प्रयागराज। मुंबई की सय्यदा तबस्सुम मंजूर नाडकर गुफ़्तगू की नई संरक्षक बन गई हैं। इनका जन्म 24 जनवरी 1967 को हुआ है। इनकी कई किताबें छप चुकी हैं, जिनके नाम गुलिस्ताने तबस्सुम (मजामीन का मजमुआ), मेहंदी लहू की (अफसानो का मजमुआ), दर्पण (मज़ामीन का मजमुआ), लम्हे जिं़दगी के (अफसानों का मजमुआ), अक्स ए मुजस्सिम (मज़ामीन का मजमुआ) और रूहे तबस्सुम (शायरी मजमुआ) हैं। इन्होंने कई पुस्तकों का संपादन भी किया है। ये पेशे से शिक्षिका हैं, विभिन्न संस्थाओं द्वारा इन्हें कई सम्मान से नवाजा जा चुका है।
श्रीमती तबस्सुम के अलावा प्रभाकर द्विवेदी प्रभामाल, अमर राग, मुनेश्वर मिश्र, हसनैन मुस्तफाबादी, ज़फ़र बख़्त, डॉ. पीयूष दीक्षित, आनंद सुमन सिंह, अरुण अर्णव खरे, रामचंद्र राजा, माहेश्वर तिवारी, पंकज के. सिंह, विजय प्रताप सिंह, डॉ. राकेश तूफ़ान, शैलेंद्र कपिल, संजय सक्सेना, मासूम रज़ा राशदी, सरिता श्रीवास्तव, डॉ. मधुबाला सिन्हा, जया मोहन, देवेंद्र प्रताप वर्मा ‘विनीत’, मंजुला शरण मनु, डॉ. उपासना दीक्षित, डॉ. शबाना रफ़ीक, रामशंकर वर्मा, सिद्धार्थ पांडेय, एस. निशा सिम्मी और नाज़नीन अली नाज़ भी गुफ़्तगू के संरक्षक हैं।



उत्तरप्रदेश








शेयर करें




































































