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अपने भीतर का रावण मारो , अपना गांव – समाज संवारो ।

प्रतापगढ़ । अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच स्लेम की प्रतापगढ़ इकाई कार्यालय अचलपुर में अधर्म पर धर्म , पाप पर पुण्य , अन्याय पर न्याय , अज्ञानी पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजय दशमी ( दशहरा ) पर्व पर एक सरस काव्य संध्या संपन्न हुई ।जिसकी अध्यक्षता स्लेम जिला अध्यक्ष डॉ सुभाष श्रीवास्तव ने की । संचालन पं. आर के दुबे ने किया । आये हुए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कहा कि दशहरा पर्व बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक माना जाता है । आज आदमी के अंदर के अहंकार , ईर्ष्या , लोभ और कलुषता जैसे भावों को आदमी के मन से निकालने की जरूरत है । उन्हें जलाने की जरुरत है । ‌सुविख्यात कवि  आर वी शर्मा ने पढ़ा – उस समय एक ही रावण था , अब तो घर – घर ही रावण हैं ।  कविताकार चतुर ने कहा – दानव पे मानव विजय पाओ रे , दानव बचे ना जला डालो रे । संचालन कर रहे दुबे ने कहा- जिधर ही देखो जुल्मो सितम है , जुल्मों की अब बेइंतहा हो गई है । सनेही ने तालियां बटोरी – आपका  स्नेह कि मैं साथ चला आया , बेटा का जनम दिन यहां जान पाया । अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध कवि और लेखक डॉ.सुभाष श्रीवास्तव ने पढ़ा – अपने भीतर का रावण मारो , अपना  गांव- समाज संवारो । अन्य उपस्थित कवियों में डॉ.श्रीलाल , डॉ के के शर्मा , दिनेश ज्ञानी , प्रेमनारायन , दिलीप वर्मा और डॉ कल्पेश आदि ने अपनी मनमोहक रचनाओं से वातावरण में समां बांध दिया । मंत्र मुग्ध श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों का उत्साह बर्धन करते हुए कविताओं का रसास्वादन किया । आगंतुकों ने स्लेम अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव के सुपुत्र जयदीप श्रीवास्तव के जन्मदिन के शुभ अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दी ।  जयदीप ने सभी आगंतुकों को केक खिलाकर आशीर्वाद लिया । और सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा – हमारे देश में रावण का पुतला हर वर्ष जलाया जाता है । रावण मारा जाता है । राम की जय जयकार होती है ।   रावण तो मर गया । जल गया । किन्तु उसका असर जो मानव को दानव बना दिया है । और जो दानवी प्रवृत्ति निरंतर बढ़ रही है । अत्यंत सोच का विषय है । आज के दौर में उसे जलाने की जरुरत है । मारने की जरूरत है । आप सभी के प्रति मैं फिर फिर आभार प्रकट करता हूं । आज कविता और बरखा दोनों की बहार से आनंद रस दोगुना बढ़ गया ।

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प्रतापगढ़ । अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच स्लेम की प्रतापगढ़ इकाई कार्यालय अचलपुर में अधर्म पर धर्म , पाप पर पुण्य , अन्याय पर न्याय , अज्ञानी पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजय दशमी ( दशहरा ) पर्व पर एक सरस काव्य संध्या संपन्न हुई ।जिसकी अध्यक्षता स्लेम जिला अध्यक्ष डॉ सुभाष श्रीवास्तव ने की । संचालन पं. आर के दुबे ने किया । आये हुए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कहा कि दशहरा पर्व बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक माना जाता है । आज आदमी के अंदर के अहंकार , ईर्ष्या , लोभ और कलुषता जैसे भावों को आदमी के मन से निकालने की जरूरत है । उन्हें जलाने की जरुरत है । ‌सुविख्यात कवि  आर वी शर्मा ने पढ़ा – उस समय एक ही रावण था , अब तो घर – घर ही रावण हैं ।  कविताकार चतुर ने कहा – दानव पे मानव विजय पाओ रे , दानव बचे ना जला डालो रे । संचालन कर रहे दुबे ने कहा- जिधर ही देखो जुल्मो सितम है , जुल्मों की अब बेइंतहा हो गई है । सनेही ने तालियां बटोरी – आपका  स्नेह कि मैं साथ चला आया , बेटा का जनम दिन यहां जान पाया । अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध कवि और लेखक डॉ.सुभाष श्रीवास्तव ने पढ़ा – अपने भीतर का रावण मारो , अपना  गांव- समाज संवारो । अन्य उपस्थित कवियों में डॉ.श्रीलाल , डॉ के के शर्मा , दिनेश ज्ञानी , प्रेमनारायन , दिलीप वर्मा और डॉ कल्पेश आदि ने अपनी मनमोहक रचनाओं से वातावरण में समां बांध दिया । मंत्र मुग्ध श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों का उत्साह बर्धन करते हुए कविताओं का रसास्वादन किया । आगंतुकों ने स्लेम अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव के सुपुत्र जयदीप श्रीवास्तव के जन्मदिन के शुभ अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दी ।  जयदीप ने सभी आगंतुकों को केक खिलाकर आशीर्वाद लिया । और सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा – हमारे देश में रावण का पुतला हर वर्ष जलाया जाता है । रावण मारा जाता है । राम की जय जयकार होती है ।   रावण तो मर गया । जल गया । किन्तु उसका असर जो मानव को दानव बना दिया है । और जो दानवी प्रवृत्ति निरंतर बढ़ रही है । अत्यंत सोच का विषय है । आज के दौर में उसे जलाने की जरुरत है । मारने की जरूरत है । आप सभी के प्रति मैं फिर फिर आभार प्रकट करता हूं । आज कविता और बरखा दोनों की बहार से आनंद रस दोगुना बढ़ गया ।

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