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डीपीआरओ ने तीन लापरवाही पर तीन सेक्रेटरियों को किया निलंबित,हड़कम्प
लम्बे समय बाद एक्शन में डीपीआरओ, लापरवाह कर्मियों में खलबली
कौशाम्बी। लंबे समय बाद जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ बाल गोविंद श्रीवास्तव अपने फुल एक्शन में दिखाई देने लगे है। डीपीआरओ ने ग्राम सभाओं का सघन निरीक्षण शुरू कर दिया है ,साथ ही सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यों पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का चाबुक चलाना भी शुरू कर दिया है ।जिला पंचायत राज अधिकारी ने 2 दिन के अंदर लगातार तीन ग्राम पंचायत अधिकारियों को कार्यों में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर लापरवाह कर्मियों को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। डीपीआरओ के निरीक्षण में धनराशि निकालने के बाद भी जेनरेटर की खरीदारी न करना और पंचायत भवन में टाइल्स ना लगवाना वीडीओ अखिलेश कुमार सोनी को महंगा पड़ गया। जिला पंचायत राज अधिकारी के निर्देश पर एडीओ पंचायत ने उनके खिलाफ चरवा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी।नेवादा ब्लॉक के बरौलहा और रामपुर गांव में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) अखिलेश कुमार सोनी की तैनाती थी। घपलेबाजी की शिकायत पर उन्हें करीब चार महीने पहले निलंबित किया जा चुका है। जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव ने 18 सितम्बर वर्ष 2021 को इन दोनों गांवों का निरीक्षण किया था। बरौलहा की गोशाला के निरीक्षण में पाया गया कि सेक्रेटरी ने जेनरेटर लगवाने के नाम पर 86 हजार रुपया प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद निकाल लिया था, लेकिन मनबढ़ वीडीओ ने जनरेटर नहीं लगवाया। बिल जरूर ब्लाक कार्यालय में लगा दिया, इसी तरह रामपुर में पाया गया कि धन निकासी के बाद भी पंचायत भवन में टाइल्स नहीं लगवाई गई है। डीपीआरओ ने पहले ग्राम विकास अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने 17 जनवरी 2022 को नेवादा ब्लॉक के एडीओ पंचायत जितेन्द्र कुमार शुक्ला को सेक्रेटरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था। एडीओ पंचायत ने गुरुवार को चरवा थाने में ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज करवा दी है। कार्रवाई के बाद से आरोपित सेक्रेटरी में खलबली मची हुई हैं। इसी प्रकार जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ बाल गोविंद श्रीवास्तव ने बुधवार को कडा विकासखंड के लेहदरी खतीब एवम कन्थुवा ग्राम पंचायत में निर्मित अंत्येष्टि स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय अंत्येष्टि स्थल में मानक के अनुसार निर्माण कार्य कराया जाना नहीं पाया गया। साथ ही बाउंड्री का निर्माण भी नहीं कराया गया ।यही नहीं इंटरलॉकिंग अपूर्ण व उखड़ी हुई पाई गई ।शवदाह हेतु स्नान चबूतरा का निर्माण भी नहीं कराया गया ।साथ ही सेक्रेटरी द्वारा मानक के अनुसार शौचालय का निर्माण भी नहीं कराया गया था।इसी प्रकार ग्राम पंचायत कंथुवा में भी अंत्येष्टि स्थल निर्माण अधूरा पाया गया। निरीक्षण के समय बाउंड्री ,हैंडपंप ,संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया था। अंत्येष्टि स्थल शवदाह, शौचालय कार्यालय कक्ष एवं स्टोर कक्ष का निर्माण कार्य पूर्ण पाया गया। अंत्येष्टि स्थल के निर्माण हेतु धनराशि ग्राम निधि खाते में मार्च माह में ही अमुक्त कर दी गई थी। किंतु ग्राम पंचायत अधिकारी आफताब आलम द्वारा अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष आतिथि तक कार्यपूर्ति उपभोग प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स डीपीआरओ कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया गया। दोनों अंत्येष्टि स्थल निर्माण हेतु धनराशि ग्राम निधि में प्रथम दृष्टया उपलब्ध होने के फल स्वरुप ग्राम पंचायत अधिकारी अफताब अलम द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण ना कराए जाने के संबंध में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर डीपीआरओ ने अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित करते हुए तत्काल प्रभाव से ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित कर दिया। वहीं दूसरी ओर मूरतगंज विकासखंड के पट्टी नरवर गांव में डीपीआरओ द्वारा अंत्येष्टि स्थल का निरीक्षण किया गया। डीपीआरओ के निरीक्षण के समय गांव में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण मानक के अनुसार कराया जाना नहीं पाया गया ।बाउंड्री टूटी हुई पाई गई। बाउंड्री में दरवाजा नहीं पाया गया, साथ ही शौचालय का निर्माण कार्य अपूर्ण पाया गया। सेक्रेटरी द्वारा हैंडपंप में प्लेटफार्म नहीं बनवाया गया । शवदाह हेतु स्नान चबूतरा का निर्माण भी नहीं पाया गया । इंटरलॉकिंग संपर्क मार्ग का कार्य भी नहीं कराया गया। ग्राम पंचायत अधिकारी अनिल कुमार द्वारा उक्त धनराशि के सापेक्ष आतिथि तक कार्य पूर्ति उपभोक्ता एवं फोटोग्राफी डीपीआरओ कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराए गए ।नतीजन अंत्येष्टि स्थल के अपूर्ण होने, मानक के अनुसार न बनवाए जाने तथा आय ब्यय का संपूर्ण विवरण कार्यालय में प्रस्तुत न कर पाने पर ग्राम पंचायत अधिकारी अनिल कुमार यादव को डीपीआरओ ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी की इस कड़ी कार्रवाई से लंबे समय से ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों की खाऊ कमाऊ नीति व सरकार के धन को खुलेआम पलीता लगाने की प्रक्रिया में विराम लगने के अनुमान लगाए जा रहे है। डीपीआरओ की कार्रवाई से लंबे समय से गांव में अंगद की तरह पैर जमाए सेक्रेटरियों के होश पख्ता हो गए है।



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