वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक और सांईनाथ होम्योपैथी अस्पताल के निदेशक डॉ. एस.एम.सिंह ने
बताए बचाव के तरीके और उपचार
लोकमित्र ब्यूरो
प्रयागराज। कंजक्टिवाइटिस आंखों का एक संक्रमण है। इसे आमतौर पर पिंक आई के नाम से भी
जाना जाता है। यह बीमारी बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को अपनी चपेट में ले लेती है। मगर बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसके उपचार में होमियोपैथी बहुत ही उपयुक्त है। उक्त बातें जानें माने होमियोपैथिक चिकित्सक व श्री सांईनाथ होम्योपैथी अस्पताल के निदेशक डॉ. एस.एम.सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि यह वायरस जनित संक्रामक रोग है। इसके प्रमुख लक्षणों में आंखों का लाल होना, जलन, खुजली और आंख से लगातार आंसू निकलना, साफ या पीला स्राव बहना, पलकें आपस में चिपक जाना, पलक में सूजन होना आदि प्रमुख शामिल हैं। इधर पिंक आई (कंजक्टिवाइटिस) का खतरा बढ़ गया है। आंख का यह संक्रमण स्कूली बच्चों के साथ-साथ हर उम्र के लोगों में फैल रहा है। चपेट में आने वाले बच्चे हों या युवा, सबकी आंखें लाल हो जा रही हैं। उन्होंने इसका एक कारण बारिश न होना बताया। कहाकि यह संक्रमण दूसरों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। अगर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कोई आता है तो वह भी चपेट में आ सकता है, क्योंकि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले आंसुओं में भी रहता है। संक्रमित व्यक्ति की खांसी और छींक से भी संक्रमण फैल सकता है। बचाव के बारे में पूछे जाने पर डॉ. सिंह बताया कि जो भी व्यक्ति इस बीमारी की चपेट आ जाए उसे कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। इनमें आंखों को रगड़े नहीं। परिवार के अन्य सदस्यों से दूर रहे। अपनी आंखों को समय-समय पर धोए, थोड़े-थोड़े समय पर अपने हाथों की सफाई करे, आंखों को बार-बार न छुए, अपने आसपास सफाई रखे, अगर बाहर जाना ज्यादा जरूरी है तो काला चश्मा पहन कर जाए आदि शामिल हैं। जो व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आए उसे तत्काल नेत्र चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। बाहर निकलते समय चश्मा लगाकर ही जाए। अपना तौलिया और कपड़े किसी से शेयर न करे। उन्होंने दावा किया कि इस बीमारी में होम्योपैथी कारगर प्रमाणित चिकित्सा है। यूफेसिया नामक दवा की चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सामान्य भाषा में यह आई ब्राइट कहलाती है। आजकल आंखों में जो संक्रमण चल रहा है, उसमें तत्काल परिणाम प्राप्त होते हैं। यह दवा विशेषकर नेत्रच्छद के श्लैष्मिक आवरण पर कार्य करती है। ऐसे संक्रमण में यूफेसिया 30 शक्ति की 2 गोलियां दिन में 4 बार ली जा सकती हैं। यही नहीं अगर किसी व्यक्ति में संक्रमित होने के भय से घबराहट पैदा हो तो अर्जेन्टम नाइट्रिकम 200 की मात्र 1 खुराक जादू का कार्य करती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपने बच्चों की आंखों का विशेष खयाल रखें। यूफेसिया नामक दवा श्री सांईनाथ होम्योपैथी अस्पताल जार्जटाउन में निःशुल्क उपलब्ध है। जरूरतमंद लोग प्राप्त कर सकते हैं।



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