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अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रान्त द्वारा संगोष्ठी का हुआ आयोजन

अफीम कोठी में संगोष्ठी का हुआ आयोजन, समसामयिक विषयों पर हुई चर्चा
प्रतापगढ़ | अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रान्त प्रतापगढ़ के तत्वावधान में जुलाई माह की संगोष्ठी अफीम कोठी प्रतापगढ़ मे जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार द्विवेदी ( लन्ठ ) प्रतापगढ़ी के संयोजन में संपन्न हुई । कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद प्रतापगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश ( संभव ) एवं संचालन गंगाराम पाण्डेय ( भावुक ) ने किया । कार्यक्रम की शुरुआत बतौर मुख्य अतिथि प्रान्तीय अध्यक्ष काशी प्रान्त दीनानाथ द्विवेदी ( रंग ) एवं कार्यक्रम अध्यक्ष ( संभव ) द्वारा मां वीणापाणि के चित्र पर पुष्पार्पण और जनपद प्रतापगढ़ के मशहूर गीतकार शीतला प्रसाद ( सुजान ) की वाणी वंदना से हुई |तत्पश्चात नवोदित कलमकार उत्कर्ष राजन श्रीवास्तव ने पंक्तियाँ कुछ यूँ पढी ‘सावन के महीने में भी मकान जलते हैं । जब कहीं दिल के अरमान जलते हैं ।  लालगंज अझारा से पधारे विजय नाथ उमर वैश्य ने पढ़ा गोरों से धोखा बहुत खाया, अब केवल सगा बाकी है । अब तू भी कर ले, जो करने के लिये दगा बाकी है ।वरिष्ठ कवि शेष नारायण दुबे ( राही ) ने पढ़ा सावन में झूला बहुत नीक लागै । रिमझिम बदरा की झरि नीक लागै ।अनेकों विधाओं के सिद्धहस्त कलमकार सुरेश नारायण द्विवेदी ( व्योम ) ने पढ़ा जब भी लिखेंगे देश का सम्मान लिखेंगे । राणा प्रताप देश की पहचान लिखेंगे ।जनपद के यशस्तिलक गीत एवं छंदों के महारथी सुनील कुमार पाण्डेय ( प्रभाकर ) ने गीत एवं छंदों के माध्यम से भाव विह्वल कर दिया । संचालन कर रहे भावुक ने पढ़ा सारे शहर में कहर ही कहर है । ये शहर है ये कैसा शहर है । मुख्य अतिथि दीनानाथ द्विवेदी ( रंग ) के छंदों ने शमां बांधते हुए सम्पूर्ण कार्यक्रम को बुलंदी प्रदान की । अध्यक्षता कर रहे आदरणीय संभव ने अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ के दौरान पढ़ा मैं महाशक्ति का साधक आराधक सत्ता का। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से फिल्म अभिनेता अवधीवुड रत्नेश द्विवेदी की उपस्थिति सराहनीय रही ।  कार्यक्रम के अंत में संयोजक प्रमोद कुमार द्विवेदी ( लंठ ) ने उपस्थित समस्त कवियों एवं श्रोताओं के प्रति अपना आभार व्यक्त किया ।

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अफीम कोठी में संगोष्ठी का हुआ आयोजन, समसामयिक विषयों पर हुई चर्चा
प्रतापगढ़ | अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रान्त प्रतापगढ़ के तत्वावधान में जुलाई माह की संगोष्ठी अफीम कोठी प्रतापगढ़ मे जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार द्विवेदी ( लन्ठ ) प्रतापगढ़ी के संयोजन में संपन्न हुई । कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद प्रतापगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश ( संभव ) एवं संचालन गंगाराम पाण्डेय ( भावुक ) ने किया । कार्यक्रम की शुरुआत बतौर मुख्य अतिथि प्रान्तीय अध्यक्ष काशी प्रान्त दीनानाथ द्विवेदी ( रंग ) एवं कार्यक्रम अध्यक्ष ( संभव ) द्वारा मां वीणापाणि के चित्र पर पुष्पार्पण और जनपद प्रतापगढ़ के मशहूर गीतकार शीतला प्रसाद ( सुजान ) की वाणी वंदना से हुई |तत्पश्चात नवोदित कलमकार उत्कर्ष राजन श्रीवास्तव ने पंक्तियाँ कुछ यूँ पढी ‘सावन के महीने में भी मकान जलते हैं । जब कहीं दिल के अरमान जलते हैं ।  लालगंज अझारा से पधारे विजय नाथ उमर वैश्य ने पढ़ा गोरों से धोखा बहुत खाया, अब केवल सगा बाकी है । अब तू भी कर ले, जो करने के लिये दगा बाकी है ।वरिष्ठ कवि शेष नारायण दुबे ( राही ) ने पढ़ा सावन में झूला बहुत नीक लागै । रिमझिम बदरा की झरि नीक लागै ।अनेकों विधाओं के सिद्धहस्त कलमकार सुरेश नारायण द्विवेदी ( व्योम ) ने पढ़ा जब भी लिखेंगे देश का सम्मान लिखेंगे । राणा प्रताप देश की पहचान लिखेंगे ।जनपद के यशस्तिलक गीत एवं छंदों के महारथी सुनील कुमार पाण्डेय ( प्रभाकर ) ने गीत एवं छंदों के माध्यम से भाव विह्वल कर दिया । संचालन कर रहे भावुक ने पढ़ा सारे शहर में कहर ही कहर है । ये शहर है ये कैसा शहर है । मुख्य अतिथि दीनानाथ द्विवेदी ( रंग ) के छंदों ने शमां बांधते हुए सम्पूर्ण कार्यक्रम को बुलंदी प्रदान की । अध्यक्षता कर रहे आदरणीय संभव ने अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ के दौरान पढ़ा मैं महाशक्ति का साधक आराधक सत्ता का। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से फिल्म अभिनेता अवधीवुड रत्नेश द्विवेदी की उपस्थिति सराहनीय रही ।  कार्यक्रम के अंत में संयोजक प्रमोद कुमार द्विवेदी ( लंठ ) ने उपस्थित समस्त कवियों एवं श्रोताओं के प्रति अपना आभार व्यक्त किया ।

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