प्रतापगढ़। आगामी 13 जुलाई को गुरू पूर्णिमा के दिन बौद्ध अनुयायी धम्म च्क्र परिवर्तन दिवस के रूप मंे मनाते हैं। इस दिन नगर के सई नदी तट स्थित सुगतानन्द बुद्ध विहार में विश्व शांति के लिए धम्मचारिका कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। जिसमें जिले के अलावा आस पास के जिलों से बौद्ध अनुयायी भाग लेंगे। कार्यक्रम के बाद भिक्खु संघ द्वरा उपोसथ, भोजनदान, दीपोत्सव, महापरित्राण व शांति के लिए धम्मचारिका (पैदल यात्रा) करेंगे। इस आयोजन में भिक्खु करूण रक्खित बोधगया, भिक्खु विनय कीर्ति कुशीनगर, भिक्खु भन्ते मत्तानन्द नागपुर व भन्ते अश्वजीत द्वारा वर्षावास शिविर का अधिष्ठान लिया जायेगा। बौद्ध अनुयायी कन्नौजिया ने बताया कि वर्षावास रखने का प्रावधान श्रामण संस्कृति का अभिन्न अंग है। बौद्ध लोग इसे वर्षावास जैनी चातुर्मास अथवा चातुर्याम कहते हैं। जिसका पालन बौद्ध भिक्खु और जैन मुनि करते हैं।वर्षावास करने की परंपरा का शुभारम्भ स्वयं भगवान बुद्ध ने किया था जो आज तक निरन्तर चली आ रही है।
प्रतापगढ़। आगामी 13 जुलाई को गुरू पूर्णिमा के दिन बौद्ध अनुयायी धम्म च्क्र परिवर्तन दिवस के रूप मंे मनाते हैं। इस दिन नगर के सई नदी तट स्थित सुगतानन्द बुद्ध विहार में विश्व शांति के लिए धम्मचारिका कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। जिसमें जिले के अलावा आस पास के जिलों से बौद्ध अनुयायी भाग लेंगे। कार्यक्रम के बाद भिक्खु संघ द्वरा उपोसथ, भोजनदान, दीपोत्सव, महापरित्राण व शांति के लिए धम्मचारिका (पैदल यात्रा) करेंगे। इस आयोजन में भिक्खु करूण रक्खित बोधगया, भिक्खु विनय कीर्ति कुशीनगर, भिक्खु भन्ते मत्तानन्द नागपुर व भन्ते अश्वजीत द्वारा वर्षावास शिविर का अधिष्ठान लिया जायेगा। बौद्ध अनुयायी कन्नौजिया ने बताया कि वर्षावास रखने का प्रावधान श्रामण संस्कृति का अभिन्न अंग है। बौद्ध लोग इसे वर्षावास जैनी चातुर्मास अथवा चातुर्याम कहते हैं। जिसका पालन बौद्ध भिक्खु और जैन मुनि करते हैं।वर्षावास करने की परंपरा का शुभारम्भ स्वयं भगवान बुद्ध ने किया था जो आज तक निरन्तर चली आ रही है।



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