गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान का आयोजन
‘गांधी संगत’ के अन्तर्गत ‘गांधी और कला’ विषय पर विशेष व्याख्यान
प्रयागराज। किसी भी कला में विषय का द्वंद हमेशा रहता है। इसलिए एक कलाकार के लिए विषय की स्पष्ट समझ बहुत जरूरी है तभी वह जीवन से सरोकार रखने वाली कला का सृजन कर सकता है। गांधी के जीवन संघर्ष और उससे संबंधित चित्रों को बहुत बनाया गया है, उनपर विपुल साहित्य की रचना हुई है। उनके विचारों से समृद्ध साहित्य भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है लेकिन उनके विचारों की कलात्मक अभिव्यक्ति की अल्प मौजूदगी आश्चर्य में डालती है।दुनिया के तमाम प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा गांधी के शरीर को तो चित्रित किया गया किंतु उनके विचारों के चित्रण का अभाव रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उक्त बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय जैतली ने कहीं । वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के ‘ गांधी संगत ‘ कार्यक्रम में विशेष व्याख्यान के अंतर्गत अपनी बात रख रहे थे। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने गांधी के कला संबंधी उन विचारों और दृष्टिकोणों को युवाओं के सामने रखा जो आज बेहद प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.तोषी आनंद तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुरेंद्र कुमार ने किया। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रोफेसर प्रो.पी.के.साहू , डॉ.कुमार वीरेंद्र, प्रवीण शेखर, डॉ. रचना गौड़, डॉ. कल्पना वर्मा, डॉ. गाजुला राजू, वरिष्ठ कवि अशोक श्रीवास्तव, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. मृत्युंजय राव परमार, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. रेहान,डॉ. मुकेश यादव, डॉ. सौरभ सिंह, गौरव, निशांत, राहुल, श्वेता, श्रष्टि, दिव्या, प्रतिमा, अभिषेक, धर्मवीर, दरख्शा, बालकरण, पंकज, मेहताब, जगदीश सहित इलाहाबाद विश्वविद्यालय व संगठक महाविद्यालयों के अनेक शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



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