अय्यामे अज़ा के बचे हुए चन्द दिनों मे शबाब पर है अज़ादारी का दौर-मस्जिदों मे ईद मिलादुन्नबी की सज रही महफिल
प्रयागराज। क़ैद ए शाम से असीराने करबला के लुटे हुए क़ाफले की याद मे माहे रबीउल अव्वल की एक से आठवीं रबीउल अव्वल तक लगातार मजलिसें शब्बेदारी व जुलूस ए अज़ा मे यादे हुसैन मनाया जा रहा है। ज़ाकिर शहादत ए इमाम हुसैन के बाद खानदाने रिसालत के असीरी की दास्ताँ बयान कर रहे हैं तो मातमी अन्जुमने असीराने करबला के साथ किस तरह बीबीयों, बीमारे नातवाँ हज़रत ज़ैनुल आबेदीन व जनाबे सकीना पर यज़ीदी सेना द्वारा ढ़ाए गए मज़ालिम की दास्ताँ को नौहों की शक्ल मे पढ़ कर लोगों को रोने पर मजबूर कर रहे हैं।
करैली मे समर अब्बास शमसी सेवईत की ओर से असीराने करबला की याद मे जुलूस ए अज़ा निकाला गया। काज़िम अब्बास ने सोज़ख्वानी तो डॉ नायाब बलयावी ने पेशख्वानी के फराएज़ अन्जाम दिए। मौलाना अम्मार ज़ैदी साहब क़िबला ने मजलिस को खेताब किया। अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने नौहों और मातम की सदाओं के साथ जुलूस निकाला जो करैली की गलियों मे गश्त करते हुए खत्म हुआ। जुलूस मे ताबूत व अलम भी निकाला गया। नौहाख्वानों ने नौहा पढ़ा।वहीं दरियाबाद रानीमण्डी करैलाबाग़ बख्शीबाज़ार आदि जगहों पर मजलिस मातम की सदाओं से माहौल ग़मज़दा व संजीदा बना रहा। जुलूस मे रिज़वान जव्वादी ,हैदर अली, सैय्यद मोहम्मद अस्करी, आसिफ रिज़वी ,समर अब्बास शम्सी, अख्तर अब्बास, मसूद अब्बास, अज़मी सेवईत, नजमुल हुसैन, ईशान आदि शामिल रहे।



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