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रामानुज आश्रम में दुर्दुरिया का आयोजन

   प्रतापगढ़। रामानुज आश्रम में आयोजिका परम श्री वैष्णव नारायणी रामानुज दासी द्वारा गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर बृहस्पतिवार के दिन पड़ने के कारण सुहागिन स्त्रियों ने गंगा जी एवं अवसान माता का विधिवत पूजन अर्चन किया। महिलाओं ने अवसान माता की कथा का श्रवण भी किया। महिलाओं ने आपस में ही  अवसान माता के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि अवसान मां सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती है ।आज यह संयोग है कि गंगा सप्तमी है इसी दिन माता गंगा का प्रादुर्भाव जान्हु ऋषि के  द्वारा पूर्वकाल में भगवान के चरणों का जल जो विष्णु पदी के रूप में ब्रह्मा जी के कमंडल में था उसे राजा भगीरथ की अथक तपस्या के द्वारा इस धरा को प्राप्त हुआ। चरणों का जल होने के कारण उनका नाम विष्णुपदी  पड़ा वहां से निकलती हुई ब्रह्मांड लोक से आगे बढ़ी और शंकर जी की जटाओं में समाई इसलिए आपका नाम जटाशंकरी तथा पुनः जटा से निकलकर के आगे बढ़ीं आपका नाम त्रिपथगामिनी हुआ। हिमालय की वादियों से निकलते हुए जब आप आ रही थी तो जान्हु ऋषि की कुटिया बहा ले गई  ऋषि ने आपका पान कर लिया अंत में भगीरथ की अनुनय विनय पर पुनः जान्हु ऋषि ने अपने जांघों को फाड़ कर के बाहर निकाला कुछ संतों का एंव शास्त्रों का कहना है कि जान्हु ने कान से आप को निकाला इसलिए आपका नाम जान्हवी पड़ा, आगे देवप्रयाग में आपका नाम गंगा पड़ा भागीरथ जी आप को लेकर ऋषिकेश हरिद्वार प्रयाग काशी होते हुए बंगाल की खाड़ी में सागर पर पहुंचे जहां कपिल मुनि के आश्रम में आपके पूर्वजों का उद्धार हुआ। इसलिए वहां पर आपका नाम गंगासागर पड़ा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से लक्ष्मी मिश्रा, रेखा शुक्ला,अनीता पांडे,प्रतिभा भगवन,डॉ अवंतिका पांडे,इंजीनियर पूजा पांडे, मीना सिंह, नीलम सिंह प्रबंधक, रुचि केसरवानी, प्रमिला शुक्ला,कुसुम गुप्ता पिंकी दयाल, चंद्रावती शुक्ला, इंद्रावती सिंह, प्रतिभा, अंजू सिंह विमला शुक्ला ज्ञान दुबे शोभा देवी त्रिपाठी अंजू सिंह, सीमा, सावित्री देवी, रेनू सिंह,रितु पांडे, सरिता शुक्ला, नीता सिंह,आरती त्रिपाठी,आशा ओझा, प्रतिभा मिश्रा,गायत्री शुक्ला, माधुरी सिंह सहित भारी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।

   प्रतापगढ़। रामानुज आश्रम में आयोजिका परम श्री वैष्णव नारायणी रामानुज दासी द्वारा गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर बृहस्पतिवार के दिन पड़ने के कारण सुहागिन स्त्रियों ने गंगा जी एवं अवसान माता का विधिवत पूजन अर्चन किया। महिलाओं ने अवसान माता की कथा का श्रवण भी किया। महिलाओं ने आपस में ही  अवसान माता के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि अवसान मां सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती है ।आज यह संयोग है कि गंगा सप्तमी है इसी दिन माता गंगा का प्रादुर्भाव जान्हु ऋषि के  द्वारा पूर्वकाल में भगवान के चरणों का जल जो विष्णु पदी के रूप में ब्रह्मा जी के कमंडल में था उसे राजा भगीरथ की अथक तपस्या के द्वारा इस धरा को प्राप्त हुआ। चरणों का जल होने के कारण उनका नाम विष्णुपदी  पड़ा वहां से निकलती हुई ब्रह्मांड लोक से आगे बढ़ी और शंकर जी की जटाओं में समाई इसलिए आपका नाम जटाशंकरी तथा पुनः जटा से निकलकर के आगे बढ़ीं आपका नाम त्रिपथगामिनी हुआ। हिमालय की वादियों से निकलते हुए जब आप आ रही थी तो जान्हु ऋषि की कुटिया बहा ले गई  ऋषि ने आपका पान कर लिया अंत में भगीरथ की अनुनय विनय पर पुनः जान्हु ऋषि ने अपने जांघों को फाड़ कर के बाहर निकाला कुछ संतों का एंव शास्त्रों का कहना है कि जान्हु ने कान से आप को निकाला इसलिए आपका नाम जान्हवी पड़ा, आगे देवप्रयाग में आपका नाम गंगा पड़ा भागीरथ जी आप को लेकर ऋषिकेश हरिद्वार प्रयाग काशी होते हुए बंगाल की खाड़ी में सागर पर पहुंचे जहां कपिल मुनि के आश्रम में आपके पूर्वजों का उद्धार हुआ। इसलिए वहां पर आपका नाम गंगासागर पड़ा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से लक्ष्मी मिश्रा, रेखा शुक्ला,अनीता पांडे,प्रतिभा भगवन,डॉ अवंतिका पांडे,इंजीनियर पूजा पांडे, मीना सिंह, नीलम सिंह प्रबंधक, रुचि केसरवानी, प्रमिला शुक्ला,कुसुम गुप्ता पिंकी दयाल, चंद्रावती शुक्ला, इंद्रावती सिंह, प्रतिभा, अंजू सिंह विमला शुक्ला ज्ञान दुबे शोभा देवी त्रिपाठी अंजू सिंह, सीमा, सावित्री देवी, रेनू सिंह,रितु पांडे, सरिता शुक्ला, नीता सिंह,आरती त्रिपाठी,आशा ओझा, प्रतिभा मिश्रा,गायत्री शुक्ला, माधुरी सिंह सहित भारी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।

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