काल की नाशक है मां भवानी, मंदिरो में भोर से ही लगी कतार
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। वासंतिक नवरात्र में सातवे दिन आज शुक्रवार को मां आदि शक्ति के कालरात्रि स्वरूप का पूजन अर्चन पूरी श्रद्धा के साथ किया गया। भक्तो ने मां का दर्शन पूजन करके सभी के जीवन के लिए मंगल कामना की। मंदिरो में भोर से ही भक्तो की कतार लग गई। इसके बाद देर रात तक दर्शन पूजन का क्रम बना रहा। मां भगवती की सातवी शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। इन्हे काल का नाशक कहा जाता है। सातवे दिन मां कालरात्रि के पूजन का विधान है। इसदिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णतः मां कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह भागी हो जाता है। उसके समस्त पापो एवं कष्टो का नाश हो जाता है। उसे अक्षय पुण्य एवं लोको की प्राप्ति होती है। नगर स्थित मां बेल्हा देवी मंदिर में आज शुक्रवार का दिन होने के कारण अधिक भीड़ रही। श्रद्धालु कड़ी धूप होने के बावजूद घण्टो कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। दोपहर के समय भीड़ काफी अधिक बढ़ गई थी। भक्तो ने मां को प्रसाद चढ़ाया। साथ उसे परिजनो को बांटा। मां के कालरात्रि स्वरूप का पूजन सातवे क्रम में होता है। इनके स्वरूप के बारे में दुर्गा कवच में विस्तार से वर्णन मिलता है। इनकी आराधना से भक्तो के दुख व संताप हर उठते हैं यह दुश्मनो का विनाश करती है। साथ ही मनोवांछित फल प्रदान करके उपासक को संतुष्ट करती है। धर्माचार्यो का कहना है कि दुर्गा कवच में माता कालरात्रि से आंतो की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की गई है। आंत से ही सभी बीमारियां होती है। आंत से ही शुद्धता प्राप्त होती है। यदि आंत शुद्ध रहेगी तो किसी के अंदर कोई बीमारी नहीं होगी। मां का रूप बड़ा ही विकराल एवं करूणामय है। यह काल को नाश करने वाली है। इसीलिए इन्हे कालरात्रि कहा जाता है। दुर्गा सप्तशती का सातवे और दसवे अध्याय का पाठ करके मां को गुड़ का भोग अर्पण करने से हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। मां का पूजन करने के लिए भोर से ही भक्त जयकारे लगाते हुए मंदिरो में पहुंचने लगे। साथ ही देर रात तक भक्तो द्वारा पूजन अर्चन का सिलसिला जारी रहा।
काल की नाशक है मां भवानी, मंदिरो में भोर से ही लगी कतार
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। वासंतिक नवरात्र में सातवे दिन आज शुक्रवार को मां आदि शक्ति के कालरात्रि स्वरूप का पूजन अर्चन पूरी श्रद्धा के साथ किया गया। भक्तो ने मां का दर्शन पूजन करके सभी के जीवन के लिए मंगल कामना की। मंदिरो में भोर से ही भक्तो की कतार लग गई। इसके बाद देर रात तक दर्शन पूजन का क्रम बना रहा। मां भगवती की सातवी शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। इन्हे काल का नाशक कहा जाता है। सातवे दिन मां कालरात्रि के पूजन का विधान है। इसदिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णतः मां कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह भागी हो जाता है। उसके समस्त पापो एवं कष्टो का नाश हो जाता है। उसे अक्षय पुण्य एवं लोको की प्राप्ति होती है। नगर स्थित मां बेल्हा देवी मंदिर में आज शुक्रवार का दिन होने के कारण अधिक भीड़ रही। श्रद्धालु कड़ी धूप होने के बावजूद घण्टो कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। दोपहर के समय भीड़ काफी अधिक बढ़ गई थी। भक्तो ने मां को प्रसाद चढ़ाया। साथ उसे परिजनो को बांटा। मां के कालरात्रि स्वरूप का पूजन सातवे क्रम में होता है। इनके स्वरूप के बारे में दुर्गा कवच में विस्तार से वर्णन मिलता है। इनकी आराधना से भक्तो के दुख व संताप हर उठते हैं यह दुश्मनो का विनाश करती है। साथ ही मनोवांछित फल प्रदान करके उपासक को संतुष्ट करती है। धर्माचार्यो का कहना है कि दुर्गा कवच में माता कालरात्रि से आंतो की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की गई है। आंत से ही सभी बीमारियां होती है। आंत से ही शुद्धता प्राप्त होती है। यदि आंत शुद्ध रहेगी तो किसी के अंदर कोई बीमारी नहीं होगी। मां का रूप बड़ा ही विकराल एवं करूणामय है। यह काल को नाश करने वाली है। इसीलिए इन्हे कालरात्रि कहा जाता है। दुर्गा सप्तशती का सातवे और दसवे अध्याय का पाठ करके मां को गुड़ का भोग अर्पण करने से हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। मां का पूजन करने के लिए भोर से ही भक्त जयकारे लगाते हुए मंदिरो में पहुंचने लगे। साथ ही देर रात तक भक्तो द्वारा पूजन अर्चन का सिलसिला जारी रहा।



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