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गंगा में समा जाएगा 38 लाख का अंत्येष्टि स्थल

कौशाम्बी। कड़ा के हनुमान घाट पर 38 लाख की लागत से बनवाया गया अंत्येष्टि स्थल कभी भी गंगा की लहरों में समा सकता है। इसकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शौचालय में दरवाजे के साथ पानी की टंकी भी नहीं है। हैरानी की बात है कि शिकायत के बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। हनुमान घाट में दो महीने पहले अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया था। यह स्थल पूर्वाचल विकास निधि से बना है। इसकी लागत 37 लाख 93 हजार रुपये है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने मानक की अनदेखी की। परिणाम है कि दो महीने के भीतर ही अंत्येष्टि स्थल की दीवारें दरकने लगी हैं। टीन शेड से बारिश का पानी टपकता है। दस बाई 30 के बैठका की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसकी छत क्रेक हो गई है। दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ने लगा है। शौचालय में दरवाजा ही नहीं है। पानी की टंकी भी नहीं रखवाई गई है। जिससे अंतिम संस्कार में आए लोग घाट पर ही गंदगी फैलाते हैं। इसकी शिकायत कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से की गई है लेकिन, किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि निर्माण में 38 लाख खर्च ही नहीं हुए हैं। सभी ने अपनी जेब भरी है। इसीलिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। अंत्येष्टि स्थल गंगा के बिल्कुल किनारे बनाया गया है। जलस्तर बढ़ने के साथ अब मिट्टी की कटान शुरू हो गई है। यही हाल रहा तो कभी भी कटान से अंत्येष्टि स्थल ढहकर गंगा में समा जाएगा। जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने जांच कराकर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।

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कौशाम्बी। कड़ा के हनुमान घाट पर 38 लाख की लागत से बनवाया गया अंत्येष्टि स्थल कभी भी गंगा की लहरों में समा सकता है। इसकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शौचालय में दरवाजे के साथ पानी की टंकी भी नहीं है। हैरानी की बात है कि शिकायत के बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। हनुमान घाट में दो महीने पहले अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया था। यह स्थल पूर्वाचल विकास निधि से बना है। इसकी लागत 37 लाख 93 हजार रुपये है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने मानक की अनदेखी की। परिणाम है कि दो महीने के भीतर ही अंत्येष्टि स्थल की दीवारें दरकने लगी हैं। टीन शेड से बारिश का पानी टपकता है। दस बाई 30 के बैठका की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसकी छत क्रेक हो गई है। दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ने लगा है। शौचालय में दरवाजा ही नहीं है। पानी की टंकी भी नहीं रखवाई गई है। जिससे अंतिम संस्कार में आए लोग घाट पर ही गंदगी फैलाते हैं। इसकी शिकायत कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से की गई है लेकिन, किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि निर्माण में 38 लाख खर्च ही नहीं हुए हैं। सभी ने अपनी जेब भरी है। इसीलिए कार्रवाई नहीं की जा रही है। अंत्येष्टि स्थल गंगा के बिल्कुल किनारे बनाया गया है। जलस्तर बढ़ने के साथ अब मिट्टी की कटान शुरू हो गई है। यही हाल रहा तो कभी भी कटान से अंत्येष्टि स्थल ढहकर गंगा में समा जाएगा। जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने जांच कराकर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।

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