गिरते जल स्तर से हैण्डपम्प हुए खड़े व कुंओं से निकल रहा कीचड़ युक्त पानी
जन सुनवाई फाउंडेशन ने तहसील प्रशासन को किया आगाह
लोकमित्र ब्यूरो
मेजा (प्रयागराज)। तपती धूप के साथ मेजा पहाड़ी इलाके के दर्जनों गांवों में गिरते जल स्तर से पेयजल का संकट गहराता जा रहा है।क्षेत्र में अबैध कब्जे की वजह से अधिकांश तालाब सूखे और वीरान पड़े हैं। जल स्तर गिरने से कुंओं से कीचड़ युक्त पानी निकल रहा है और ज्यादातर हैण्डपम्प खड़े हो गए हैं। कुछ पंचायतों के अपने टैंकर जरूर हैं लेकिन उनका पता नही है।जन सुनवाई फाउंडेशन ने पेयजल की भयावह स्थिति को लेकर प्रशासन को आगाह किया है। विकास खण्ड मेजा के पहाड़ी क्षेत्र के दर्जनों गांव अर्से से गर्मी के दिनों में पेयजल संकट से जूझते रहे हैं।स्थानीय जन प्रतिनिधियों और सरकार की अब तक सारी कवायद पूरी तरह फेल रही है। प्रदेश की मायावती सरकार ने पहाड़ी इलाके में जल संरक्षण के लिए चेकडैम, ब्लास्टिंग कूप जैसी योजनाओं के जरिए जल संकट दूर करने की कोशिश जरूर की लेकिन करोड़ों की लागत वाली यह योजनाएं भ्र्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अधिकांश ब्लास्टिंग कूप सूखे पड़े हैं।जल संरक्षण के लिए बनाए गए चेकडैम ज्यादातर उपयोग लायक ही नही हैं। जल संरक्षण के पुराने स्रोत तालाबों पर अवैध कब्जे की वजह से बरसात के दिनों में पानी जमा नहीं हो रहा है, जिस वजह से स्रोत समय से पहले ही टूट जाते हैं। मेजा पहाड़ी से सटे कई दर्जन भर गांव ऐसे हैं जहां गर्मी के दिनों में जल स्तर गिर जाता है। जिस वजह से ग्रामीणों को पेयजल के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्राम पंचायत, हड़गड़, सींकीकला, भइयां जैसे कई गांवों के हैण्डपम्पों से पानी निकलना बंद हो गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि खराब पड़े हैण्ड पम्प को दुरुस्त कराते हुए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। आलम यह है कि गिरते जल स्तर से ज्यादातर हैंण्डपम्प रिबोर की स्थिति में हैं। जनसुनवाई फाउंडेशन के विकास खण्ड प्रभारी राजकुमार मिश्र का कहना है कि यदि समय रहते तालाबों को कब्जा मुक्त कराया जाय तो दिक्कत कम हो सकती है। उन्होंने बताया कि कई ग्राम पंचायतों में पानी के टैंकर भी थे, किन्तु उनका पता नहीं है। ग्राम पंचायत भइया के प्रधान प्रतिनिधि दिनेश ने भी इसकी पुष्टि की है। संगठन ने तहसील प्रशासन को आगाह किया है कि समय रहते व्यवस्था बहाल की जाय।



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