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गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने

अयोध्या। जनपद के कई विधानसभा क्षेत्रों में चुुनावी परिदृश्य साफ हो चुका है। अयोध्या के बाद सबसे ज्यादा चर्चा गोसाईगंज विधानसभा सीट को लेकर है। हर बार की तरह इस बार भी इस सीट पर दो बाहुबलियों की जंग ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अभय सिंह के सामने इस बार भाजपा से खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी चुनाव मैदान में हैं। माना जा रहा है कि पत्नी आरती के सहारे खब्बू सपा प्रत्याशी से टक्कर लेंगे तो उनकी पत्नी आरती के समक्ष पति की सियासी साख भी बचाने की चुनौती होगी। फिलहाल इस सीट पर दो बाहुबलियों के बीच सियासी संग्राम छिड़ गया है। अयोध्या जिले के गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद से अभय सिंह 2012 में और 2017 में खब्बू तिवारी चुनाव जीत चुके हैं। दोनों ही बाहुबली हैं और चुनाव जीतने के लिए हर स्तर की लड़ाई लड़ने में माहिर हैं। 2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी अभय सिंह ने बसपा से चुनाव मैदान में उतरे खब्बू तिवारी को करीब 58 हजार मतों से हराया था। उस चुनाव में भाजपा की जमानत जब्त हो गई थी, उसे सिर्फ 4500 वोट मिले थे। अगले चुनाव 2017 में एक बार फिर दोनों बाहुबली आमने-सामने थे। इस बार अभय सिंह फिर से सपा के प्रत्याशी बनाए गए तो खब्बू तिवारी अपना दल व भाजपा से संयुक्त प्रत्याशी बने और भाजपा के सिंबल पर चुनाव मैदान में उतरे। इस चुनाव में जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा को विजय मिली थी। गोसाईगंज सीट पर भी भाजपा को जीत मिली, हालांकि इस सीट पर अभय सिंह व खब्बू तिवारी के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। खब्बू तिवारी ने कड़े मुकाबले में अभय सिंह को करीब 11 हजार मतों से हराया था। अब 2022 में फिर दोनों बाहुबलियों के समक्ष सियासी समीकरण को अपने पक्ष में करने की चुनौती है। कुछ महीने पूर्व ही फर्जी मार्कशीट के एक मामले में खब्बू तिवारी जेल जा चुके हैं। जेल में होने के कारण वे चुनाव तो नहीं लड़ रहे लेकिन भाजपा ने उनकी पत्नी आरती तिवारी को उम्मीदवार बनाकर एक तरह से उन पर भरोसा जताया है। ऐसे में एक बार फिर से इस सीट पर दोनों बाहुबलियों की प्रतिष्ठा लग गई है। अभय सिंह जहां पिछली बार मिली हार का बदला चुकाने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं तो खब्बू तिवारी भी पत्नी आरती तिवारी के सहारे इतिहास बनाने को आतुर हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी आरती तिवारी के समक्ष अपने पति की सियासी साख बचाने की भी चुनौती होगी। गोसाईगंज के लोगों का कहना हैं कि यहां तो सीधा मुकाबला सपा व बसपा के बीच ही है लेकिन आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक संत श्रीराम द्विवेदी के पुत्र आलोक द्विवेदी भी समीकरण बिगाड़ने का काम करेंगे। 2017 में भाजपा के घटक दल अपना दल के टिकट व भाजपा के सिंबल से इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी चुनावी मैदान में थे।
मोदी लहर में इंद्र प्रताप तिवारी ने गोसाईगंज विधानसभा सीट से जीत हासिल की और अपने चिर परिचित प्रतिद्वंद्वी अभय सिंह को सियासी मात दी। प्रदेश की सियासत में कदम रखने के बाद खब्बू तिवारी ने गोंडा की रहने वाली आरती तिवारी से शादी की थी। गोसाईगंज सीट पर हालांकि अभी बसपा के दांव का इंतजार है। इस सीट पर बसपा के एक संभावित दावेदार का कुछ महीने से प्रचार चल रहा था लेकिन अब अंदरखाने इनकी जगह एक नए दावेदार का नाम सामने आ रहा है। इसी वजह से शायद बसपा इस सीट पर प्रत्याशी उतारने में देर कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी इस सीट पर टिकट की लाइन में हैं।

