लोकमित्र ब्यूरो
झूंसी (प्रयागराज)। गंगा नदी के खतरे का निशान पार करते ही रिहायशी बस्तियों जल जमांव हो गया है। झूंसी क्षेत्रों की निचले इलाकों के कई बस्तियों में पानी भर गया है। बाढ़ का पानी बढ़ने से झूंसी में खतरा और गहरा गया है। गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से मरे हुए जानवरों के कारण झूँसी इलाके में उठ रही दुर्गंध ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। नई झूंसी में गंगा के किनारे स्थित श्री कैलास धाम आश्रम के सामने पानी के साथ गंदगी आ रही है। मरे जानवरों से सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। बदबू से जीना दूभर हो गया है। आश्रम के महंत स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज ने बताया कि बाढ़ में मरे जानवरों को सड़ जाने के कारण बदबूं आ रही है। जिससे बीमारियों के बढ़ने का डर है। मरे जानवरों से दुर्गंध आने के कारण काफी समस्या है। यहां दवाइयों का छिड़काव करना व मरे जानवरों को पानी से निकालकर कहीं जमीन में दफनाना बेहद जरूरी हो गया है, नहीं तो बीमारियां बढ़ जाएंगी। हालांकि अभी तक न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम व नगर निगम की टीम से कोई मदद नहीं मिल पाई है। वहीं आश्रम में सुदर्शन महाराज ने बताया कि झूंसी थाने की फोर्स ने मरे जानवरों को बोट के माध्यम से दूर कर दिया गया है।
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झूंसी (प्रयागराज)। गंगा नदी के खतरे का निशान पार करते ही रिहायशी बस्तियों जल जमांव हो गया है। झूंसी क्षेत्रों की निचले इलाकों के कई बस्तियों में पानी भर गया है। बाढ़ का पानी बढ़ने से झूंसी में खतरा और गहरा गया है। गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से मरे हुए जानवरों के कारण झूँसी इलाके में उठ रही दुर्गंध ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। नई झूंसी में गंगा के किनारे स्थित श्री कैलास धाम आश्रम के सामने पानी के साथ गंदगी आ रही है। मरे जानवरों से सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। बदबू से जीना दूभर हो गया है। आश्रम के महंत स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज ने बताया कि बाढ़ में मरे जानवरों को सड़ जाने के कारण बदबूं आ रही है। जिससे बीमारियों के बढ़ने का डर है। मरे जानवरों से दुर्गंध आने के कारण काफी समस्या है। यहां दवाइयों का छिड़काव करना व मरे जानवरों को पानी से निकालकर कहीं जमीन में दफनाना बेहद जरूरी हो गया है, नहीं तो बीमारियां बढ़ जाएंगी। हालांकि अभी तक न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम व नगर निगम की टीम से कोई मदद नहीं मिल पाई है। वहीं आश्रम में सुदर्शन महाराज ने बताया कि झूंसी थाने की फोर्स ने मरे जानवरों को बोट के माध्यम से दूर कर दिया गया है।



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