न्यायालय के आदेश के बाद भी अतिक्रमण और कब्जा अभियान जारी
भइयाँ में प्रधान की ओर से चल रहे गोरखधंधे पर ग्रामीणों ने उठायी आवाज
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। सरकार की कुछ विकास योजनाएं कमाई का जरिया बन चुकी हैं। तालाबों के अस्तित्व बचाने के नाम पर बार बार एक ही तालाब की खुदाई के लिए विभिन्न मदों से फण्ड रिलीज किए गए हैं, लेकिन स्थिति यथावत बनी हुई है। सर्वोच्च न्यायालय के सख्त आदेश के बावजूद तालाबों पर अतिक्रमण व कब्जा मुहिम जारी है। सर्वोच्च न्यायालय ने गिरते जल स्तर की सोचनीय स्थिति से आगाह करते हुए जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और तालाबों को कब्जा मुक्त कर उनके अस्तित्व को बरकरार रखने के सख्त आदेश दिए हैं। न्यायालय के आदेश तालाबों को अस्तित्व में न्यायालय के आदेश कितने कारगर साबित हुए हैं यह हकीकत सबके सामने है लेकिन इसकी आड़ में तालाब खुदाई का कार्य एक कमाऊ धंधे के रूप में फलफूल रहा है।पँचायत के प्रधान और विभिन्न विकास से जुड़ी एजेंसियों ने तालाब की खुदाई के नाम पर बार बार भुगतान किए हैं लेकिन तालाबों की हालत पहले जैसी बनी हुई है। इस गोरखधंधे की जांच सरकार और सिस्टम को चौंकाने वाली होगी। पंचायत से जुड़ी मनरेगा योजना को तालाब की खुदाई के नाम पर जमकर लूटा गया है। विभिन्न पंचायत से जुड़े जागरूक लोगों ने इस योजना की शिकायत जरूर की लेकिन इसकी कभी समुचित जांच नही की गई। इस मद में ग्राम पंचायत, जिला पंचायत के साथ प्रदेश सरकार की अन्य योजनाओं के माध्यम से फण्ड रिलीज किए गए हैं लेकिन बरसात के साथ लूट खसोट के सारे साक्ष्य पानी के साथ धुल जाते हैं। भइयाँ गांव के मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दिए गए तालाब की खुदाई बीते मार्च में पट्टाधारक ने जेसीबी से कराई है।आरोप है कि इसी तालाब की खुदाई के नाम पर प्रधान द्वारा भी मनरेगा योजना से धन निकाला जा रहा है। यह एक नजीर है, जांच में कई प्रधान कटघरे में आ जाएंगे। विडंबना है कि सिस्टम इस खेल में मूकदर्शक बना रहता है।



उत्तरप्रदेश








शेयर करें




































































