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सिस्टम की मनमानी से पंचायत विकास कार्य थमा

मनरेगा मजदूरों के सामने रोजगार और रोटी का संकट चकमार्गों की पैमाइश न होने से स्थिति बिगड़ी
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। क्षेत्र के धरमपुर ग्राम पंचायत की प्रधान रेखा मिश्रा द्वारा मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर चिन्ता जताई है कि चकमार्गों की पैमाइश नहीं होने से विकास कार्य ठप पड़ा है और कार्य अभाव में मनरेगा श्रमिकों के समक्ष रोटी व रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उपजिलाधिकारी द्वारा कई बार आदेश के बावजूद चक मार्गों को कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका है।  प्रधान की मानें तो धरमपुर-चपौर गाँव में लगभग पचास फीसदी चकमार्गों पर स्थानीय काश्तकारों का कब्जा है। इस गम्भीर मसले पर प्रधान द्वारा जनपद के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।  उपजिलाधिकारी मेजा द्वारा पैमाइस के लिए कई बार आदेश किया गया है, लेकिन सम्बन्धित राजस्व कर्मियों द्वारा अनुपालन नहीं होने से समस्या बनी हुई है।प्रदेश के योगीराज में कब्जेदारों के प्रति नरमी समझ के परे है। प्रधान द्वारा कमिश्नर और डीएम को प्रेषित शिकायती पत्रों में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज धरमपुर-चपौर में अतिक्रमित चकमार्गों का पूरा ब्यौरा दिया है। प्रधान रेखा देवी ने बताया कि उक्त चकमार्गों में से अधिकांश की मौके पर शिनाख्त करना भी मुश्किल है क्योंकि उन्हें काश्तकारों द्वारा जोत लिया गया है। प्रधान ने बताया कि ग्राम पंचायत धरमपुर में चपौर और धरमपुर दो राजस्व गांव हैं। इन गांवों में लगभग पचास फीसदी चकमार्ग अतिक्रमण के दायरे में हैं। प्रदेश सरकार की नीति एवं मंशानुरूप चकमार्गों को तत्काल कब्जा मुक्त कराया जाय, ताकि उन चकमार्गों पर जनता के लिये आवागमन की सुविधा हेतु कच्चे रास्ते का निर्माण कराया जा सके और मनरेगा श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराया जा सके।

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मनरेगा मजदूरों के सामने रोजगार और रोटी का संकट चकमार्गों की पैमाइश न होने से स्थिति बिगड़ी
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। क्षेत्र के धरमपुर ग्राम पंचायत की प्रधान रेखा मिश्रा द्वारा मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर चिन्ता जताई है कि चकमार्गों की पैमाइश नहीं होने से विकास कार्य ठप पड़ा है और कार्य अभाव में मनरेगा श्रमिकों के समक्ष रोटी व रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उपजिलाधिकारी द्वारा कई बार आदेश के बावजूद चक मार्गों को कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका है।  प्रधान की मानें तो धरमपुर-चपौर गाँव में लगभग पचास फीसदी चकमार्गों पर स्थानीय काश्तकारों का कब्जा है। इस गम्भीर मसले पर प्रधान द्वारा जनपद के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।  उपजिलाधिकारी मेजा द्वारा पैमाइस के लिए कई बार आदेश किया गया है, लेकिन सम्बन्धित राजस्व कर्मियों द्वारा अनुपालन नहीं होने से समस्या बनी हुई है।प्रदेश के योगीराज में कब्जेदारों के प्रति नरमी समझ के परे है। प्रधान द्वारा कमिश्नर और डीएम को प्रेषित शिकायती पत्रों में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज धरमपुर-चपौर में अतिक्रमित चकमार्गों का पूरा ब्यौरा दिया है। प्रधान रेखा देवी ने बताया कि उक्त चकमार्गों में से अधिकांश की मौके पर शिनाख्त करना भी मुश्किल है क्योंकि उन्हें काश्तकारों द्वारा जोत लिया गया है। प्रधान ने बताया कि ग्राम पंचायत धरमपुर में चपौर और धरमपुर दो राजस्व गांव हैं। इन गांवों में लगभग पचास फीसदी चकमार्ग अतिक्रमण के दायरे में हैं। प्रदेश सरकार की नीति एवं मंशानुरूप चकमार्गों को तत्काल कब्जा मुक्त कराया जाय, ताकि उन चकमार्गों पर जनता के लिये आवागमन की सुविधा हेतु कच्चे रास्ते का निर्माण कराया जा सके और मनरेगा श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराया जा सके।

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