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गीता जंयती के शुभ अवसर पर छात्रों ने किया गीता का सस्वर पाठ

नैनी (प्रयागराज)। शनिवार को महर्षि विद्या मन्दिर नैनी में बड़े ही श्रद्धाभाव के साथ गीता जयंती मनायी गयी। इस पावन अवसर पर विद्यालय के छात्र एवं सभी शिक्षकगण सभागार में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभांरम्भ श्री गुरूपूजन से हुआ। तत्पश्चात्  “दीपोज्योतिर्परब्रह्म दीपोज्योतिर्जनार्दनः” के भाव से प्रधानाचार्या श्रीमती पूजा चन्दोला ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम में गति प्रदान किया। कार्यक्रम के प्रथम श्रंखला में विद्यालय के छात्र, छात्राओं एवं शिक्षक- शिक्षिकाओं ने सामूहिक प्राणायाम एवं भावतीत ध्यान किए। कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में श्रीमदभागवत गीता के विभिन्न अध्यायों का सस्वर पाठ छात्राओं ने किया। गीता का सस्वर पाठ सभी को मनमुग्ध कर दिया एवं चेतना को जागृत कर दिया। अलग-अलग समूहों में छात्रों ने गीता का सस्वर पाठ किया।  विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पूजा चन्दोला ने गीता जयंती के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत गीता सभी ग्रन्थों का सार है जो शाश्वत एवं सनातग है। गीता के अमृत रस का आत्मसात करना हमारा परम उद्देश्य होना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है। योग मे स्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया और प्रेरणाश्रोत होकर अर्जुन से कहा “योगस्थः कुरू कर्माणि योगस्थः कुरू कौशलम्” प्रधानाचार्य ने गीता के विभिन्न लाभों को बताया। परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने गीता के अमृतरस का पान करके पूरे विश्व को जनमानस की चेतना जागृत करने का संकल्पित कार्य किया।  कार्यक्रम के अन्त में प्रधानाचार्या ने गीता का सस्वर पाठ करने वाले छात्रों की सराहना करते हुए उत्साह वर्धन किया। सभी को धन्यवाद व्यक्त किया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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नैनी (प्रयागराज)। शनिवार को महर्षि विद्या मन्दिर नैनी में बड़े ही श्रद्धाभाव के साथ गीता जयंती मनायी गयी। इस पावन अवसर पर विद्यालय के छात्र एवं सभी शिक्षकगण सभागार में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभांरम्भ श्री गुरूपूजन से हुआ। तत्पश्चात्  “दीपोज्योतिर्परब्रह्म दीपोज्योतिर्जनार्दनः” के भाव से प्रधानाचार्या श्रीमती पूजा चन्दोला ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम में गति प्रदान किया। कार्यक्रम के प्रथम श्रंखला में विद्यालय के छात्र, छात्राओं एवं शिक्षक- शिक्षिकाओं ने सामूहिक प्राणायाम एवं भावतीत ध्यान किए। कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में श्रीमदभागवत गीता के विभिन्न अध्यायों का सस्वर पाठ छात्राओं ने किया। गीता का सस्वर पाठ सभी को मनमुग्ध कर दिया एवं चेतना को जागृत कर दिया। अलग-अलग समूहों में छात्रों ने गीता का सस्वर पाठ किया।  विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पूजा चन्दोला ने गीता जयंती के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत गीता सभी ग्रन्थों का सार है जो शाश्वत एवं सनातग है। गीता के अमृत रस का आत्मसात करना हमारा परम उद्देश्य होना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है। योग मे स्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया और प्रेरणाश्रोत होकर अर्जुन से कहा “योगस्थः कुरू कर्माणि योगस्थः कुरू कौशलम्” प्रधानाचार्य ने गीता के विभिन्न लाभों को बताया। परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने गीता के अमृतरस का पान करके पूरे विश्व को जनमानस की चेतना जागृत करने का संकल्पित कार्य किया।  कार्यक्रम के अन्त में प्रधानाचार्या ने गीता का सस्वर पाठ करने वाले छात्रों की सराहना करते हुए उत्साह वर्धन किया। सभी को धन्यवाद व्यक्त किया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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