श्रीमद् भागवत कथा में परशुरामपुर में बह रही भक्ति की बयार प्रतापगढ़। जनपद के जहनईपुर के परशुराम पुर में सोमवार से श्रीमद भगवत कथा प्रारंभ हो गई।कथा के शुभारंभ के मौके पर भक्तों द्वारा भव्य कलश यात्रा निकली। यात्रा क्षेत्र में भ्रमण कर वापस कथा स्थल पर पहुंची। सोमवार को प्रथम दिवस कथा वाचक बाल ब्यास ओम जी महराज ने भगवान के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मानवता के रास्ते पर चलकर लोगों को काम करने चाहिए। उन्होंने कहा कि आपस में कभी जलन नहीं रखनी चाहिए। अहंकार व्यक्ति के विनाश का कारण बनता हैं। इसलिए पूरी कोशिश करें कि कभी किसी का दिल न दुखाएं। वही दूसरे दिवस मंगलवार को कथा का शुभारंभ करते हुए कथा बाल व्यास ओम जी महराज ने ज्ञान भक्ति वैराग्य की कथा श्रवण करते हुए मोक्ष प्राप्ति की कथा श्रवण कराई। साथ ही व्यास नारद संवाद, परीक्षित जन्म, वस्ता के दस लक्षण, रसिका भूवि भाविका, कुन्ती चरित्र सहित विदुर मैत्री प्रसंग की कथा श्रवण कराई। कथा व्यास ओम जी महराज ने बताया कि हमेशा मधुर मीठा बोलो, वाणी के सुर सुधार लो, जिस तरह कौवा दिन भर कांय कांय करता है लेकिन कोई नहीं सुनता लेकिन जब कोयल बोलती है तो सब ध्यान से सुनते हैं। इसी लिए कोयल बनो कौवा नहीं। जीव का कल्याण भगवत भजन से होगा, क्योंकि जीव का जन्म प्रभु की भक्ति के लिए हुआ है। इस मौके पर राकेश शर्मा,संतोष शर्मा, संदीप, ओम प्रकाश शर्मा,प्रदीप अभिषेक, काजल, अखिलेश दूबे,सूरज, प्रिंस के साथ आदि श्रोता गण मौजूद रहे।
श्रीमद् भागवत कथा में परशुरामपुर में बह रही भक्ति की बयार
प्रतापगढ़। जनपद के जहनईपुर के परशुराम पुर में सोमवार से श्रीमद भगवत कथा प्रारंभ हो गई।कथा के शुभारंभ के मौके पर भक्तों द्वारा भव्य कलश यात्रा निकली। यात्रा क्षेत्र में भ्रमण कर वापस कथा स्थल पर पहुंची। सोमवार को प्रथम दिवस कथा वाचक बाल ब्यास ओम जी महराज ने भगवान के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मानवता के रास्ते पर चलकर लोगों को काम करने चाहिए। उन्होंने कहा कि आपस में कभी जलन नहीं रखनी चाहिए। अहंकार व्यक्ति के विनाश का कारण बनता हैं। इसलिए पूरी कोशिश करें कि कभी किसी का दिल न दुखाएं। वही दूसरे दिवस मंगलवार को कथा का शुभारंभ करते हुए कथा बाल व्यास ओम जी महराज ने ज्ञान भक्ति वैराग्य की कथा श्रवण करते हुए मोक्ष प्राप्ति की कथा श्रवण कराई। साथ ही व्यास नारद संवाद, परीक्षित जन्म, वस्ता के दस लक्षण, रसिका भूवि भाविका, कुन्ती चरित्र सहित विदुर मैत्री प्रसंग की कथा श्रवण कराई। कथा व्यास ओम जी महराज ने बताया कि हमेशा मधुर मीठा बोलो, वाणी के सुर सुधार लो, जिस तरह कौवा दिन भर कांय कांय करता है लेकिन कोई नहीं सुनता लेकिन जब कोयल बोलती है तो सब ध्यान से सुनते हैं। इसी लिए कोयल बनो कौवा नहीं। जीव का कल्याण भगवत भजन से होगा, क्योंकि जीव का जन्म प्रभु की भक्ति के लिए हुआ है। इस मौके पर राकेश शर्मा,संतोष शर्मा, संदीप, ओम प्रकाश शर्मा,प्रदीप अभिषेक, काजल, अखिलेश दूबे,सूरज, प्रिंस के साथ आदि श्रोता गण मौजूद रहे।



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