अयोध्या । होम्योपैथी चिकित्सा विकास महासंघ द्वारा होम्योपैथी के जनक डॉ हैनिमैन की पुण्यतिथि को विश्व होम्योपैथिक फिजिशयन दिवस के रूप में स्मरण किया गया। इस अवसर पर होम्योपैथ चिकित्सकों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। महासंघ के महासचिव डॉ उपेन्द्रमणि त्रिपाठी ने कहा डॉ हैनिमैन अपने समय के ऐसे महान चिकित्साविद हुए जिनके कोमल हृदय ने प्रचलित चिकित्सा पद्धति एवं मानवता की पीड़ा की अनुभूति की और उनकी वैज्ञानिक दृष्टि उसका समाधान खोजने में जुट गई, अपने संकल्प की सिद्धि के लिए उन्होंने दवाओं के प्रयोग जीव जंतुओं पर नहीं अपितु स्वयं पर अपने परिवारीजनों और फिर विश्वासपात्र मित्रों पर कर दवाओं के वास्तविक प्रभाव का अध्ययन कर विश्व को प्रकृति के अनुरूप प्राकृतिक चिकित्सा सिद्धांत पर आधारित चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी का विकास करके दिया जिसमें सैद्धांतिक रूप से कभी परिवर्तन नहीं आया अपितु समय के साथ उसकी स्वीकार्यता और मानव स्वास्थ्य रक्षा में उपयोगिता बढ़ती गयी। कालरा, प्लेग जैसी कई महामारी के दौर के बाद विगत कोरोना महामारी काल मे भी होम्योपैथी ने अपनी उपयोगिता व विश्वसनीयता स्थापित की। डॉ उपेन्द्रमणि ने कहा डॉ हैनिमैन तत्कालीन चिकित्सा पद्धतियों के विरोध बावजूद अपने सिद्धांतों पर अटल रहे और मानवता की सेवा के लिए नई दवाओं की खोज, सिद्धि कर अपने जीवन को सार्थक करने में लगे रहे । सम्भवतः इसीलिए 88 वर्ष की अवस्था मे अपनी मृत्यु से पूर्व पेरिस में उनके अंतिम शब्द थे “मैं व्यर्थ नहीं जिया” जो आज हम सभी होम्योपैथ चिकित्सकों व चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा शब्द हैं इसलिए ऐसे महान चिकित्सक, जिसने सर्वप्रथम आवश्यक गुणों के साथ फिजिशयन को परिभाषित करते हुए बताया कि “चिकित्सक का एकमात्र लक्ष्य अपने रोगी को सरल सहज व सम्पूर्ण आरोग्य प्रदान करना है”, उसकी पुण्यतिथि को विश्व होम्योपैथिक फिजिशयन दिवस के रूप में स्मरण करते हुए और उनके अंतिम शब्दो से प्रेरणा लेते हुए मानवता की सेवा का व्रत धारण करते समय “मेरा जीवन व्यर्थ नहीं जाएगा” का संकल्प लेना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। चिकित्सा अधिकारी डॉ एपी सिंह, व डॉ कुलदीप कुमार ने महासंघ के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा होम्योपैथिक फिजिशयन के रूप में मानवता की सेवा के योग्य बनने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए हम सभी डॉ हैनिमैन के ऋणी हैं। इस अवसर पर चिकित्सकों व इंटर्नछात्रों डॉ दीपक गुप्ता, डॉ सितांशु, डॉ अभिषेक सिंह, डॉ सचिन तिवारी, डॉ आशुतोष, डॉ मनीष,डॉ नीरज मणि त्रिपाठी, डॉ अवनीश पांडेय, डॉ पंकज शर्मा, डॉ चिराग पांडेय, डॉ अरुण सैनी ने अपने विचार व्यक्त किये।
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प्रत्येक होम्योपैथ के लिए संकल्प हो- “मेरा जीवन व्यर्थ नहीं जाएगा”- डॉ उपेन्द्रमणि त्रिपाठी
