प्रयागराज । इमामबाड़ा मिर्ज़ा नक़ी बेग मे बशीर हुसैन की सरपरस्ती मे चुप ताज़िया की अशरा ए मजालिस के अन्तिम दिन हज़रत इमाम हसन अस्करी की शहादत की पूर्व संध्या पर मौलाना सैय्यद रज़ी हैदर साहब की शहादत हसन अस्करी के ग़मगीन मसाएब के बाद इमामबाड़़े की सभी लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी व सुगंधित लोबान की धूनी मे गुलाब चमेली के फूलों से सजा ताबूत ज़ियारत को अक़ीदतमन्दों के दरमियान लाया गया तो हर शख्स बोसा लेने और ताबूत की ज़ियारत को बेताब नज़र आया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार ताबूत को लेकर नौजवान जब इमामबाड़़े मे दाखिल हुए तो हर तरफ से मातम और वा वैला की सदाएँ बुलन्द होने के साथ अन्जुमन हैदरीया के नौहाख्वानों हसन रिज़वी व अन्य सदस्यों के क़दीमी नौहे से माहौल अफसुर्दा हो गया। आयोजक असद हुसैन उर्फ बब्बू भाई, समर, हैदर, सैय्यद मोहम्मद अस्करी, हैदर रज़ा बेग, पार्षद अनीस अहमद, परवेज़ अख्तर अंसारी आदि शामिल रहे।
प्रयागराज । इमामबाड़ा मिर्ज़ा नक़ी बेग मे बशीर हुसैन की सरपरस्ती मे चुप ताज़िया की अशरा ए मजालिस के अन्तिम दिन हज़रत इमाम हसन अस्करी की शहादत की पूर्व संध्या पर मौलाना सैय्यद रज़ी हैदर साहब की शहादत हसन अस्करी के ग़मगीन मसाएब के बाद इमामबाड़़े की सभी लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी व सुगंधित लोबान की धूनी मे गुलाब चमेली के फूलों से सजा ताबूत ज़ियारत को अक़ीदतमन्दों के दरमियान लाया गया तो हर शख्स बोसा लेने और ताबूत की ज़ियारत को बेताब नज़र आया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार ताबूत को लेकर नौजवान जब इमामबाड़़े मे दाखिल हुए तो हर तरफ से मातम और वा वैला की सदाएँ बुलन्द होने के साथ अन्जुमन हैदरीया के नौहाख्वानों हसन रिज़वी व अन्य सदस्यों के क़दीमी नौहे से माहौल अफसुर्दा हो गया। आयोजक असद हुसैन उर्फ बब्बू भाई, समर, हैदर, सैय्यद मोहम्मद अस्करी, हैदर रज़ा बेग, पार्षद अनीस अहमद, परवेज़ अख्तर अंसारी आदि शामिल रहे।



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