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संसदीय लोकतंत्र के प्रहरी थे मधु लिमएः हरिश्चंद्र द्विवेदी

प्रयागराज,। समाजवादी विचारक एव सांसद मधुलिमये समाजवादी वैचारिक क्रांति के नायक और संसदीय लोकतंत्र के प्रहरी थे।उक्त विचार उद्भव संस्थान के तत्वधान में समाजवादी चिंतन शिविर में ”समाजवादी चिंतक मधुलिमये के व्यक्तित्व और कृतित्व” पर चर्चा करते हुए कॉमरेड हरीशचन्द्र द्विवेदी ने व्यक्त करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि मधुलिमये जी 1977 में जनता पार्टी की सरकार में मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनाये लेकिन दोहरी सदस्यता के सवाल पर मुखर होकर विरोध किया जिससे सरकार गिर गयी। वह हमेशा संसद में समाजवादी सिद्धान्तों को लेकर संघर्ष करते रहे। समाजवादी चिंतक मधुलिमये व्यक्तित्व और कृतित्व पर विषय प्रवर्तन करते हुए शिविर के संयोजक अवधेश आनंद ने कहा कि आज मधुलिमये का जन्मशताब्दी वर्ष पूरे देश में मनाया जा रहा है। प्रो0 आनंद कुमार वैचारिकता को पूरे देश मे फैला दिए है वह प्रेरणा श्रोत बन गए है। वह पूना में पैदा हुए लेकिन विहार उनकी कर्म स्थली बनी। मुंगेर और बांका लोक सभा से चार बार चुने गए और समाजवादी आंदोलन को मजबूत किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव ने श्रधान्जली अर्पित करते हुए कहा कि शरद यादव सामाजिक न्याय को लेकर प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह से लड़कर मंडल आयोग की रिपोर्ट को 1990 में लागू करवा दिया। समाजवादी नेता संदीप यादव ने आज शरद जी को आज का कबीर बताते हुये बेवाक और बेदाग नेता बताया। अन्त में मधुलिमये के जन्मशताब्दी के अवसर पर सामाजिक न्याय के प्रहरी शरद यादव तथा कामरेड ज्योति बसु को श्रद्धांजलि अर्पित कर दो मिनट मौन व्रत रखा गया। चिंतन शिविर के सह संयोजक अनंत बहादुर सिंह तथा झूसी के पूर्व चेयरमैन रामलखन यादव ने स्वागत करते हुए समाजवादी विचारो पर चलने का संकल्प नौजवानों को दिया।
उक्त गोष्ठी में हरिचंद द्विवेदी, कृष्णमूर्ति यादव, अवधेश आनंद, रामलखन यादव, निर्भय सिंह पटेल, नगर महामंत्री रविन्द्र यादव, रामसेन यादव, छात्रनेता संदीप चौधरी, संतलाल वर्मा, कौशल पटेल, डी पी यादव, ट्रेड यूनियन नेता रेलबे राजेश यादव, योगेंद, सुशील श्रीवास्तव, ए के भारद्वाज, सक्तेश्वर श्रीमती पदमा यादव, राजकुमारी आदि ने विचार व्यक्त किया।

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प्रयागराज,। समाजवादी विचारक एव सांसद मधुलिमये समाजवादी वैचारिक क्रांति के नायक और संसदीय लोकतंत्र के प्रहरी थे।उक्त विचार उद्भव संस्थान के तत्वधान में समाजवादी चिंतन शिविर में ”समाजवादी चिंतक मधुलिमये के व्यक्तित्व और कृतित्व” पर चर्चा करते हुए कॉमरेड हरीशचन्द्र द्विवेदी ने व्यक्त करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि मधुलिमये जी 1977 में जनता पार्टी की सरकार में मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनाये लेकिन दोहरी सदस्यता के सवाल पर मुखर होकर विरोध किया जिससे सरकार गिर गयी। वह हमेशा संसद में समाजवादी सिद्धान्तों को लेकर संघर्ष करते रहे। समाजवादी चिंतक मधुलिमये व्यक्तित्व और कृतित्व पर विषय प्रवर्तन करते हुए शिविर के संयोजक अवधेश आनंद ने कहा कि आज मधुलिमये का जन्मशताब्दी वर्ष पूरे देश में मनाया जा रहा है। प्रो0 आनंद कुमार वैचारिकता को पूरे देश मे फैला दिए है वह प्रेरणा श्रोत बन गए है। वह पूना में पैदा हुए लेकिन विहार उनकी कर्म स्थली बनी। मुंगेर और बांका लोक सभा से चार बार चुने गए और समाजवादी आंदोलन को मजबूत किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव ने श्रधान्जली अर्पित करते हुए कहा कि शरद यादव सामाजिक न्याय को लेकर प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह से लड़कर मंडल आयोग की रिपोर्ट को 1990 में लागू करवा दिया। समाजवादी नेता संदीप यादव ने आज शरद जी को आज का कबीर बताते हुये बेवाक और बेदाग नेता बताया। अन्त में मधुलिमये के जन्मशताब्दी के अवसर पर सामाजिक न्याय के प्रहरी शरद यादव तथा कामरेड ज्योति बसु को श्रद्धांजलि अर्पित कर दो मिनट मौन व्रत रखा गया। चिंतन शिविर के सह संयोजक अनंत बहादुर सिंह तथा झूसी के पूर्व चेयरमैन रामलखन यादव ने स्वागत करते हुए समाजवादी विचारो पर चलने का संकल्प नौजवानों को दिया।
उक्त गोष्ठी में हरिचंद द्विवेदी, कृष्णमूर्ति यादव, अवधेश आनंद, रामलखन यादव, निर्भय सिंह पटेल, नगर महामंत्री रविन्द्र यादव, रामसेन यादव, छात्रनेता संदीप चौधरी, संतलाल वर्मा, कौशल पटेल, डी पी यादव, ट्रेड यूनियन नेता रेलबे राजेश यादव, योगेंद, सुशील श्रीवास्तव, ए के भारद्वाज, सक्तेश्वर श्रीमती पदमा यादव, राजकुमारी आदि ने विचार व्यक्त किया।

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