वित्त मंत्री से मिलकर इस निर्णय पर पुन: विचार करने का करेंगे आग्रह
प्रयागराज। जीएसटी कॉउंसिल द्वारा हाल ही में हुई अपनी मीटिंग में पैक किए अथवा लेबल लगाए गए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों एवं कुछ अन्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश पर देश के खाद्यान्न व्यापारियों में बेहद रोष एवं आक्रोश है और कॉउन्सिल के इस कदम को छोटे निर्माताओं एवं व्यापारियों के हितों के खिलाफ करार दिया गया जिससे आम सामान की कीमत पर बड़े ब्रांड का कारोबार बढ़ेगा। अब तक ब्रांडेड नहीं होने पर विशेष खाद्य पदार्थों, अनाज आदि को जीएसटी से छूट दी गई थी। कॉउन्सिल के इस निर्णय से प्री-पैक, प्री-लेबल दही, लस्सी और बटर मिल्क सहित प्री-पैकेज्ड और प्री-लेबल रिटेल पैक पर भी अब जीएसटी कर लगेगा और देश भर में 6500 से अधिक अनाज मंडियों में खाद्यान्न व्यापारियों के व्यापार में बड़ा अवरोध आएगा। इस विषय पर अनाज व्यापारी वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन एवं केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष श्री विवेक जौहरी से मिलेंगे और इस निर्णय पर पुन: विचार किए जाने का आग्रह करेंगे। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल एवं अजय अग्रवाल ने आज कहा की आज से शुरू हुए सप्ताह में इस मुद्दे पर देश के सभी राज्यों के वित्तमंत्रियों को उनके राज्य के खाद्यान एवं अन्य वस्तुओं के व्यापारी एक ज्ञापन देकर इस निर्णय को वापिस लेने की मांग करेंगे। फ्लोर मिल के मनोज अग्रवाल ने बताया की इस संबंध में देश भर के अनाज व्यापार संगठनों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और सभी संगठन इस निर्णय से बेहद आक्रोशित है। इस निर्णय के अनुसार अब यदि कोई किराना दुकानदार भी खाद्य पदार्थ अपनी वस्तु की केवल पहचान के लिए ही किसी मार्का के साथ पैक करके बेचता है तो उसे उस खाद्य पदार्थ पर जीएसटी चुकाना पड़ेगा। इस निर्णय के बाद प्री-पैकेज्ड लेबल वाले कृषि उत्पादों जैसे पनीर, छाछ, पैकेज्ड दही, गेहूं का आटा, अन्य अनाज, शहद, पापड़, खाद्यान्न, मांस और मछली (फ्रोजन को छोड़कर), मुरमुरे और गुड़ आदि भी महंगे हो जाएंगे जबकि इन वस्तुओं का उपयोग देश का आम आदमी करता है।



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