अयोध्या । होम्योपैथी चिकित्सा विकास महासंघ द्वारा होम्योपैथी के जनक डॉ हैनिमैन की पुण्यतिथि को विश्व होम्योपैथिक फिजिशयन दिवस के रूप में स्मरण किया गया। इस अवसर पर होम्योपैथ चिकित्सकों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। महासंघ के महासचिव डॉ उपेन्द्रमणि त्रिपाठी ने कहा डॉ हैनिमैन अपने समय के ऐसे महान चिकित्साविद हुए जिनके कोमल हृदय ने प्रचलित चिकित्सा पद्धति एवं मानवता की पीड़ा की अनुभूति की और उनकी वैज्ञानिक दृष्टि उसका समाधान खोजने में जुट गई, अपने संकल्प की सिद्धि के लिए उन्होंने दवाओं के प्रयोग जीव जंतुओं पर नहीं अपितु स्वयं पर अपने परिवारीजनों और फिर विश्वासपात्र मित्रों पर कर दवाओं के वास्तविक प्रभाव का अध्ययन कर विश्व को प्रकृति के अनुरूप प्राकृतिक चिकित्सा सिद्धांत पर आधारित चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी का विकास करके दिया जिसमें सैद्धांतिक रूप से कभी परिवर्तन नहीं आया अपितु समय के साथ उसकी स्वीकार्यता और मानव स्वास्थ्य रक्षा में उपयोगिता बढ़ती गयी। कालरा, प्लेग जैसी कई महामारी के दौर के बाद विगत कोरोना महामारी काल मे भी होम्योपैथी ने अपनी उपयोगिता व विश्वसनीयता स्थापित की। डॉ उपेन्द्रमणि ने कहा डॉ हैनिमैन तत्कालीन चिकित्सा पद्धतियों के विरोध बावजूद अपने सिद्धांतों पर अटल रहे और मानवता की सेवा के लिए नई दवाओं की खोज, सिद्धि कर अपने जीवन को सार्थक करने में लगे रहे । सम्भवतः इसीलिए 88 वर्ष की अवस्था मे अपनी मृत्यु से पूर्व पेरिस में उनके अंतिम शब्द थे “मैं व्यर्थ नहीं जिया” जो आज हम सभी होम्योपैथ चिकित्सकों व चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा शब्द हैं इसलिए ऐसे महान चिकित्सक, जिसने सर्वप्रथम आवश्यक गुणों के साथ फिजिशयन को परिभाषित करते हुए बताया कि “चिकित्सक का एकमात्र लक्ष्य अपने रोगी को सरल सहज व सम्पूर्ण आरोग्य प्रदान करना है”, उसकी पुण्यतिथि को विश्व होम्योपैथिक फिजिशयन दिवस के रूप में स्मरण करते हुए और उनके अंतिम शब्दो से प्रेरणा लेते हुए मानवता की सेवा का व्रत धारण करते समय “मेरा जीवन व्यर्थ नहीं जाएगा” का संकल्प लेना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। चिकित्सा अधिकारी डॉ एपी सिंह, व डॉ कुलदीप कुमार ने महासंघ के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा होम्योपैथिक फिजिशयन के रूप में मानवता की सेवा के योग्य बनने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए हम सभी डॉ हैनिमैन के ऋणी हैं। इस अवसर पर चिकित्सकों व इंटर्नछात्रों डॉ दीपक गुप्ता, डॉ सितांशु, डॉ अभिषेक सिंह, डॉ सचिन तिवारी, डॉ आशुतोष, डॉ मनीष,डॉ नीरज मणि त्रिपाठी, डॉ अवनीश पांडेय, डॉ पंकज शर्मा, डॉ चिराग पांडेय, डॉ अरुण सैनी ने अपने विचार व्यक्त किये।



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