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सीएचसी में हो रही लगातार मौत, आक्रोश

परिजनों ने मौत के लिए डॉक्टरों को ठहराया जिम्मेदार
डॉक्टर ने कहा, गम्भीर हालत में कराया गया दाखिला
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। सीएचसी मांडा में एक सप्ताह के अंदर दो की मौत पर सवाल उठ रहे हैं । सीएचसी की व्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही पर क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है। तीमारदारों ने मौत के लिए स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों को जिम्मेदार बताया है लेकिन महकमे के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। बता दें की मांडा सीएचसी में बीते 25 जुलाई को जिगना के बघौरा की रहने वाली सीमा गुप्ता को इलाज के लिए सीएचसी मांडा में भर्ती कराया गया था।तीमरदारों का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा महिला को इंजेक्शन लगाए जाने के चार घण्टे बाद महिला की मौत हो गई। इससे आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। पुलिस ने समझा बुझाकर किसी तरह शव परिजनों को सौंप मामला शांत कराया था। इसी केंद्र से जुड़ा दूसरा मामला बीते 30 जुलाई का है। भारतगंज कस्बे की गर्भवती महिला को पेट मे दर्द होने पर इलाज हेतु यहां दाखिल कराया गया था। डॉक्टरों ने डिलीवरी  करा दी, लेकिन प्रसूता की जान नहीं बच पाई। कुछ ही देर बाद अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने एक बार फिर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। मृतिका के पति अजहर ने बताया कि डॉक्टर समय रहते सही स्थिति बता देते तो शायद उसकी जान को बचाया जा सकता था।  मामले में सीएचसी मांडा के डॉक्टर अंसारी ने सफाई दी कि दोनों महिलाओं की मौत सीएचसी के डॉक्टरों की लापरवाही से नहीं हुई है। सीएचसी लाने से पहले महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया गया था।वेहद गम्भीर हालत में उनको सीएचसी लाया गया था। उन्हें बचाने की हर सम्भव कोशिश की गई थी।

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परिजनों ने मौत के लिए डॉक्टरों को ठहराया जिम्मेदार
डॉक्टर ने कहा, गम्भीर हालत में कराया गया दाखिला
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। सीएचसी मांडा में एक सप्ताह के अंदर दो की मौत पर सवाल उठ रहे हैं । सीएचसी की व्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही पर क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है। तीमारदारों ने मौत के लिए स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों को जिम्मेदार बताया है लेकिन महकमे के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। बता दें की मांडा सीएचसी में बीते 25 जुलाई को जिगना के बघौरा की रहने वाली सीमा गुप्ता को इलाज के लिए सीएचसी मांडा में भर्ती कराया गया था।तीमरदारों का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा महिला को इंजेक्शन लगाए जाने के चार घण्टे बाद महिला की मौत हो गई। इससे आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। पुलिस ने समझा बुझाकर किसी तरह शव परिजनों को सौंप मामला शांत कराया था। इसी केंद्र से जुड़ा दूसरा मामला बीते 30 जुलाई का है। भारतगंज कस्बे की गर्भवती महिला को पेट मे दर्द होने पर इलाज हेतु यहां दाखिल कराया गया था। डॉक्टरों ने डिलीवरी  करा दी, लेकिन प्रसूता की जान नहीं बच पाई। कुछ ही देर बाद अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने एक बार फिर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। मृतिका के पति अजहर ने बताया कि डॉक्टर समय रहते सही स्थिति बता देते तो शायद उसकी जान को बचाया जा सकता था।  मामले में सीएचसी मांडा के डॉक्टर अंसारी ने सफाई दी कि दोनों महिलाओं की मौत सीएचसी के डॉक्टरों की लापरवाही से नहीं हुई है। सीएचसी लाने से पहले महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया गया था।वेहद गम्भीर हालत में उनको सीएचसी लाया गया था। उन्हें बचाने की हर सम्भव कोशिश की गई थी।

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