संतान की खुशहाली को करेगी पूजा अर्चना
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। संतान की खुशहाली एवं दीर्घायु के लिए आज शुक्रवार को पुत्रवती महिलाएं गणेश चतुर्थी का निर्जला व्रत रखेगी। साथ ही शाम को चन्द्रोदय के बाद पूजा अर्चना करेगी। महिलाएं आज व्रत की तैयारी में लगी रही। बाजारो में आज जगह जगह पूजन सामग्री की दुकाने सज रही। वहां पर खरीददारो की भीड़ के कारण काफी चहल पहल दिखाई पड़ी। माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत रखा जाता है। आचार्यो का कहना है कि वैसे तो हर महीने में दो चतुर्थी होती है। इसमें शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी तथा कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्ठी कहा जाता है। वही माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। इसे संकट चैथ व तिलकुट के नामो से भी जाना जाता है। संकष्टा का अर्थ सकट हरण करने वाली चतुर्थी से है। इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने पुत्र की दीर्घायु एवं खुशहाली के लिए व्रत रखकर पूजन करती है। इस दिन निर्जला व्रत रहकर भगवान गणपति की पूजा की जाती है। साथ ही उन्हे तिल का लड्डू चढ़ाया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन सुबह उठकर स्नान करके निर्जला व्रत का संकल्प लेती है। कुछ जगह महिलाएं रात मंे भी व्रत रखती है। इसके बाद अगले दिन सुबह व्रत का पारण करती है। जबकि कुछ जगह व्रती महिलाएं चन्द्र दर्शन के बाद फलाहार कर लेती है। इस व्रत में शकरकंद जरूर खाया जाता है। महिलाएं कुछ स्थानो पर जुटकर भी पूजा करती है। वही कुछ महिलाएं घरो में ही पूजन सम्पन्न करती है। पूजन मे जल, अक्षत, दुर्वा, लड्डू, पान, सुपारी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। आज बाजारो में पूजन सामग्री शकरकंद, गन्ना, गुड़, तिल्ली आदि की दुकानो पर भीड़ जुटी रही। इसके अलावा पूजन सामग्री के रूप में अमसय, बैगन, मूली, गाजर आदि की भी खूब खरीददारी हुई। इससे बाजारो में काफी रौनक दिखाई पड़ी।
संतान की खुशहाली को करेगी पूजा अर्चना
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। संतान की खुशहाली एवं दीर्घायु के लिए आज शुक्रवार को पुत्रवती महिलाएं गणेश चतुर्थी का निर्जला व्रत रखेगी। साथ ही शाम को चन्द्रोदय के बाद पूजा अर्चना करेगी। महिलाएं आज व्रत की तैयारी में लगी रही। बाजारो में आज जगह जगह पूजन सामग्री की दुकाने सज रही। वहां पर खरीददारो की भीड़ के कारण काफी चहल पहल दिखाई पड़ी। माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत रखा जाता है। आचार्यो का कहना है कि वैसे तो हर महीने में दो चतुर्थी होती है। इसमें शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी तथा कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्ठी कहा जाता है। वही माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। इसे संकट चैथ व तिलकुट के नामो से भी जाना जाता है। संकष्टा का अर्थ सकट हरण करने वाली चतुर्थी से है। इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने पुत्र की दीर्घायु एवं खुशहाली के लिए व्रत रखकर पूजन करती है। इस दिन निर्जला व्रत रहकर भगवान गणपति की पूजा की जाती है। साथ ही उन्हे तिल का लड्डू चढ़ाया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन सुबह उठकर स्नान करके निर्जला व्रत का संकल्प लेती है। कुछ जगह महिलाएं रात मंे भी व्रत रखती है। इसके बाद अगले दिन सुबह व्रत का पारण करती है। जबकि कुछ जगह व्रती महिलाएं चन्द्र दर्शन के बाद फलाहार कर लेती है। इस व्रत में शकरकंद जरूर खाया जाता है। महिलाएं कुछ स्थानो पर जुटकर भी पूजा करती है। वही कुछ महिलाएं घरो में ही पूजन सम्पन्न करती है। पूजन मे जल, अक्षत, दुर्वा, लड्डू, पान, सुपारी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। आज बाजारो में पूजन सामग्री शकरकंद, गन्ना, गुड़, तिल्ली आदि की दुकानो पर भीड़ जुटी रही। इसके अलावा पूजन सामग्री के रूप में अमसय, बैगन, मूली, गाजर आदि की भी खूब खरीददारी हुई। इससे बाजारो में काफी रौनक दिखाई पड़ी।



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