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भारतीय जीवन दर्शन को संजोने को होगी टोंस परिक्रमा यात्रा-योगेश शुक्ल

मां गंगा की तरह टोंस भी अपने आँचल में समेटे है सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत
ऐतिहासिक परिक्रमा यात्रा टोंस गंगा संगम तट के चौकी घाट से होगी शुरू
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। देश की संस्कृति और अध्यात्म की परंपरा को संजोने और राष्ट्र में एकात्मवाद के पोषक पं. दीनदयाल उपाध्याय की सनातन संस्कार की सोच को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता योगेश शुक्ल ने टोंस नदी की परिक्रमा यात्रा करेंगे। यह परिक्रमा टोंस गंगा संगम के चौकी तट से शुरू होगी और करछना के पनासा गांव मेंइसका समापन किया जाएगा।परिक्रमा में प्रतिदिन नदी तट पर भव्य आरती होगी। पड़ाव के गांव में टोंस महिमा और इसके ऐतिहासिक विरासत पर चर्चा होगी। यह जानकारी प्रेस प्रतिनिधियों से बातचीत में योगेश शुक्ल ने दी। योगेश शुक्ल ने परिक्रमा यात्रा भारतीय दर्शन को संजोने और तटीय लोगों के साथ आध्यात्मिक चेतना जगाने की कोशिश के लिए होगी। पत्रकार वार्ता में टोंस नदी के महत्व पर चर्चा की गयी है।बताया कि प्रयाग ब्रह्मा जी के प्रथम यज्ञ का भू-क्षेत्र, सोम, वरुण और प्रजापति की जन्म स्थली,  महर्षि भरद्वाज और वाल्मीकि की कर्मभूमि रही है।  प्रयाग में बहने वाली  टौंस नदी ,जो गंगा की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी जो यमुनापार क्षेत्र में सिरसा के पास चौकी और पनासा गांव के तटों पर गंगा से मिलती है। मध्य प्रदेश के कैमूर पर्वत से निकली यह नदी  जिस स्थान पर  प्रदेश की सीमा में प्रवेश करती है वह बेलन का संगम होता है।  बेलन नदी की घाटी में पुरा-पाषाण काल से पनपी सभ्यता को इतिहासकार विश्व प्रसिद्ध बेलन घाटी सभ्यता के रूप में परिभाषित करते हैं।  भाजपा नेता ने टोंस नदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “इत यमुना , उत नर्मदा, इत चम्बल, उत टोंस। छत्रसाल सो लरन की,  रही न काहूँ होस ॥”यह वही टोंस नदी है जो वीर क्षत्रशाल के साम्राज्य की पूर्वी सीमा को पहचान देती थी। इस टोंस नदी के तट पर रहने वाले लोग सनातनी परम्परा के पोषक और भारतीय संस्कृति एवं विरासत के वाहक भी हैं ।  हमारे जीवन दृष्टि में टोंस नदी बहते पानी का केवल एक मार्ग नहीं बल्कि एक जीवन्त इकाई है। विगत देवोत्थान एकादशी को टोंस परिक्रमा करने की प्रेरणा जगी थी।  इस यात्रा से हम क्षेत्र की कृषि, पर्यटन सहित सामाजिक एवं आर्थिक विकास की संभावनाओं का आकलन भी कर पाएंगे।  यह परिक्रमा यात्रा ११ दिसम्बर को प्रातः १० बजे गंगा टोंस संगम के पास के चौकी गांव से प्रारम्भ होकर टोंस के दक्षिणी तट के गांवों से होते हुये बेलन संगम तक जायेगी और फिर वहां से उत्तरी तट से होते हुये गंगा के पनासा घाट पर समाप्त होगी। इस यात्रा से मिलने वाले अनुभव को हम समाज, अपनी पार्टी और सरकार से साझा करेंगे। मेरी और मेरे साथी यात्रियों की यह परिक्रमा यात्रा सकुशल सम्पन्न हो, समाज के लिए उपयोगी सिद्ध। इसके लिए मुझे और मेरे साथी सह-यात्रियों को आप प्रयागवासियों के आशीर्वाद की आवश्यकता है। मौके पर पार्टी नेता जय शंकर पांडेय, व्यापार मंडल अध्यक्ष पप्पू उपाध्याय, सुभाष पयासी, वीरेंद्र मिश्र,प्रतिनिधि विनय शुक्ल, हरिमोहन पांडेय,रमाशंकर निषाद सहित कई लोग मौजूद रहे।

