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श्री मद भागवत कल्प बृक्ष के सामान है : संजीव कृष्ण शास्त्री

रानीगंज। श्री मद भागवत निगम है जिसका तात्पर्य है जिसकी कोई सीमा ना हो। श्री मद भागवत कथा कल्प बृक्ष के सामान है जिसके महत्व और भाव का कोई तौल नही है। उक्त वक्तव्य रानीगंज के बाबूपट्टी में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र ऊर्फ पप्पू मिश्रा के यहाँ आयोजित श्री मद भागवत कथा के दूसरे दिन कथा ब्यास संजीव कृष्ण शास्त्री जी महराज ने दिया। कथा ब्यास ने कहा कि जिस तरह देव लोक में एक कल्प बृक्ष है जो सभी देवी देवताओं की अवश्यक्ताओं की पूर्ति करता है उसी तरह यहाँ भी कल्प बृक्ष की अवश्यकता है। जिस तरह पेट्रोल डीजल के साथ मॅहगाई बढ़ रही उसकी पूर्ति के लिए यहाँ भी कल्प बृक्ष की अवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम पुष्प को तौल सकते है पर पुष्प की सुगंध को नही हम मिठाई को तौल सकते है पर मिठास को नही हम दुःखिया को तौल सकते है पर उसके दुःख को नही इसी प्रकार श्री मद भागवत के अध्याय छंद दोहे को तौल सकते है पर उसके महत्व को नही। श्री मद भागवत ज्ञान का भंडार है जिसकी तुलना करना आसान नही। कथा का शुभारम्भ कलश यात्रा के साथ किया गया मुख्य यजमान गया प्रसाद मिश्रा के साथ रवि प्रसाद मिश्रा, केशव प्रसाद मिश्रा, आचार्य अर्पण पाण्डेय, रविशंकर तिवारी रहे।

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रानीगंज। श्री मद भागवत निगम है जिसका तात्पर्य है जिसकी कोई सीमा ना हो। श्री मद भागवत कथा कल्प बृक्ष के सामान है जिसके महत्व और भाव का कोई तौल नही है। उक्त वक्तव्य रानीगंज के बाबूपट्टी में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र ऊर्फ पप्पू मिश्रा के यहाँ आयोजित श्री मद भागवत कथा के दूसरे दिन कथा ब्यास संजीव कृष्ण शास्त्री जी महराज ने दिया। कथा ब्यास ने कहा कि जिस तरह देव लोक में एक कल्प बृक्ष है जो सभी देवी देवताओं की अवश्यक्ताओं की पूर्ति करता है उसी तरह यहाँ भी कल्प बृक्ष की अवश्यकता है। जिस तरह पेट्रोल डीजल के साथ मॅहगाई बढ़ रही उसकी पूर्ति के लिए यहाँ भी कल्प बृक्ष की अवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम पुष्प को तौल सकते है पर पुष्प की सुगंध को नही हम मिठाई को तौल सकते है पर मिठास को नही हम दुःखिया को तौल सकते है पर उसके दुःख को नही इसी प्रकार श्री मद भागवत के अध्याय छंद दोहे को तौल सकते है पर उसके महत्व को नही। श्री मद भागवत ज्ञान का भंडार है जिसकी तुलना करना आसान नही। कथा का शुभारम्भ कलश यात्रा के साथ किया गया मुख्य यजमान गया प्रसाद मिश्रा के साथ रवि प्रसाद मिश्रा, केशव प्रसाद मिश्रा, आचार्य अर्पण पाण्डेय, रविशंकर तिवारी रहे।

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