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शिक्षा , स्कूल और खेल सभी में नयी शिक्षा नीति के साथ आ रहे बदलाव : डा०विनोद त्रिपाठी

बेलखरनाथ | विशिष्ट प्रतिभाओं के धनी, राष्ट्र निर्माता एवं पथप्रदर्शक समस्त शिक्षकों, शिक्षिकाओं, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनायें है! दार्शनिक विद्वान, भारत रत्न एवं  पूर्व राष्ट्रपति  डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी  के जन्मदिन पर आयोजित “शिक्षक दिवस” पर यह विचार उच्च प्राथमिक विद्यालय कांपा मधुपुर, बेलखरनाथ धाम में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष डा०विनोद त्रिपाठी ने ब्यक्त किया! जिलाध्यक्ष डा०विनोद ने बताया कि एक विद्वान द्वारा कहा गया है कि शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण दोनों उसकी गोदी में खेलते हैं।”  लेकिन इस कथन में सुधार करना चाहिए कि शिक्षक वह है जो सृजन करता है! शिष्यो को अज्ञात के अधेरे से निकालकर ज्ञात के ऊजाले की ओर ले जाता है! प्रभारी प्र०अ० राजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि गुरु उस सड़क की भांति है जो स्वयं तो वही रहता है लेकिन उसके संपर्क में आने वाले को उनकी मंजिल तक पहुँचा देता हैं । वरिष्ठ सहायक अध्यापक देवानन्द मिश्र ने कहा कि  पूरी पृथ्वी को कागज और सभी जंगलों की कलम बना ली जाए,साथ ही सातों समुद्र की स्याही बनाकर लिखने पर भी शिक्षक की महिमा का संपूर्ण गुण – गान नहीं किया जा सकता है। इस मौके पर छात्र छात्राओं ने अपने अपने शिक्षण कक्ष को पतंगी, गुब्बारे और झालर लगाकर सजाया! बच्चों ने केक काटे गये और कविता कहानियाँ सुनाई! साथ ही छात्रों ने अपने शिक्षकों की महिमा का सास्कृतिक तौर से बखान किया!  इस मौके पर मोहम्मद शुएब, श्रीमती नीतू सिंह, श्वेता मिश्रा, योगिता पाण्डेय, शशि बाला शुक्ला, सुरुचि सिंह, विनीता मिश्रा और संजीव दूबे आदि शामिल रहे!
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बेलखरनाथ | विशिष्ट प्रतिभाओं के धनी, राष्ट्र निर्माता एवं पथप्रदर्शक समस्त शिक्षकों, शिक्षिकाओं, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनायें है! दार्शनिक विद्वान, भारत रत्न एवं  पूर्व राष्ट्रपति  डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी  के जन्मदिन पर आयोजित “शिक्षक दिवस” पर यह विचार उच्च प्राथमिक विद्यालय कांपा मधुपुर, बेलखरनाथ धाम में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष डा०विनोद त्रिपाठी ने ब्यक्त किया! जिलाध्यक्ष डा०विनोद ने बताया कि एक विद्वान द्वारा कहा गया है कि शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण दोनों उसकी गोदी में खेलते हैं।”  लेकिन इस कथन में सुधार करना चाहिए कि शिक्षक वह है जो सृजन करता है! शिष्यो को अज्ञात के अधेरे से निकालकर ज्ञात के ऊजाले की ओर ले जाता है! प्रभारी प्र०अ० राजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि गुरु उस सड़क की भांति है जो स्वयं तो वही रहता है लेकिन उसके संपर्क में आने वाले को उनकी मंजिल तक पहुँचा देता हैं । वरिष्ठ सहायक अध्यापक देवानन्द मिश्र ने कहा कि  पूरी पृथ्वी को कागज और सभी जंगलों की कलम बना ली जाए,साथ ही सातों समुद्र की स्याही बनाकर लिखने पर भी शिक्षक की महिमा का संपूर्ण गुण – गान नहीं किया जा सकता है। इस मौके पर छात्र छात्राओं ने अपने अपने शिक्षण कक्ष को पतंगी, गुब्बारे और झालर लगाकर सजाया! बच्चों ने केक काटे गये और कविता कहानियाँ सुनाई! साथ ही छात्रों ने अपने शिक्षकों की महिमा का सास्कृतिक तौर से बखान किया!  इस मौके पर मोहम्मद शुएब, श्रीमती नीतू सिंह, श्वेता मिश्रा, योगिता पाण्डेय, शशि बाला शुक्ला, सुरुचि सिंह, विनीता मिश्रा और संजीव दूबे आदि शामिल रहे!
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