सात साल के बेटे के शव को पैदल लेकर पोस्टमार्टम हॉउस पहुंचा पिता
सीएमस बोले नही मांगी हमसे मदद पुलिसकंर्मी ने की गडबड़ी
चित्रकूट । चित्रकूट में कई बार सूबे के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जिला अस्पताल और वहां स्व जुड़ी ब्यस्थाओ का जायजा लिया और अधीकारीयों को हिदायत भी दी। लेकिन विभाग का अधिकारी कहाँ मनाने वाले हैं। सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दुहाई तो बहुत दी जाती है पर अक्सर ऐसे मामले सामने आ जाते हैं कि इन दावों पर अपने आप सवालिया निशान लग जाते हैं। चित्रकूट दर्शन को आया एक पिता अपने मृत बच्चे के शव को हाथों में लेकर हांफते हुए पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा तो एक बार फिर आम आदमी की विवशता कराह उठी और बेहतरी के दावे थोथे साबित हो गए। उन्नाव जिले के निवासी अमृत लाल ने बताया कि वह परिवार व अन्य लोगों के साथ तीर्थयात्रियों की निजी बस से विंध्याचल दर्शन को गया था। वहां से लौटकर सभी चित्रकूट कामतानाथ के दर्शन के लिए जा रहे थे। रास्ते में हाईवे पर रैपुरा थानांतर्गत बांधी गांव के पास यात्रियों को शौचक्रिया के लिए बस रोकी गई। अमृत ने बताया कि शुभम (7) की दादी पास के तालाब से पानी लेने चली गई कि इसी दौरान तेजी से निकली एक बोलेरो ने सड़क किनारे खड़े शुभम को रौंद दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया कि इसके बाद 112 नंबर को फोन किया गया। इस पर 108 नंबर एंबुलेंस वहां पहुंची। अमृतलाल के अनुसार, एंबुलेंस रामनगर सीएचसी से शव को जिला अस्पताल तक लाई और वहां शव उतारकर आगे ले जाने से मना कर दिया। इस पर वे लोग शव को निजी बस में रखकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। निजी बस से पुरानी कोतवाली के पास चौराहे पर शव को उतारकर अमृतलाल लगभग सौ कदम की दूरी तक हाथों में लेकर हांफते हुए पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा तो लोग हतप्रभ रह गए। जिला अस्पताल और एंबुलेंस सुविधाओं के दावे एक बार फिर थोथे साबित हो गए।
रोड क्रॉस करते समय हुवा हादसा
थाना प्रभारी रैपुरा शैलेश चंद्र पांडेय ने बताया कि बांधी गांव के पास ये तीर्थयात्री शौच के लिए उतरे थे। बताया कि बच्चे की दादी ने उसे सड़क के उस पार तालाब के पास बुलाया तो बच्चा बस के आगे से होकर जाने लगा। इस दौरान मऊ से कर्वी की ओर जा रही एक चारपहिया गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस से घायल बच्चे को रामनगर पीएचसी भेजा था, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
इस संबंध में सीएमएस डा. सुधीर शर्मा ने बताया कि इमरजेंसी के अंदर कोई नहीं आया। हमने कैमरे में भी दिखवा लिया। उन्होंने कहा कि परिजनों को उनको जानकारी देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में शव वाहन मिलता है। ऐसे में पुलिसकर्मी की गलती है, जिसने जल्दी की वजह से शव वाहन के बारे में नहीं बताया।