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साधको ने मां काली की आराधना करते हुए किया पूजन, मांगी मन्नतें

लोकमित्र ब्यूरो
कौशाम्बी। मां दुर्गा की सातवीं शक्ति मां काली स्वरूप की शुक्रवार को देवी भक्तों ने आराधना किया। कालरात्रि की उपासना करने से सिद्धियों के सारे दरवाजे खुल जाते हैं। असुरी शक्ति उनके नाम उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती है। कड़ा के शीतला धाम में साधकों ने मां की पूजा से पहले गंगा स्नान किया। इसके बाद मंदिर पहुंच विधि विधान से पूजा करते हुए मातारानी की आराधना किया। देवी के जय घोष से देवीधाम गुंजायमान हो उठा। घंट घड़ियाल की ध्वनि से चारों ओर भक्ति की रसधारा बहने लगी। शुक्रवार को देवी भक्तों ने नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि स्वरूप का दर्शन किया। मां कालरात्रि के तीन नेत्र हैं तीनों नेत्र ब्रह्मांड के समान हैं। मां काली सदैव शुभ फल देने वाली हैं। इस लिए इन्हें शुभंकरी भी कहा गया है। कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों की द्वार खुलने लगते हैं। तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर भाग जाती हैं। कड़ा के शीतला धाम में साधको ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद मां शीतला के दरबार पहुंचे। माता कालरात्रि को पुष्प, अक्षत, नैवेद्य आदि अर्पित कर आराधना किया। देवी के जयकारे से कड़ाधाम गुंजायमान रहा। यहीं हाल गांव की देवी मंदिरों का रहा। जहां पर देवी भक्तों की मां काली की आराधना करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चन किया। मंदिरों में दिन भर देवी भक्तों की भीड़ जमा रही।

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कौशाम्बी। मां दुर्गा की सातवीं शक्ति मां काली स्वरूप की शुक्रवार को देवी भक्तों ने आराधना किया। कालरात्रि की उपासना करने से सिद्धियों के सारे दरवाजे खुल जाते हैं। असुरी शक्ति उनके नाम उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती है। कड़ा के शीतला धाम में साधकों ने मां की पूजा से पहले गंगा स्नान किया। इसके बाद मंदिर पहुंच विधि विधान से पूजा करते हुए मातारानी की आराधना किया। देवी के जय घोष से देवीधाम गुंजायमान हो उठा। घंट घड़ियाल की ध्वनि से चारों ओर भक्ति की रसधारा बहने लगी। शुक्रवार को देवी भक्तों ने नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि स्वरूप का दर्शन किया। मां कालरात्रि के तीन नेत्र हैं तीनों नेत्र ब्रह्मांड के समान हैं। मां काली सदैव शुभ फल देने वाली हैं। इस लिए इन्हें शुभंकरी भी कहा गया है। कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों की द्वार खुलने लगते हैं। तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर भाग जाती हैं। कड़ा के शीतला धाम में साधको ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद मां शीतला के दरबार पहुंचे। माता कालरात्रि को पुष्प, अक्षत, नैवेद्य आदि अर्पित कर आराधना किया। देवी के जयकारे से कड़ाधाम गुंजायमान रहा। यहीं हाल गांव की देवी मंदिरों का रहा। जहां पर देवी भक्तों की मां काली की आराधना करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चन किया। मंदिरों में दिन भर देवी भक्तों की भीड़ जमा रही।

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