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उतरीं गंगा, बड़े हनुमानजी के दर्शन आरंभ

गंगा में आई बाढ़ से मंदिर में भर गया था पानी, 16 दिन बाद खुले कपाट
प्रयागराज। संगम किनारे स्थित लेटे हनुमानजी काे महास्नान और विश्राम कराने के बाद मां गंगा वापस लौट गई हैं। 16 दिन तक मंदिर के कपाट बंद रहने के बाद शनिवार को आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोल दिया गया। शाम को 4 बजे से आम श्रद्धालु हनुमानजी के दर्शन और पूजन करने लगे। इस बार मां गंगा ने हनुमानजी महाराज को नहलाने के लिए विशेष दिन चुना था। जन्माष्टमी के दिन 18 अगस्त की रात 11:45 बजे मां गंगा मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचीं और वैदक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा ने अपने पुत्र हनुमानजी को नहलाया था। श्री मठ बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर महंत बलवीर पुरी ने बताया कि इस बार गंगा मइया ने हनुमान जी को केवल 16 दिन का विश्राम दिया। 16 दिन पहले 18 अगस्त की आधी रात मां ने हनुमानजी को नहलाया था। तब से मंदिर के कपाट बंद थे। अब जबकि पानी निकल गया है शुक्रवार को मंदिर परिसर की साफ-सफाई और धुलाई की गई है। वैसे तो मां गंगा खुद पतित पावनी हैं। उनके आने के बाद किसी शुद्दीकरण की जरूरत नहीं होती पर फिर भी मंदिर की साफ-सफाई के दौरान लोगों के पैरों से जो धूल कण आए हैं उसके कारण मंदिर का एक बार शुद्दीकरण विशेष विधि से किया गया। हनुमान जी महाराज का विशेष स्नान हुआ। पंचामृत से उनका विशेष अभिषेक और पूजन कराने के बाद उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद शनिवार की शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। विश्व में लेटी हुए हनुमान जी का प्रयाग में है इकलौता मंदिर
संगम से 800 मीटर दूर बंधवा स्थित हनुमान जी का मंदिर विश्व में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी लेटे हैं। ऐसी मान्यता है कि जब हनुमानजी लंका विजय के बाद अयाेध्या लौटे तो बहुत थके थे। मां सीता ने उन्हें इस निर्जन और पावन स्थान पर विश्राम के लिए भेजा था।

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गंगा में आई बाढ़ से मंदिर में भर गया था पानी, 16 दिन बाद खुले कपाट
प्रयागराज। संगम किनारे स्थित लेटे हनुमानजी काे महास्नान और विश्राम कराने के बाद मां गंगा वापस लौट गई हैं। 16 दिन तक मंदिर के कपाट बंद रहने के बाद शनिवार को आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोल दिया गया। शाम को 4 बजे से आम श्रद्धालु हनुमानजी के दर्शन और पूजन करने लगे। इस बार मां गंगा ने हनुमानजी महाराज को नहलाने के लिए विशेष दिन चुना था। जन्माष्टमी के दिन 18 अगस्त की रात 11:45 बजे मां गंगा मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचीं और वैदक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा ने अपने पुत्र हनुमानजी को नहलाया था। श्री मठ बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर महंत बलवीर पुरी ने बताया कि इस बार गंगा मइया ने हनुमान जी को केवल 16 दिन का विश्राम दिया। 16 दिन पहले 18 अगस्त की आधी रात मां ने हनुमानजी को नहलाया था। तब से मंदिर के कपाट बंद थे। अब जबकि पानी निकल गया है शुक्रवार को मंदिर परिसर की साफ-सफाई और धुलाई की गई है। वैसे तो मां गंगा खुद पतित पावनी हैं। उनके आने के बाद किसी शुद्दीकरण की जरूरत नहीं होती पर फिर भी मंदिर की साफ-सफाई के दौरान लोगों के पैरों से जो धूल कण आए हैं उसके कारण मंदिर का एक बार शुद्दीकरण विशेष विधि से किया गया। हनुमान जी महाराज का विशेष स्नान हुआ। पंचामृत से उनका विशेष अभिषेक और पूजन कराने के बाद उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद शनिवार की शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। विश्व में लेटी हुए हनुमान जी का प्रयाग में है इकलौता मंदिर
संगम से 800 मीटर दूर बंधवा स्थित हनुमान जी का मंदिर विश्व में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी लेटे हैं। ऐसी मान्यता है कि जब हनुमानजी लंका विजय के बाद अयाेध्या लौटे तो बहुत थके थे। मां सीता ने उन्हें इस निर्जन और पावन स्थान पर विश्राम के लिए भेजा था।

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