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लोकमित्र प्रकाशन के 67 वर्ष हुए पूरे

प्रतापगढ़ । जनपद ही नहीं सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में अपनी पहचान बना चुके लोकमित्र समाचार पत्र के प्रकाशन के आज 67 वर्ष पूरे हो गए। जनपद प्रतापगढ़ से पत्रकारिता का अलख जगाने वाले स्मृति शेष पं. राम निरंजन भगवन ने लोकमित्र का प्रकाशन वर्ष 1956 ई. में प्रारम्भ किया था समाचार पत्र का पहला अंक 27 मार्च 1956 ई. को प्रकाशित हुआ। हमारे समाचार पत्र के संस्थापक जन जन की आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले पं. राम निरंजन भंगवन आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उन्होने जिस उद्देश्य एवं भावनाओ को लेकर समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया था उसी के अनुरूप लोकमित्र आज भी जाना व पहचाना जाता है। सबसे पहले लोकमित्र का प्रकाशन साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में किया गया। पं. राम निरंजन भगवन द्वारा दैनिक लोकमित्र के रूप में वर्ष 1971 में समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया। वर्ष 1975 में देश में लगे आपात काल का भी दंश समाचार पत्र को झेलना पड़ा, लेकिन भगवन जी निष्पक्षता और निर्भीकता से कभी समझौता नहीं किया। आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ा जिसके कारण दैनिक लोकमित्र के प्रकाशन में कुछ समय तक अवरोध उत्पन्न हुआ। पुनः वर्ष 1994 में दैनिक लोकमित्र समाचार पत्र के रूप में प्रकाशित किया जो अनवरत प्रकाशित हो रहा है। दैनिक लोकमित्र की लोकप्रियता, जनता में विश्वसनीयता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। शासन प्रशासन के समाचार सहित जन जन की समस्याओ, का प्रकाशन निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ अनवरत हो रहा है। समाचार पत्र प्रकाशन के आज 67 वर्ष व्यतीत हो गए। वर्तमान समय में दैनिक लोकमित्र के सम्पादक संतोष भगवन के साथ साथ लोकमित्र परिवार जनता की अपेक्षाओ के अनुरूप निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ समाचार पत्र के समाचारो की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। समाचार पत्र दिन प्रतिदिन प्रगति की ओर अग्रसर है। वर्ष 2001 से लखनऊ और वर्ष 2012 से कौशाम्बी संस्करण भी प्रकाशित किया जा रहा है। केन्द्र सरकार, प्रदेश सरकार, विद्युत विभाग, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे से मान्यता प्राप्त हिन्दी दैनिक समाचार पत्र है। अनेक संघर्ष का सामना करते हुए आज दैनिक लोकमित्र प्रदेश का महत्वपूर्ण समाचार पत्र के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसका पूर्ण श्रेय संस्थापक श्रद्धेय पं. राम निरंजन भगवन जी को है। उनके आशीर्वाद एवं प्रेरणा से समाचार पत्र लगातार प्रगति की ओर अग्रसर है।

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प्रतापगढ़ । जनपद ही नहीं सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में अपनी पहचान बना चुके लोकमित्र समाचार पत्र के प्रकाशन के आज 67 वर्ष पूरे हो गए। जनपद प्रतापगढ़ से पत्रकारिता का अलख जगाने वाले स्मृति शेष पं. राम निरंजन भगवन ने लोकमित्र का प्रकाशन वर्ष 1956 ई. में प्रारम्भ किया था समाचार पत्र का पहला अंक 27 मार्च 1956 ई. को प्रकाशित हुआ। हमारे समाचार पत्र के संस्थापक जन जन की आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले पं. राम निरंजन भंगवन आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उन्होने जिस उद्देश्य एवं भावनाओ को लेकर समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया था उसी के अनुरूप लोकमित्र आज भी जाना व पहचाना जाता है। सबसे पहले लोकमित्र का प्रकाशन साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में किया गया। पं. राम निरंजन भगवन द्वारा दैनिक लोकमित्र के रूप में वर्ष 1971 में समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया। वर्ष 1975 में देश में लगे आपात काल का भी दंश समाचार पत्र को झेलना पड़ा, लेकिन भगवन जी निष्पक्षता और निर्भीकता से कभी समझौता नहीं किया। आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ा जिसके कारण दैनिक लोकमित्र के प्रकाशन में कुछ समय तक अवरोध उत्पन्न हुआ। पुनः वर्ष 1994 में दैनिक लोकमित्र समाचार पत्र के रूप में प्रकाशित किया जो अनवरत प्रकाशित हो रहा है। दैनिक लोकमित्र की लोकप्रियता, जनता में विश्वसनीयता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। शासन प्रशासन के समाचार सहित जन जन की समस्याओ, का प्रकाशन निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ अनवरत हो रहा है। समाचार पत्र प्रकाशन के आज 67 वर्ष व्यतीत हो गए। वर्तमान समय में दैनिक लोकमित्र के सम्पादक संतोष भगवन के साथ साथ लोकमित्र परिवार जनता की अपेक्षाओ के अनुरूप निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ समाचार पत्र के समाचारो की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। समाचार पत्र दिन प्रतिदिन प्रगति की ओर अग्रसर है। वर्ष 2001 से लखनऊ और वर्ष 2012 से कौशाम्बी संस्करण भी प्रकाशित किया जा रहा है। केन्द्र सरकार, प्रदेश सरकार, विद्युत विभाग, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे से मान्यता प्राप्त हिन्दी दैनिक समाचार पत्र है। अनेक संघर्ष का सामना करते हुए आज दैनिक लोकमित्र प्रदेश का महत्वपूर्ण समाचार पत्र के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसका पूर्ण श्रेय संस्थापक श्रद्धेय पं. राम निरंजन भगवन जी को है। उनके आशीर्वाद एवं प्रेरणा से समाचार पत्र लगातार प्रगति की ओर अग्रसर है।

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