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मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी को मंच पर किया सजीव

नौटंकी पंच परमेश्वर का सफल मंचन
प्रयागराज। आज मुंशी प्रेमचंद्र कृत पंच परमेश्वर की नौटंकी प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियों और नाटकों में जीवन के खट्टे मीठे तीखे अनुभवों का जो मनमोहक सामंजस्य व सम्मिश्रण दिखता है। वह अतुलनीय है।
 मुंशी जी की इस कहानी में जहां न्याय के पद पर बैठकर सत्य से जरा भी ना टलने और दूध का दूध और पानी का पानी करके न्याय करने की बात पर बल दिया जाता है वही अपने देश की साझा संस्कृति और सह – अस्तित्व की बहुत ही खूबसूरत नुमाइश की गई है। स्वर्ग रंगमंडल के कलाकारों ने अतुल यदुवंशी के निर्देशकीय कौशल में पंच परमेश्वर को नौटंकी की पारंपरिक गायकी और शिल्प में ढालकर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में नौटंकी को नया आयाम दिया और मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को सर्वाधिक सार्थकता और कलात्मकता प्रदान की। जुम्मन शेख और अलगू चौधरी भिन्न भिन्न धर्म की होने के बावजूद एक दूसरे के अंतरंग मित्र है, दोनों की मित्रता की पूरे गांव में लोग कसमें खाते हैं और इन दोनों की मित्रता गांव के बाहर दूसरे गांव में भी दूर-दूर तक मशहूर है। पत्नी के बहकावे में आकर जुम्मन खाला से बुरा व्यवहार करता है खाला अपना दु:ख की फरियाद लेकर पंचों के पास पहुंचती है, गांव में पंच को परमेश्वर का दर्जा दिया जाता था, पंचायत के सरपंच पद पर आसीन अलगू चौधरी ने अपने परम मित्र जुम्मन के खिलाफ जाकर बूढ़ी खाला के पक्ष में फैसला सुनाया। जुम्मन मियां इस बात से अलगू चौधरी से नाराज हो जाते हैं। दोनों की मित्रता आपसी वैमनस्यता में बदल जाती है। इसके कुछ समय बाद अलगू चौधरी बैलों की खरीद-फरोख्त में महाजन के खिलाफ पंचायत में खड़े होते हैं, परंतु पंच के आसन पर बैठने के बाद जुम्मन मियां वही फैसला सुनाते हैं जो सच और सही होता है और फैसला अलगू चौधरी के पक्ष में होता है। कथा के अंत में अश्कों की धारा ने मन के मैल को धो डाला और  दोनों दोस्त जब गले मिले तो दोस्ती के बीच आने वाली सभी खाईयां पट चुकी थी। न्याय की महत्ता पुनः स्थापित हो चुकी थी। रंगा रंगीली की भूमिका में धीरज अग्रवाल और प्रिया मिश्रा ने दर्शकों को मोहित किया साथ ही साथ खाला के रूप में शिवानी कश्यप तथा जुम्मन शेख की भूमिका में संदीप शुक्ला ने अभिनय को नई ऊंचाइयां प्रदान की, अलगू चौधरी के रूप में रोशन पांडे, संजू साहू की भूमिका में सरस्वती की भूमिका प्रभावशाली रही। संगीत में दिलीप कुमार गुलशन ने हारमोनियम तथा ढोलक पर नगीना तथा नक्कारे पर रामानंद ने प्रस्तुति को आवश्यक शिल्प एवम गति प्रदान की।

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नौटंकी पंच परमेश्वर का सफल मंचन
प्रयागराज। आज मुंशी प्रेमचंद्र कृत पंच परमेश्वर की नौटंकी प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियों और नाटकों में जीवन के खट्टे मीठे तीखे अनुभवों का जो मनमोहक सामंजस्य व सम्मिश्रण दिखता है। वह अतुलनीय है।
 मुंशी जी की इस कहानी में जहां न्याय के पद पर बैठकर सत्य से जरा भी ना टलने और दूध का दूध और पानी का पानी करके न्याय करने की बात पर बल दिया जाता है वही अपने देश की साझा संस्कृति और सह – अस्तित्व की बहुत ही खूबसूरत नुमाइश की गई है। स्वर्ग रंगमंडल के कलाकारों ने अतुल यदुवंशी के निर्देशकीय कौशल में पंच परमेश्वर को नौटंकी की पारंपरिक गायकी और शिल्प में ढालकर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में नौटंकी को नया आयाम दिया और मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को सर्वाधिक सार्थकता और कलात्मकता प्रदान की। जुम्मन शेख और अलगू चौधरी भिन्न भिन्न धर्म की होने के बावजूद एक दूसरे के अंतरंग मित्र है, दोनों की मित्रता की पूरे गांव में लोग कसमें खाते हैं और इन दोनों की मित्रता गांव के बाहर दूसरे गांव में भी दूर-दूर तक मशहूर है। पत्नी के बहकावे में आकर जुम्मन खाला से बुरा व्यवहार करता है खाला अपना दु:ख की फरियाद लेकर पंचों के पास पहुंचती है, गांव में पंच को परमेश्वर का दर्जा दिया जाता था, पंचायत के सरपंच पद पर आसीन अलगू चौधरी ने अपने परम मित्र जुम्मन के खिलाफ जाकर बूढ़ी खाला के पक्ष में फैसला सुनाया। जुम्मन मियां इस बात से अलगू चौधरी से नाराज हो जाते हैं। दोनों की मित्रता आपसी वैमनस्यता में बदल जाती है। इसके कुछ समय बाद अलगू चौधरी बैलों की खरीद-फरोख्त में महाजन के खिलाफ पंचायत में खड़े होते हैं, परंतु पंच के आसन पर बैठने के बाद जुम्मन मियां वही फैसला सुनाते हैं जो सच और सही होता है और फैसला अलगू चौधरी के पक्ष में होता है। कथा के अंत में अश्कों की धारा ने मन के मैल को धो डाला और  दोनों दोस्त जब गले मिले तो दोस्ती के बीच आने वाली सभी खाईयां पट चुकी थी। न्याय की महत्ता पुनः स्थापित हो चुकी थी। रंगा रंगीली की भूमिका में धीरज अग्रवाल और प्रिया मिश्रा ने दर्शकों को मोहित किया साथ ही साथ खाला के रूप में शिवानी कश्यप तथा जुम्मन शेख की भूमिका में संदीप शुक्ला ने अभिनय को नई ऊंचाइयां प्रदान की, अलगू चौधरी के रूप में रोशन पांडे, संजू साहू की भूमिका में सरस्वती की भूमिका प्रभावशाली रही। संगीत में दिलीप कुमार गुलशन ने हारमोनियम तथा ढोलक पर नगीना तथा नक्कारे पर रामानंद ने प्रस्तुति को आवश्यक शिल्प एवम गति प्रदान की।

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