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आरोपो के नीचे दब गए स्थानीय मुद्दे

प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। विधान सभा चुनाव के प्रचार प्रसार का कल शुक्रवार को अंतिम दिन है। सभी दलो के प्रत्याशी व समर्थक प्रचार प्रसार में पूरा जोर लगा रहे है। वही बेल्हा मंे लगभग सभी प्रत्याशियो की जुबान एक दूसरे के खिलाफ शब्दबाण ही चला रही है। यहां पर न तो किसी को स्थानीय समस्याओ पर ध्यान है और न ही यूपी की मजबूरी किसी को दिख रही है। यहां चुनाव में सिर्फ एक दूसरे पर आरोप, प्रत्यारोप लगाने की होड़ मची है। विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलो का घोषणापत्र क्या है। शायद इससे बेल्हा के मतदाताओ को कोई सरोकार नहीं है। हालांकि सभी दलो के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों द्वारा तरह तरह के लुभावने वादे किए जा रहे है। स्थानीय समस्याएं भी चुनाव के दौरान यहां गायब हो जाती है। लोग उन समस्याओ की शिकायत न जनसम्पर्क के दौरान नेताओ से करते है और न ही नेता इससे निजात दिलाने की ही बात करते है। खस्ताहाल सड़क, पानी की किल्लत, आसमान छूती महंगाई, शिक्षा का गिरता स्तर जैसे स्थानीय मुद्दे पर भी यहां बहस बंद हो चुकी है। साथ ही दलगत चुनावी नारो का भी यहां जोर नहीं दिखता, यहां बस एक ही चुनावी मुद्दा है, जो शायद अब बेल्हा की चुनावी परम्परा भी बनती जा रही है। वह है एक दूसरे पर आरोप जड़ने तथा शिकायते करने की परम्परा। फिलहाल ऐसा ही लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रो में दिख रहा है। अधिकांश नेता व उनके कार्यकर्ताओ को देखे तो चर्चा छिड़ते ही विपक्षियो पर आरोप प्रत्यारोप की झड़ी लगा देते है। इतना ही नहीं आमजन के बीच इसे भुनाने के अलावा प्रत्याशी एवं उनके अपने लोग चुनाव आयोग से लेकर प्रदेश भर के अधिकारियो को इसकी जानकारी भी रोजाना भेज रहे है। कल चुनाव प्रचार प्रसार का अंतिम दिन है। ऐसे में प्रत्याशी व समर्थक जनसम्पर्क अभियान में पूरा जोर लगाने का प्रयास कर रहे है।

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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। विधान सभा चुनाव के प्रचार प्रसार का कल शुक्रवार को अंतिम दिन है। सभी दलो के प्रत्याशी व समर्थक प्रचार प्रसार में पूरा जोर लगा रहे है। वही बेल्हा मंे लगभग सभी प्रत्याशियो की जुबान एक दूसरे के खिलाफ शब्दबाण ही चला रही है। यहां पर न तो किसी को स्थानीय समस्याओ पर ध्यान है और न ही यूपी की मजबूरी किसी को दिख रही है। यहां चुनाव में सिर्फ एक दूसरे पर आरोप, प्रत्यारोप लगाने की होड़ मची है। विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलो का घोषणापत्र क्या है। शायद इससे बेल्हा के मतदाताओ को कोई सरोकार नहीं है। हालांकि सभी दलो के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों द्वारा तरह तरह के लुभावने वादे किए जा रहे है। स्थानीय समस्याएं भी चुनाव के दौरान यहां गायब हो जाती है। लोग उन समस्याओ की शिकायत न जनसम्पर्क के दौरान नेताओ से करते है और न ही नेता इससे निजात दिलाने की ही बात करते है। खस्ताहाल सड़क, पानी की किल्लत, आसमान छूती महंगाई, शिक्षा का गिरता स्तर जैसे स्थानीय मुद्दे पर भी यहां बहस बंद हो चुकी है। साथ ही दलगत चुनावी नारो का भी यहां जोर नहीं दिखता, यहां बस एक ही चुनावी मुद्दा है, जो शायद अब बेल्हा की चुनावी परम्परा भी बनती जा रही है। वह है एक दूसरे पर आरोप जड़ने तथा शिकायते करने की परम्परा। फिलहाल ऐसा ही लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रो में दिख रहा है। अधिकांश नेता व उनके कार्यकर्ताओ को देखे तो चर्चा छिड़ते ही विपक्षियो पर आरोप प्रत्यारोप की झड़ी लगा देते है। इतना ही नहीं आमजन के बीच इसे भुनाने के अलावा प्रत्याशी एवं उनके अपने लोग चुनाव आयोग से लेकर प्रदेश भर के अधिकारियो को इसकी जानकारी भी रोजाना भेज रहे है। कल चुनाव प्रचार प्रसार का अंतिम दिन है। ऐसे में प्रत्याशी व समर्थक जनसम्पर्क अभियान में पूरा जोर लगाने का प्रयास कर रहे है।

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