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मां गंगा की तरह टोंस भी अपने आँचल में समेटे है सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत
ऐतिहासिक परिक्रमा यात्रा टोंस गंगा संगम तट के चौकी घाट से होगी शुरू
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। देश की संस्कृति और अध्यात्म की परंपरा को संजोने और राष्ट्र में एकात्मवाद के पोषक पं. दीनदयाल उपाध्याय की सनातन संस्कार की सोच को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता योगेश शुक्ल ने टोंस नदी की परिक्रमा यात्रा करेंगे। यह परिक्रमा टोंस गंगा संगम के चौकी तट से शुरू होगी और करछना के पनासा गांव मेंइसका समापन किया जाएगा।परिक्रमा में प्रतिदिन नदी तट पर भव्य आरती होगी। पड़ाव के गांव में टोंस महिमा और इसके ऐतिहासिक विरासत पर चर्चा होगी। यह जानकारी प्रेस प्रतिनिधियों से बातचीत में योगेश शुक्ल ने दी। योगेश शुक्ल ने परिक्रमा यात्रा भारतीय दर्शन को संजोने और तटीय लोगों के साथ आध्यात्मिक चेतना जगाने की कोशिश के लिए होगी। पत्रकार वार्ता में टोंस नदी के महत्व पर चर्चा की गयी है।बताया कि प्रयाग ब्रह्मा जी के प्रथम यज्ञ का भू-क्षेत्र, सोम, वरुण और प्रजापति की जन्म स्थली,  महर्षि भरद्वाज और वाल्मीकि की कर्मभूमि रही है।  प्रयाग में बहने वाली  टौंस नदी ,जो गंगा की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी जो यमुनापार क्षेत्र में सिरसा के पास चौकी और पनासा गांव के तटों पर गंगा से मिलती है। मध्य प्रदेश के कैमूर पर्वत से निकली यह नदी  जिस स्थान पर  प्रदेश की सीमा में प्रवेश करती है वह बेलन का संगम होता है।  बेलन नदी की घाटी में पुरा-पाषाण काल से पनपी सभ्यता को इतिहासकार विश्व प्रसिद्ध बेलन घाटी सभ्यता के रूप में परिभाषित करते हैं।  भाजपा नेता ने टोंस नदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “इत यमुना , उत नर्मदा, इत चम्बल, उत टोंस। छत्रसाल सो लरन की,  रही न काहूँ होस ॥”यह वही टोंस नदी है जो वीर क्षत्रशाल के साम्राज्य की पूर्वी सीमा को पहचान देती थी। इस टोंस नदी के तट पर रहने वाले लोग सनातनी परम्परा के पोषक और भारतीय संस्कृति एवं विरासत के वाहक भी हैं ।  हमारे जीवन दृष्टि में टोंस नदी बहते पानी का केवल एक मार्ग नहीं बल्कि एक जीवन्त इकाई है। विगत देवोत्थान एकादशी को टोंस परिक्रमा करने की प्रेरणा जगी थी।  इस यात्रा से हम क्षेत्र की कृषि, पर्यटन सहित सामाजिक एवं आर्थिक विकास की संभावनाओं का आकलन भी कर पाएंगे।  यह परिक्रमा यात्रा ११ दिसम्बर को प्रातः १० बजे गंगा टोंस संगम के पास के चौकी गांव से प्रारम्भ होकर टोंस के दक्षिणी तट के गांवों से होते हुये बेलन संगम तक जायेगी और फिर वहां से उत्तरी तट से होते हुये गंगा के पनासा घाट पर समाप्त होगी। इस यात्रा से मिलने वाले अनुभव को हम समाज, अपनी पार्टी और सरकार से साझा करेंगे। मेरी और मेरे साथी यात्रियों की यह परिक्रमा यात्रा सकुशल सम्पन्न हो, समाज के लिए उपयोगी सिद्ध। इसके लिए मुझे और मेरे साथी सह-यात्रियों को आप प्रयागवासियों के आशीर्वाद की आवश्यकता है। मौके पर पार्टी नेता जय शंकर पांडेय, व्यापार मंडल अध्यक्ष पप्पू उपाध्याय, सुभाष पयासी, वीरेंद्र मिश्र,प्रतिनिधि विनय शुक्ल, हरिमोहन पांडेय,रमाशंकर निषाद सहित कई लोग मौजूद रहे।

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