजा जनक के दरबार में फरियादी आते हैं। गुरुजनों के बताने पर राजा जनक सोने का हल चलाएगें तो समस्या का समाधान होगा।राजा जनक व महारानी हल चलाते है, धरती से माता सीता का जन्म होता है। दशरथ लक्ष्मीकांत दुबे व जनक राजेश दुबे, रावण अरविन्द दुबे, सेनापति कपिल मौर्य, सुमंत अभिषेक दुबे, वशिष्ठ हनुमान दुबे व श्रृंगीरिशि श्याम तिवारी,सीता सूरज दुबे, कौशल्या निखिल, सुमित्रा रोहित दुबे, कैकेयी मनीष दुबे, हास्य विदूषक के रुप में शिवप्रसाद विश्वकर्मा के रुप में ने अभिनय कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान सुरेश मिश्रा मदन शिव शंकरदुबे अनूप त्रिपाठी , प्रमोद शुक्ल, गौरीशंकर दुबे, शहबाज खान,लालजी दुबे, रंजन कुमार, शिवसम्पत वर्मा, शिवशंकर तिवारी, जिगर, मथुरा प्रसाद यादव प्रधान बासूपुर, अनिल सिंह, लालजी दुबे, शिवकुमार, कौशलेन्द्र दुबे, अनिल सरोज आदि रहे।



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