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स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व को सनातन संस्कृति और दर्शन से आलोकित कियाः रजनीकांत

प्रयागराज। केपी ट्रस्ट के पूर्व प्रत्याशी रजनीकांत ने कहा कि युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद ने अपने असीम ज्ञान व पुरुषार्थ से पूरे विश्व को सनातन संस्कृति व दर्शन की ज्योति से आलोकित किया। विदेशी आक्रांताओं द्वारा सदियों तक किए गए आर्थिक शारीरिक मानसिक और बौद्धिक उत्पीड़न के कारण निस्सहाय नीर उपाय जर्जर  दीन हीन दशा में पड़े भारतवर्ष और उसकी चेतना को शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में अपने ओजस्वी उद्बोधन द्वारा जागृत करने तथा भारतीय सभ्यता और संस्कृति का विश्व के सामने उद्घोष करने वाले कायस्थ कुलश्रेष्ठ स्वामी विवेकानंद  अस्पृश्यता व सामाजिक आडंबरों के प्रखर आलोचक थे। स्वामी विवेकानंद जी के विचारों में अध्यात्म, राष्ट्रवाद व आधुनिकता का अद्भुत समन्वय था। राष्ट्र के प्रेरणापुंज विवेकानंद ने अपने प्रगतिशील विचारों से युवाओं में राष्ट्रनिर्माण की चेतना जगाई। उठो जागो और लक्ष्य को प्राप्त करो। उनके निर्वाण दिवस पर हर भारतीय उनकी शिक्षा व आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प ले, यही ऐसे महामानव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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प्रयागराज। केपी ट्रस्ट के पूर्व प्रत्याशी रजनीकांत ने कहा कि युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद ने अपने असीम ज्ञान व पुरुषार्थ से पूरे विश्व को सनातन संस्कृति व दर्शन की ज्योति से आलोकित किया। विदेशी आक्रांताओं द्वारा सदियों तक किए गए आर्थिक शारीरिक मानसिक और बौद्धिक उत्पीड़न के कारण निस्सहाय नीर उपाय जर्जर  दीन हीन दशा में पड़े भारतवर्ष और उसकी चेतना को शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में अपने ओजस्वी उद्बोधन द्वारा जागृत करने तथा भारतीय सभ्यता और संस्कृति का विश्व के सामने उद्घोष करने वाले कायस्थ कुलश्रेष्ठ स्वामी विवेकानंद  अस्पृश्यता व सामाजिक आडंबरों के प्रखर आलोचक थे। स्वामी विवेकानंद जी के विचारों में अध्यात्म, राष्ट्रवाद व आधुनिकता का अद्भुत समन्वय था। राष्ट्र के प्रेरणापुंज विवेकानंद ने अपने प्रगतिशील विचारों से युवाओं में राष्ट्रनिर्माण की चेतना जगाई। उठो जागो और लक्ष्य को प्राप्त करो। उनके निर्वाण दिवस पर हर भारतीय उनकी शिक्षा व आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प ले, यही ऐसे महामानव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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