लोकमित्र ब्यूरो
बहरिया (प्रयागराज)। श्रीमद् भागवत कथा का सातवें दिन सुदामा चरित्र के मार्मिक वर्णन से विकास खंड बहरिया के मदरा गांव निवासी भाव बिभोर हो उठे। जिसमें कथा व्यास पंडित संजय कुमार पाण्डेय ने अपने अमृतवाणी से संसार में मित्रता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भगवान श्री कृष्ण और सुदामा का बखा किया। उन्होने बताया कि भगवान श्री कृष्ण एक राजा होते हुए भी गरीब सुदामा के आने की खबर सुनते ही राजसिंहासन छोड़ कर भागते हुए राजमहल के मुख्य द्वार तक आये। मिलन होते ही श्री कृष्ण के नैनो से इस कदर नीर गिर रहा था मानो जैसे बरसात हो रही हो। उन्होने सुदामा के चरण को धोने के लिए जल मंगवाया, लेकिन देख सुदामा की दिन दशा करूना करिके करूना निधि रोये। आज मानव इतना स्वार्थी है कि बिना मतलब के किसी बात तक नही करता लेकिन प्रत्येक को भगवान से रिश्ता जरूर बनाना चाहिए। भगवान से बनाया गया रिश्ता ही मनुष्य को मोक्ष दिलाता है, सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सखा श्रीकृष्ण का चिंतन स्मरण नहीं छोड़ा। सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने आगे बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रीमद् भागवत कथा सुनकर लोग अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी लिए। कथा के समापन पर भगवान की विशेष आरती के पश्चात भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया। सोमवार को एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। इस मौके पर शिवकुमार मिश्र, सत्य नारायण मिश्र, विष्णु कुमार मिश्र, हरे कृष्ण, राममूर्ति मिश्रा, कृष्णकांत, रामचंद्र, प्रमोद कुमार, संजय मिश्र, पिंटू शुक्ला, बांकेलाल सोनी, प्रदीप कुमार मिश्र सहित महिलाएं व भक्तगण उपस्थित रहे।
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बहरिया (प्रयागराज)। श्रीमद् भागवत कथा का सातवें दिन सुदामा चरित्र के मार्मिक वर्णन से विकास खंड बहरिया के मदरा गांव निवासी भाव बिभोर हो उठे। जिसमें कथा व्यास पंडित संजय कुमार पाण्डेय ने अपने अमृतवाणी से संसार में मित्रता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भगवान श्री कृष्ण और सुदामा का बखा किया। उन्होने बताया कि भगवान श्री कृष्ण एक राजा होते हुए भी गरीब सुदामा के आने की खबर सुनते ही राजसिंहासन छोड़ कर भागते हुए राजमहल के मुख्य द्वार तक आये। मिलन होते ही श्री कृष्ण के नैनो से इस कदर नीर गिर रहा था मानो जैसे बरसात हो रही हो। उन्होने सुदामा के चरण को धोने के लिए जल मंगवाया, लेकिन देख सुदामा की दिन दशा करूना करिके करूना निधि रोये। आज मानव इतना स्वार्थी है कि बिना मतलब के किसी बात तक नही करता लेकिन प्रत्येक को भगवान से रिश्ता जरूर बनाना चाहिए। भगवान से बनाया गया रिश्ता ही मनुष्य को मोक्ष दिलाता है, सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सखा श्रीकृष्ण का चिंतन स्मरण नहीं छोड़ा। सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने आगे बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रीमद् भागवत कथा सुनकर लोग अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी लिए। कथा के समापन पर भगवान की विशेष आरती के पश्चात भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण किया। सोमवार को एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। इस मौके पर शिवकुमार मिश्र, सत्य नारायण मिश्र, विष्णु कुमार मिश्र, हरे कृष्ण, राममूर्ति मिश्रा, कृष्णकांत, रामचंद्र, प्रमोद कुमार, संजय मिश्र, पिंटू शुक्ला, बांकेलाल सोनी, प्रदीप कुमार मिश्र सहित महिलाएं व भक्तगण उपस्थित रहे।



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