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बेल्हा में लगातार बारिश से बढ़ा ठण्ड का प्रकोप

लोगो को घर से निकलना हुआ मुश्किल
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। बेल्हा में मौसम का कहर जारी है। बीते दो दिनो से रिमझिम बरसात हो रही है। गुरूवार को अपरान्ह बूंदाबादी शुरू हुई तो पानी की बूंदे आज दोपहर बाद ही टूटी। इससे जहां ठण्ड का प्रकोप बढ़ गया है वही सड़का व गलियो में जलभराव व कीचड़ हो जाने के कारण लोगो को घरो से निकलना मुश्किल हो गया है। किसानो का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण मवेशियों के लिए चारे की दिक्कत हो गई है। वही यह बारिश गेहूं के लिए तो फायदेमंद है। जबकि रबी की अन्य फसलो के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। जिले में वैसे तो मौसम पखवारे भर से बदला हुआ है। कोहरे का प्रकोप भी करीब माह भर से जारी है। वही परसो बुधवार से ही वर्षा का क्रम बना हुआ है। गुरूवार को शाम के समय रिमझिम बरसात शुरू हुई तो पूरी रात बरसात होती ही। साथ ही सुबह से लेकर दोपहर बाद तक वर्षा की बूंदे गिरती रही। इससे सड़को एवं गलियो में जलभराव व कीचड़ का साम्राज्य स्थापित हो गया है। वर्षा कभी तेज तो कभी धीमी रफ्तार से हो रही थी। सर्दी में पानी की बूंदे बर्फ के गोलो जैसी लग रही थी। वे शरीर के जिस अंग पर पड़ती लोग उचक उठते थे। बरसात के कारण लोग घरो में ही दुबके रहे। इस तरह का मौसम बन गया है कि लोग घरो से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। इसके बावजूद मजबूरीवश उन्हे निकलना पड़ रहा है। प्रशासन ने हाईस्कूल तक के स्कूलो को 16 जनवरी तक बंद कर दिया है। इससे बच्चो को राहत मिल गई है। कड़ाके की ठण्ड के बावजूद नगर में कही भी अलाव नहीं नजर आ रहा है। लोगो के हाथ व पैर की उंगलियां गलन के कारण सिकुड़ जा रही है। ठण्ड के कारण लोग बीमारी की चपेट में भी आने लगे है। किसानो का कहना है कि लगातार बारिश होने के कारण मवेशियो के लिए चारा मिलना मुश्किल हो गया है। हालांकि लोगो का कहना है कि कड़कती ठण्ड में हुई वर्षा ने भले ही जनजीवन को असामान्य किया हो लेकिन फसलो पर पड़ा पानी अमृत माना जा रहा है। किसान इस वर्षा से झूम उठते है। वे इसे गेहूं के लिए वरदान मान रहे है। साथ ही वर्षा से उनकी सिचाई का खर्च बच गया है। किसानो ने इसे भगवान की कृपा मानकर अपनी नजर खेतो पर गड़ा दी है।

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लोगो को घर से निकलना हुआ मुश्किल
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। बेल्हा में मौसम का कहर जारी है। बीते दो दिनो से रिमझिम बरसात हो रही है। गुरूवार को अपरान्ह बूंदाबादी शुरू हुई तो पानी की बूंदे आज दोपहर बाद ही टूटी। इससे जहां ठण्ड का प्रकोप बढ़ गया है वही सड़का व गलियो में जलभराव व कीचड़ हो जाने के कारण लोगो को घरो से निकलना मुश्किल हो गया है। किसानो का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण मवेशियों के लिए चारे की दिक्कत हो गई है। वही यह बारिश गेहूं के लिए तो फायदेमंद है। जबकि रबी की अन्य फसलो के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। जिले में वैसे तो मौसम पखवारे भर से बदला हुआ है। कोहरे का प्रकोप भी करीब माह भर से जारी है। वही परसो बुधवार से ही वर्षा का क्रम बना हुआ है। गुरूवार को शाम के समय रिमझिम बरसात शुरू हुई तो पूरी रात बरसात होती ही। साथ ही सुबह से लेकर दोपहर बाद तक वर्षा की बूंदे गिरती रही। इससे सड़को एवं गलियो में जलभराव व कीचड़ का साम्राज्य स्थापित हो गया है। वर्षा कभी तेज तो कभी धीमी रफ्तार से हो रही थी। सर्दी में पानी की बूंदे बर्फ के गोलो जैसी लग रही थी। वे शरीर के जिस अंग पर पड़ती लोग उचक उठते थे। बरसात के कारण लोग घरो में ही दुबके रहे। इस तरह का मौसम बन गया है कि लोग घरो से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। इसके बावजूद मजबूरीवश उन्हे निकलना पड़ रहा है। प्रशासन ने हाईस्कूल तक के स्कूलो को 16 जनवरी तक बंद कर दिया है। इससे बच्चो को राहत मिल गई है। कड़ाके की ठण्ड के बावजूद नगर में कही भी अलाव नहीं नजर आ रहा है। लोगो के हाथ व पैर की उंगलियां गलन के कारण सिकुड़ जा रही है। ठण्ड के कारण लोग बीमारी की चपेट में भी आने लगे है। किसानो का कहना है कि लगातार बारिश होने के कारण मवेशियो के लिए चारा मिलना मुश्किल हो गया है। हालांकि लोगो का कहना है कि कड़कती ठण्ड में हुई वर्षा ने भले ही जनजीवन को असामान्य किया हो लेकिन फसलो पर पड़ा पानी अमृत माना जा रहा है। किसान इस वर्षा से झूम उठते है। वे इसे गेहूं के लिए वरदान मान रहे है। साथ ही वर्षा से उनकी सिचाई का खर्च बच गया है। किसानो ने इसे भगवान की कृपा मानकर अपनी नजर खेतो पर गड़ा दी है।

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