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अयोध्या। जनपद के कई विधानसभा क्षेत्रों में चुुनावी परिदृश्य साफ हो चुका है। अयोध्या के बाद सबसे ज्यादा चर्चा गोसाईगंज विधानसभा सीट को लेकर है। हर बार की तरह इस बार भी इस सीट पर दो बाहुबलियों की जंग ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अभय सिंह के सामने इस बार भाजपा से खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी चुनाव मैदान में हैं। माना जा रहा है कि पत्नी आरती के सहारे खब्बू सपा प्रत्याशी से टक्कर लेंगे तो उनकी पत्नी आरती के समक्ष पति की सियासी साख भी बचाने की चुनौती होगी। फिलहाल इस सीट पर दो बाहुबलियों के बीच सियासी संग्राम छिड़ गया है। अयोध्या जिले के गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद से अभय सिंह 2012 में और 2017 में खब्बू तिवारी चुनाव जीत चुके हैं। दोनों ही बाहुबली हैं और चुनाव जीतने के लिए हर स्तर की लड़ाई लड़ने में माहिर हैं। 2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी अभय सिंह ने बसपा से चुनाव मैदान में उतरे खब्बू तिवारी को करीब 58 हजार मतों से हराया था। उस चुनाव में भाजपा की जमानत जब्त हो गई थी, उसे सिर्फ 4500 वोट मिले थे। अगले चुनाव 2017 में एक बार फिर दोनों बाहुबली आमने-सामने थे। इस बार अभय सिंह फिर से सपा के प्रत्याशी बनाए गए तो खब्बू तिवारी अपना दल व भाजपा से संयुक्त प्रत्याशी बने और भाजपा के सिंबल पर चुनाव मैदान में उतरे। इस चुनाव में जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा को विजय मिली थी। गोसाईगंज सीट पर भी भाजपा को जीत मिली, हालांकि इस सीट पर अभय सिंह व खब्बू तिवारी के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। खब्बू तिवारी ने कड़े मुकाबले में अभय सिंह को करीब 11 हजार मतों से हराया था। अब 2022 में फिर दोनों बाहुबलियों के समक्ष सियासी समीकरण को अपने पक्ष में करने की चुनौती है। कुछ महीने पूर्व ही फर्जी मार्कशीट के एक मामले में खब्बू तिवारी जेल जा चुके हैं। जेल में होने के कारण वे चुनाव तो नहीं लड़ रहे लेकिन भाजपा ने उनकी पत्नी आरती तिवारी को उम्मीदवार बनाकर एक तरह से उन पर भरोसा जताया है। ऐसे में एक बार फिर से इस सीट पर दोनों बाहुबलियों की प्रतिष्ठा लग गई है। अभय सिंह जहां पिछली बार मिली हार का बदला चुकाने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं तो खब्बू तिवारी भी पत्नी आरती तिवारी के सहारे इतिहास बनाने को आतुर हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी आरती तिवारी के समक्ष अपने पति की सियासी साख बचाने की भी चुनौती होगी। गोसाईगंज के लोगों का कहना हैं कि यहां तो सीधा मुकाबला सपा व बसपा के बीच ही है लेकिन आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक संत श्रीराम द्विवेदी के पुत्र आलोक द्विवेदी भी समीकरण बिगाड़ने का काम करेंगे। 2017 में भाजपा के घटक दल अपना दल के टिकट व भाजपा के सिंबल से इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी चुनावी मैदान में थे।
मोदी लहर में इंद्र प्रताप तिवारी ने गोसाईगंज विधानसभा सीट से जीत हासिल की और अपने चिर परिचित प्रतिद्वंद्वी अभय सिंह को सियासी मात दी। प्रदेश की सियासत में कदम रखने के बाद खब्बू तिवारी ने गोंडा की रहने वाली आरती तिवारी से शादी की थी। गोसाईगंज सीट पर हालांकि अभी बसपा के दांव का इंतजार है। इस सीट पर बसपा के एक संभावित दावेदार का कुछ महीने से प्रचार चल रहा था लेकिन अब अंदरखाने इनकी जगह एक नए दावेदार का नाम सामने आ रहा है। इसी वजह से शायद बसपा इस सीट पर प्रत्याशी उतारने में देर कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी इस सीट पर टिकट की लाइन में हैं।

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