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रेलवे गेट के निर्माण में खेल, जांच के बाद जेल

नंबर फाटक पर धांधली का आरोप
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ और अंतू के बीच रेल दोहरीकरण के कार्य में मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिसमें ड्राइंग के साथ छेड़छाड़ कर रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले पूर्व स्टेशन मास्टर को राहत देने के साथ चमरौधा नदी की बालू का इस्तेमाल करने का आरोप है। जानकारी होते ही निर्माण कार्य के देखरेख की जिम्मेदारी लिए अधीक्षण अभियंता ने फौरन अधिकारी को भेज कर मामले की जांच कर के रिपोर्ट तलब की है। इससे मामला और भी गहरा गया है।
चिलबिला और जगेसरगंज स्टेशन के बीच सोनावा और गोंडे के निकट 87 नम्बर गेट है। डबलिंग कार्य में इसको भी नए लुक से बनाया जा रहा है। पता चला है कि इस जगह पर एक रिटायर स्टेशन मास्टर का मकान हैं। आरोप है कि गेट की जो ड्राइंग बनी है। उसमें मकान का कुछ हिस्सा रेलवे की जमीन में आ रहा है। जिसमें उसका शौचालय बना हुआ है। कब्जा बरकरार रखने के लिए उसने मुंशी से मिलकर गेट को करीब सात फिट आगे पीछे करा लिया। जो ड्राइंग के विपरीत है। सूत्रों की मानें तो यह मामला जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में भी है। पहले लिखा पढ़ी हुई थी। लेकिन कब्जा हटा नहीं। अब दोहरीकरण में भी रेलवे की जमीन को कब्जे में रखने का रेल कर्मी द्वारा सफल प्रयास किया जा रहा है। गेट नंबर 90 और 91 के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें लगातार आ रही है। जिसमें चमरौधा पुल की मिट्टी बालू का इस्तेमाल होने की चर्चा जोरों पर हैं।

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नंबर फाटक पर धांधली का आरोप
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ और अंतू के बीच रेल दोहरीकरण के कार्य में मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिसमें ड्राइंग के साथ छेड़छाड़ कर रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले पूर्व स्टेशन मास्टर को राहत देने के साथ चमरौधा नदी की बालू का इस्तेमाल करने का आरोप है। जानकारी होते ही निर्माण कार्य के देखरेख की जिम्मेदारी लिए अधीक्षण अभियंता ने फौरन अधिकारी को भेज कर मामले की जांच कर के रिपोर्ट तलब की है। इससे मामला और भी गहरा गया है।
चिलबिला और जगेसरगंज स्टेशन के बीच सोनावा और गोंडे के निकट 87 नम्बर गेट है। डबलिंग कार्य में इसको भी नए लुक से बनाया जा रहा है। पता चला है कि इस जगह पर एक रिटायर स्टेशन मास्टर का मकान हैं। आरोप है कि गेट की जो ड्राइंग बनी है। उसमें मकान का कुछ हिस्सा रेलवे की जमीन में आ रहा है। जिसमें उसका शौचालय बना हुआ है। कब्जा बरकरार रखने के लिए उसने मुंशी से मिलकर गेट को करीब सात फिट आगे पीछे करा लिया। जो ड्राइंग के विपरीत है। सूत्रों की मानें तो यह मामला जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में भी है। पहले लिखा पढ़ी हुई थी। लेकिन कब्जा हटा नहीं। अब दोहरीकरण में भी रेलवे की जमीन को कब्जे में रखने का रेल कर्मी द्वारा सफल प्रयास किया जा रहा है। गेट नंबर 90 और 91 के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें लगातार आ रही है। जिसमें चमरौधा पुल की मिट्टी बालू का इस्तेमाल होने की चर्चा जोरों पर हैं।

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