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पंचायत भवन, हो रहे मवेशियों के आश्रय स्थल में तब्दीलv

सरायअकिल, कौशाम्बी। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते मौजदा समय पंचायत भवन मवेशियों के आश्रय स्थल में तब्दील हो रहे है।सरकार का करोडों खर्च होने के बाद भी जिम्मेदारी की लापरवाही के चलते पंचायत भवन अपने उद्देश्य से भटकते नजर आ रहे हैं। नतीजन कहीं पंचायत भवन मवेशियों का आश्रय स्थल बन गए हैं, तो तमाम पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।   नेवादा ब्लाक के ज्यादातर गांवों में बने पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। कुछ पंचायत भवनों में ग्रामीणों ने अवैध रूप से कब्जा करके चारा भूसा रखने व कंडे पाथने का स्थान भी बना लिया है। ऐसे में ग्राम सभाओं में होने वाली बैठकें, परिषदीय विद्यालयों या फिर किसी अन्य सार्वजनिक स्थानों पर करानी पड़ती हैं। ग्रामीणों को भी जरूरी सूचनाओं की जानकारी के लिए ब्लाक या फिर प्रधानों के घर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में जहां एक ओर सरकार का करोडों रूपये पानी में जाता दिख रहा है वहीं गांव के लोगों को भी इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। यह हाल नेवादा के अलावा समूचे जिले का है। हालांकि इसके पीछे दोषी कौन है यह तो स्पष्ट नहीं किया जा सकता है लेकिन गांव के सरकारी जिम्मेदारों के अलावा जनप्रतिनिधि इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।  क्षेत्रीय लोगों ने ने  जिलाधिकारी सुजीत कुमार का ध्यान इस समस्या की आकृष्ट कराते हुए  कार्यवाही कराए जाने की मांग की है।

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सरायअकिल, कौशाम्बी। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते मौजदा समय पंचायत भवन मवेशियों के आश्रय स्थल में तब्दील हो रहे है।सरकार का करोडों खर्च होने के बाद भी जिम्मेदारी की लापरवाही के चलते पंचायत भवन अपने उद्देश्य से भटकते नजर आ रहे हैं। नतीजन कहीं पंचायत भवन मवेशियों का आश्रय स्थल बन गए हैं, तो तमाम पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।   नेवादा ब्लाक के ज्यादातर गांवों में बने पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। कुछ पंचायत भवनों में ग्रामीणों ने अवैध रूप से कब्जा करके चारा भूसा रखने व कंडे पाथने का स्थान भी बना लिया है। ऐसे में ग्राम सभाओं में होने वाली बैठकें, परिषदीय विद्यालयों या फिर किसी अन्य सार्वजनिक स्थानों पर करानी पड़ती हैं। ग्रामीणों को भी जरूरी सूचनाओं की जानकारी के लिए ब्लाक या फिर प्रधानों के घर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में जहां एक ओर सरकार का करोडों रूपये पानी में जाता दिख रहा है वहीं गांव के लोगों को भी इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। यह हाल नेवादा के अलावा समूचे जिले का है। हालांकि इसके पीछे दोषी कौन है यह तो स्पष्ट नहीं किया जा सकता है लेकिन गांव के सरकारी जिम्मेदारों के अलावा जनप्रतिनिधि इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।  क्षेत्रीय लोगों ने ने  जिलाधिकारी सुजीत कुमार का ध्यान इस समस्या की आकृष्ट कराते हुए  कार्यवाही कराए जाने की मांग की है।

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