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बेचा जा रहा पाउडर मिश्रित दूध

सेहत के लिए बढ़ रहा खतरा
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। मिलावटखोरी पर शासन एवं प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इसका परिणाम यह है कि जिले में मिलावटी दूध का कारोबार बढ़ता जा रहा है। आम जनो की बात तो दर किनार नौनिहालो को भी शुद्ध दूध मिलना मुश्किल है। जबकि दूध सम्पूर्ण आहार माना जाता है। किसी भी बीमारी अथवा कमजोरी की दशा में चिकित्सक दूध के सेवन की सलाह देने से पहले कई बार सोचते है। कारण यह है कि मिलावटी दूध सेहत के लिए खतरनाक होता है। आधुनिकता का प्रभाव शहर से लेकर गांवं तक जा पहुंचा है। इस कारण लोगो का रूझान पशुधन की ओर से घटा है। परिणाम स्वरूप दूध का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दूध का उत्पादन कम होने से उसके दाम में भी दिनो दिन बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसका फायदा उठाते हुए दुग्ध व्यवसायियो ने पानी मिलाने के साथ ही क्रीम निकालकर बेचना शुरू कर दिया है। हालत इस कदर खराब है कि अब अमृत कहे जाने वाले दूध में भी मिलावट खोरो ने जहर मिलाने का काम शुरू कर दिया है। शहर में दर्जनो स्थानो पर गुपचुप तरीके से दूध से क्रीम निकालने की मशीने लगी हुई है। वहां पर दूधिये मशीनो से क्रीम निकलवाकर व्यापारियो को बेच देते है। इसके बदले में क्रीम की भी अच्छी कीमत वसूलते है। इस व्यवसाय से जुड़े कुछ लोग बताते है कि एक लीटर दूध में 80 से 90 ग्राम तक क्रीम निकलता है। जबकि इससे दूध के गाढ़ेपन पर भी खास असर नहीं पड़ता। हालांकि दूध की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके बाद भी उसमें पानी मिलाकर तथा पतला करके पुनः गाढ़ा करने के लिए रासायनिक पाउडर का घोल मिला दिया जाता है। दूधिये इसके लिए यूरिया, आरारोट, फार्मेलिन जैसे घातक पदार्थ का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूकते है। इस दूध का इस्तेमाल करने से लाभ तो दूर हानि अवश्य होती है। खाद्य एवं औषधि विभाग इन मिलावट खोरो पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। लगन केसमय तो मिलावट खोरो का व्यवसाय अधिक बढ़ जाता है। सिंथेटिक दूध की बिक्री के चलते दूध मुंहे बच्चे बीमार हो जाते है। उन्हे इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ जाता है। इन धंधेबाजो के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से इनका हौसला बढ़ा हुआ है। बताते है कि इस तरह का दूध पीने से बच्चो को उल्टी होने लगती है। साथ ही बच्चे विभिन्न रोगो की चपेट में आ जाते है। सूत्रो के अनुसार पाउडर मिश्रित कृत्रिम दूध बनाकर बचने वालो का संगठित गिरोह है। जो घटिया किस्म के दूध की आपूर्ति कर रहे है। इसकी आपूर्ति तमाम होटलो एवं रेस्टोरेन्ट में भी धड़ल्ले से हो रही है। इसके सेवन से लोगो के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।

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सेहत के लिए बढ़ रहा खतरा
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। मिलावटखोरी पर शासन एवं प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इसका परिणाम यह है कि जिले में मिलावटी दूध का कारोबार बढ़ता जा रहा है। आम जनो की बात तो दर किनार नौनिहालो को भी शुद्ध दूध मिलना मुश्किल है। जबकि दूध सम्पूर्ण आहार माना जाता है। किसी भी बीमारी अथवा कमजोरी की दशा में चिकित्सक दूध के सेवन की सलाह देने से पहले कई बार सोचते है। कारण यह है कि मिलावटी दूध सेहत के लिए खतरनाक होता है। आधुनिकता का प्रभाव शहर से लेकर गांवं तक जा पहुंचा है। इस कारण लोगो का रूझान पशुधन की ओर से घटा है। परिणाम स्वरूप दूध का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दूध का उत्पादन कम होने से उसके दाम में भी दिनो दिन बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसका फायदा उठाते हुए दुग्ध व्यवसायियो ने पानी मिलाने के साथ ही क्रीम निकालकर बेचना शुरू कर दिया है। हालत इस कदर खराब है कि अब अमृत कहे जाने वाले दूध में भी मिलावट खोरो ने जहर मिलाने का काम शुरू कर दिया है। शहर में दर्जनो स्थानो पर गुपचुप तरीके से दूध से क्रीम निकालने की मशीने लगी हुई है। वहां पर दूधिये मशीनो से क्रीम निकलवाकर व्यापारियो को बेच देते है। इसके बदले में क्रीम की भी अच्छी कीमत वसूलते है। इस व्यवसाय से जुड़े कुछ लोग बताते है कि एक लीटर दूध में 80 से 90 ग्राम तक क्रीम निकलता है। जबकि इससे दूध के गाढ़ेपन पर भी खास असर नहीं पड़ता। हालांकि दूध की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके बाद भी उसमें पानी मिलाकर तथा पतला करके पुनः गाढ़ा करने के लिए रासायनिक पाउडर का घोल मिला दिया जाता है। दूधिये इसके लिए यूरिया, आरारोट, फार्मेलिन जैसे घातक पदार्थ का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूकते है। इस दूध का इस्तेमाल करने से लाभ तो दूर हानि अवश्य होती है। खाद्य एवं औषधि विभाग इन मिलावट खोरो पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। लगन केसमय तो मिलावट खोरो का व्यवसाय अधिक बढ़ जाता है। सिंथेटिक दूध की बिक्री के चलते दूध मुंहे बच्चे बीमार हो जाते है। उन्हे इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ जाता है। इन धंधेबाजो के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से इनका हौसला बढ़ा हुआ है। बताते है कि इस तरह का दूध पीने से बच्चो को उल्टी होने लगती है। साथ ही बच्चे विभिन्न रोगो की चपेट में आ जाते है। सूत्रो के अनुसार पाउडर मिश्रित कृत्रिम दूध बनाकर बचने वालो का संगठित गिरोह है। जो घटिया किस्म के दूध की आपूर्ति कर रहे है। इसकी आपूर्ति तमाम होटलो एवं रेस्टोरेन्ट में भी धड़ल्ले से हो रही है। इसके सेवन से लोगो के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।

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