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डिजिटल युग मे भी कवि सम्मेलन की प्रासंगिकता बरकरार- राजेश मिश्र

मदईपुर मे कविसम्मेलन हुआ सम्पन्न–
प्रतापगढ । मांधाता ब्लॉक के मदईपुर में स्वर्गीय राजकुमारी ओझा की स्मृति में रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन  सम्पन्न हुआ जिसमें विभिन्न विधाओं के कवियों में अपनी रचनाओ का  काव्य पाठ करके लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम की शुरुआत सुरेश दुबे व्योम की वाणी वंदना से हुई उसके बाद अर्जुन साहू  कुकडुककू  ने अपनी कविता ‘चंदन जैसे महक रही है माटी मेरे देश की’ पढकर लोगो राष्ट्र प्रेम का अलख जगाया।  अनूप त्रिपाठी ने राम समझ रहमान समझ ले ,धर्म समझ ईमान समझ ले । मंदिर कैसा मस्जिद कैसी, ईश्वर ईश्वर कि सब स्थान समझ  ले। से प्रेम सद्भाव का संदेश दिया , हरिवंश शौर्य  ने अपनी ओज की रचना से  पड़ोसी देश को  सचेत किया  ‘सीधे कै मुहं कूकुर  चाटै उल्टा चोर कोतवाल को डाटै को लोगो ने  सराहा।  कवियित्री  किरन कुंकुम  ने  अपनी  रचना से नेताओ पर तंज कसा ‘.संसद में बैठो अगर करो वतन से प्यार, जनता का होता नहीं भाषण से उद्धार ।  से मंच को ऊंचाई  दी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे शिक्षक राजेश मिश्र ने कहा कि साहित्य समाज को जागरूक करता है इंटरनेट के जमाने में भी कवि सम्मेलन की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है क्योंकि यह समाज के बीच जाकर जागृत करने का प्रयास करता है , इसके अलावा आचार्य विनोद दुबे, अमर नाथ बेजोड  , अमित कुमार शर्मा , डॉ अरूण रत्नाकर ,आचार्य संतोष मिश्र ने भी काव्य पाठ किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता दयाशंकर पांडेय व संचालन सुरेश नारायण दुबे ने किया स्वागत ज्ञानेंद्र प्रकाश ओझा , देवेंद्र  प्रकाश ओझा व आभार प्रदर्शन  संयोजक धर्माचार्य राघवेंद्र प्रकाश ओझा ( विदेहानंद जी महाराज ) ने जताया ।इस अवसर पर  सोनू  ओझा  ,आशीष, अतिथि,  अनूप ओझा  सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे ।

मदईपुर मे कविसम्मेलन हुआ सम्पन्न–
प्रतापगढ । मांधाता ब्लॉक के मदईपुर में स्वर्गीय राजकुमारी ओझा की स्मृति में रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन  सम्पन्न हुआ जिसमें विभिन्न विधाओं के कवियों में अपनी रचनाओ का  काव्य पाठ करके लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम की शुरुआत सुरेश दुबे व्योम की वाणी वंदना से हुई उसके बाद अर्जुन साहू  कुकडुककू  ने अपनी कविता ‘चंदन जैसे महक रही है माटी मेरे देश की’ पढकर लोगो राष्ट्र प्रेम का अलख जगाया।  अनूप त्रिपाठी ने राम समझ रहमान समझ ले ,धर्म समझ ईमान समझ ले । मंदिर कैसा मस्जिद कैसी, ईश्वर ईश्वर कि सब स्थान समझ  ले। से प्रेम सद्भाव का संदेश दिया , हरिवंश शौर्य  ने अपनी ओज की रचना से  पड़ोसी देश को  सचेत किया  ‘सीधे कै मुहं कूकुर  चाटै उल्टा चोर कोतवाल को डाटै को लोगो ने  सराहा।  कवियित्री  किरन कुंकुम  ने  अपनी  रचना से नेताओ पर तंज कसा ‘.संसद में बैठो अगर करो वतन से प्यार, जनता का होता नहीं भाषण से उद्धार ।  से मंच को ऊंचाई  दी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे शिक्षक राजेश मिश्र ने कहा कि साहित्य समाज को जागरूक करता है इंटरनेट के जमाने में भी कवि सम्मेलन की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है क्योंकि यह समाज के बीच जाकर जागृत करने का प्रयास करता है , इसके अलावा आचार्य विनोद दुबे, अमर नाथ बेजोड  , अमित कुमार शर्मा , डॉ अरूण रत्नाकर ,आचार्य संतोष मिश्र ने भी काव्य पाठ किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता दयाशंकर पांडेय व संचालन सुरेश नारायण दुबे ने किया स्वागत ज्ञानेंद्र प्रकाश ओझा , देवेंद्र  प्रकाश ओझा व आभार प्रदर्शन  संयोजक धर्माचार्य राघवेंद्र प्रकाश ओझा ( विदेहानंद जी महाराज ) ने जताया ।इस अवसर पर  सोनू  ओझा  ,आशीष, अतिथि,  अनूप ओझा  सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे ।